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फेमा उल्लंघन: आरबीआई ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स को दी राहत, ₹40.52 लाख जमा कर बंद हुई ईडी जांच

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फेमा उल्लंघन: आरबीआई ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स को दी राहत, ₹40.52 लाख जमा कर बंद हुई ईडी जांच

सारांश

एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स ने ₹40.52 लाख चुकाकर FEMA उल्लंघन का निपटारा किया — ARF और FC-GPR फॉर्म में देरी, समय से पहले शेयर जारी करना और बिना सरकारी मंजूरी आवंटन जैसी चूकें थीं। RBI के कंपाउंडिंग ऑर्डर और ईडी की NOC के बाद जांच औपचारिक रूप से बंद।

मुख्य बातें

आरबीआई (RBI) ने 6 जुलाई 2026 को एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स के FEMA उल्लंघनों पर कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया।
कंपनी ने ₹40.52 लाख एकमुश्त जमा किए, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच बंद हुई।
उल्लंघनों में ₹9.91 करोड़ की विदेशी राशि पर ARF फॉर्म में देरी और ₹29.97 करोड़ के FC-GPR फॉर्म में विलंब शामिल था।
कंपनी ने ₹18.48 लाख के शेयर विदेशी धन मिलने से पहले और ₹2.25 करोड़ के शेयर 180 दिन बाद जारी किए।
तीन मामलों में भारत सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना शेयर आवंटित किए गए।
FEMA कंपाउंडिंग प्रक्रिया फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 के तहत संचालित होती है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) उल्लंघन मामले में 6 जुलाई 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया, जिसके तहत कंपनी ने ₹40.52 लाख एकमुश्त जमा किए। इस भुगतान के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच औपचारिक रूप से बंद कर दी। ईडी ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को जारी बयान में इसकी पुष्टि की।

मुख्य उल्लंघन क्या थे

ईडी की जांच में एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स के विरुद्ध कई FEMA उल्लंघन सामने आए। कंपनी ने ₹9.91 करोड़ की विदेशी राशि प्राप्त होने के बाद फॉर्म ARF जमा करने में देरी की। इसके साथ ही ₹29.97 करोड़ से जुड़े FC-GPR फॉर्म दाखिल करने में भी विलंब किया गया।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि कंपनी ने FEMA नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशी धनराशि प्राप्त होने से पहले ही ₹18.48 लाख मूल्य के शेयर जारी कर दिए थे। इसके अलावा, ₹2.25 करोड़ मूल्य के शेयर विदेशी निवेश मिलने के 180 दिन से अधिक समय बाद जारी किए गए, जो निर्धारित समय-सीमा के विरुद्ध था।

गौरतलब है कि कंपनी ने तीन मामलों में भारत सरकार की पूर्व मंजूरी लिए बिना शेयर आवंटित किए, जिसे भी FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया।

कंपाउंडिंग की प्रक्रिया कैसे हुई

ईडी की जांच के दौरान एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स ने FEMA की धारा 15 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए RBI के समक्ष आवेदन किया। RBI के अनुरोध पर ईडी ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी की, जिसके बाद RBI ने 6 जुलाई 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर के ज़रिए इन उल्लंघनों का निपटारा किया।

ईडी ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति के अनुसार, यदि कोई उल्लंघन कंपाउंडिंग के लिए पात्र है, निर्धारित शर्तें पूरी करता है और उसके विरुद्ध कोई लंबित जांच या कानूनी बाधा नहीं है, तो विभाग NOC जारी करता है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलता है, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होती है और कारोबार में सहजता आती है।

FEMA कंपाउंडिंग का कानूनी ढाँचा

FEMA मुख्यतः एक सिविल कानून है। इसकी धारा 15 के तहत धारा 13 में दंडनीय उल्लंघनों की कंपाउंडिंग का प्रावधान है, ताकि स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन मिले और मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। कंपाउंडिंग की पूरी प्रक्रिया फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 में निर्धारित है।

फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 के नियम 3 के तहत RBI अपने अधिकार क्षेत्र के पात्र मामलों की कंपाउंडिंग का सक्षम प्राधिकारी है। RBI ने इसके लिए मास्टर डायरेक्शन भी जारी किए हैं, जिनमें उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता, अवधि और संबंधित राशि के आधार पर कंपाउंडिंग शुल्क तय करने का विस्तृत ढाँचा है।

किन उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं होती

नियमों के अनुसार कुछ गंभीर श्रेणियों के FEMA उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण या देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले मामले शामिल हैं। एपोथेकॉन का मामला इन गंभीर श्रेणियों में नहीं आता था, इसलिए कंपाउंडिंग का मार्ग खुला था।

यह मामला भारत में विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है — FEMA अनुपालन में प्रक्रियागत चूक गंभीर परिणाम दे सकती है, हालाँकि कंपाउंडिंग का प्रावधान ऐसी कंपनियों को स्वैच्छिक सुधार का अवसर देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही लापरवाही ईडी की जांच को न्योता देती है। कंपाउंडिंग का प्रावधान एक सकारात्मक नीतिगत उपकरण है, लेकिन सवाल यह है कि क्या नियामक इन आवश्यकताओं के बारे में पर्याप्त पूर्व-जागरूकता फैला रहे हैं — या केवल उल्लंघन के बाद सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' के दावों के बीच, FEMA अनुपालन की जटिलता अभी भी एक बाधा बनी हुई है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स ने FEMA के कौन-से नियम तोड़े थे?
कंपनी ने ₹9.91 करोड़ की विदेशी राशि पर ARF फॉर्म और ₹29.97 करोड़ के FC-GPR फॉर्म समय पर दाखिल नहीं किए। इसके अलावा, विदेशी धन मिलने से पहले शेयर जारी किए, 180 दिन की सीमा के बाद शेयर आवंटित किए और तीन मामलों में सरकारी पूर्व-अनुमति के बिना शेयर दिए।
FEMA कंपाउंडिंग ऑर्डर क्या होता है?
FEMA की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें उल्लंघनकर्ता निर्धारित राशि चुकाकर मामले का स्वैच्छिक निपटारा कर सकता है। इससे लंबी अदालती कार्यवाही से बचा जाता है और RBI सक्षम प्राधिकारी के रूप में ऑर्डर जारी करता है।
ईडी ने इस मामले में NOC क्यों जारी की?
ईडी की नीति के अनुसार, यदि उल्लंघन कंपाउंडिंग के लिए पात्र है, निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं और कोई लंबित जांच या कानूनी बाधा नहीं है, तो विभाग NOC देता है। एपोथेकॉन का मामला इन सभी शर्तों पर खरा उतरा, इसलिए NOC जारी की गई।
किन FEMA उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं हो सकती?
मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण या देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े FEMA उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती। ये प्रावधान फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं।
इस मामले से विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों को क्या सीख मिलती है?
विदेशी निवेश मिलने पर ARF और FC-GPR जैसे फॉर्म समय पर दाखिल करना, शेयर आवंटन की समय-सीमा का पालन करना और आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ पहले लेना अनिवार्य है। प्रक्रियागत चूक भी ईडी जांच को आमंत्रित कर सकती है, भले ही मंशा दुर्भावनापूर्ण न हो।
राष्ट्र प्रेस
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