फेमा उल्लंघन: आरबीआई ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स को दी राहत, ₹40.52 लाख जमा कर बंद हुई ईडी जांच
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) उल्लंघन मामले में 6 जुलाई 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया, जिसके तहत कंपनी ने ₹40.52 लाख एकमुश्त जमा किए। इस भुगतान के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच औपचारिक रूप से बंद कर दी। ईडी ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को जारी बयान में इसकी पुष्टि की।
मुख्य उल्लंघन क्या थे
ईडी की जांच में एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स के विरुद्ध कई FEMA उल्लंघन सामने आए। कंपनी ने ₹9.91 करोड़ की विदेशी राशि प्राप्त होने के बाद फॉर्म ARF जमा करने में देरी की। इसके साथ ही ₹29.97 करोड़ से जुड़े FC-GPR फॉर्म दाखिल करने में भी विलंब किया गया।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि कंपनी ने FEMA नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशी धनराशि प्राप्त होने से पहले ही ₹18.48 लाख मूल्य के शेयर जारी कर दिए थे। इसके अलावा, ₹2.25 करोड़ मूल्य के शेयर विदेशी निवेश मिलने के 180 दिन से अधिक समय बाद जारी किए गए, जो निर्धारित समय-सीमा के विरुद्ध था।
गौरतलब है कि कंपनी ने तीन मामलों में भारत सरकार की पूर्व मंजूरी लिए बिना शेयर आवंटित किए, जिसे भी FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया।
कंपाउंडिंग की प्रक्रिया कैसे हुई
ईडी की जांच के दौरान एपोथेकॉन फार्मास्यूटिकल्स ने FEMA की धारा 15 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए RBI के समक्ष आवेदन किया। RBI के अनुरोध पर ईडी ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी की, जिसके बाद RBI ने 6 जुलाई 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर के ज़रिए इन उल्लंघनों का निपटारा किया।
ईडी ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति के अनुसार, यदि कोई उल्लंघन कंपाउंडिंग के लिए पात्र है, निर्धारित शर्तें पूरी करता है और उसके विरुद्ध कोई लंबित जांच या कानूनी बाधा नहीं है, तो विभाग NOC जारी करता है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलता है, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होती है और कारोबार में सहजता आती है।
FEMA कंपाउंडिंग का कानूनी ढाँचा
FEMA मुख्यतः एक सिविल कानून है। इसकी धारा 15 के तहत धारा 13 में दंडनीय उल्लंघनों की कंपाउंडिंग का प्रावधान है, ताकि स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन मिले और मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। कंपाउंडिंग की पूरी प्रक्रिया फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 में निर्धारित है।
फॉरेन एक्सचेंज (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) रूल्स, 2024 के नियम 3 के तहत RBI अपने अधिकार क्षेत्र के पात्र मामलों की कंपाउंडिंग का सक्षम प्राधिकारी है। RBI ने इसके लिए मास्टर डायरेक्शन भी जारी किए हैं, जिनमें उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता, अवधि और संबंधित राशि के आधार पर कंपाउंडिंग शुल्क तय करने का विस्तृत ढाँचा है।
किन उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं होती
नियमों के अनुसार कुछ गंभीर श्रेणियों के FEMA उल्लंघनों की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण या देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले मामले शामिल हैं। एपोथेकॉन का मामला इन गंभीर श्रेणियों में नहीं आता था, इसलिए कंपाउंडिंग का मार्ग खुला था।
यह मामला भारत में विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है — FEMA अनुपालन में प्रक्रियागत चूक गंभीर परिणाम दे सकती है, हालाँकि कंपाउंडिंग का प्रावधान ऐसी कंपनियों को स्वैच्छिक सुधार का अवसर देता है।