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RBI ने जुस्डा इंडिया पर FEMA उल्लंघन मामले में जारी किया कंपाउंडिंग आदेश, ₹12.52 लाख जुर्माना

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RBI ने जुस्डा इंडिया पर FEMA उल्लंघन मामले में जारी किया कंपाउंडिंग आदेश, ₹12.52 लाख जुर्माना

सारांश

RBI ने जुस्डा इंडिया सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर FEMA की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग आदेश जारी कर ₹12,52,984 का जुर्माना लगाया। ₹18.5 करोड़ का यह मामला सीमावर्ती देश की संस्थाओं को बिना सरकारी अनुमति शेयर जारी करने का था। ED की ‘कोई आपत्ति नहीं’ के बाद निर्णायक कार्रवाई समाप्त।

मुख्य बातें

RBI ने 8 अप्रैल को जुस्डा इंडिया सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर FEMA की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग आदेश जारी किया।
कंपनी पर ₹12,52,984 का एकमुश्त भुगतान लगाया गया; मूल मामला ₹18.5 करोड़ का था।
उल्लंघन FEM (NDI) नियम 2019 के नियम 4 के तहत — सीमावर्ती देश की संस्थाओं को बिना सरकारी अनुमति शेयर जारी करना।
ED ने FEMA की धारा 16 के तहत निर्णायक प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज की थी।
ED की ‘कोई आपत्ति नहीं’ के बाद कंपनी के विरुद्ध सभी निर्णायक और कानूनी कार्रवाई समाप्त।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 8 अप्रैल को जुस्डा इंडिया सप्लाई चेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग आदेश जारी किया है, जिसमें कंपनी पर ₹12,52,984 का एकमुश्त जुर्माना लगाया गया है। यह मामला ₹18.5 करोड़ के शेयर निर्गम से जुड़ा है, जो भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देश की संस्थाओं को सरकार की पूर्व अनुमति के बिना जारी किए गए थे।

मामला क्या है

जाँच में पाया गया कि कंपनी ने FEM (NDI) नियम 2019 के नियम 4 (नियम 6(ए) और नियम 7 के साथ पठित) का उल्लंघन किया। इन नियमों के अनुसार, भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों की संस्थाओं को शेयर जारी करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यह प्रावधान मुख्यतः चीन से होने वाले अप्रत्यक्ष निवेश पर निगरानी रखने के लिए अप्रैल 2020 में लागू किया गया था।

ED की जाँच और शिकायत

विश्वसनीय सूचना के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FEMA के प्रावधानों के तहत जाँच शुरू की थी। जाँच पूरी होने के बाद ED ने FEMA की धारा 16 के तहत निर्णायक प्राधिकारी के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज की, जिसमें उल्लंघनों का ब्यौरा दिया गया।

कंपाउंडिंग प्रक्रिया

इसके बाद कंपनी ने धारा 15 के प्रावधानों के तहत उल्लंघनों के निपटान के लिए RBI के समक्ष कंपाउंडिंग आवेदन दाख़िल किया। RBI के संदर्भ पर ED ने अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप कंपाउंडिंग के लिए ‘कोई आपत्ति नहीं’ (NOC) जारी की, जिसके आधार पर केंद्रीय बैंक ने आदेश पारित किया।

आदेश का असर

₹12,52,984 के एकमुश्त भुगतान के साथ कंपनी के विरुद्ध FEMA के प्रावधानों के तहत चल रही निर्णायक कार्रवाई और आगे की संभावित कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है। गौरतलब है कि कंपाउंडिंग एक स्वैच्छिक तंत्र है, जो कंपनियों को मौद्रिक निपटान के माध्यम से लंबी मुक़दमेबाज़ी से बचने का अवसर देता है।

व्यापक संदर्भ

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब भारत सीमावर्ती देशों से होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर सख़्त निगरानी रख रहा है। पिछले कुछ वर्षों में RBI और ED ने ऐसे कई मामलों में कार्रवाई की है, जहाँ कंपनियों ने पूर्व अनुमति के बिना सीमावर्ती देशों की संस्थाओं को शेयर जारी किए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अप्रैल 2020 में चीनी निवेश की अप्रत्यक्ष आमद पर लगाम कसने के लिए लाए गए थे। ध्यान देने योग्य है कि ₹18.5 करोड़ के मामले में ₹12.52 लाख का निपटान — यानी मूल राशि का लगभग 0.7% — कंपाउंडिंग व्यवस्था की लचीली प्रकृति को दर्शाता है, जिसे आलोचक अक्सर अनुपालन की कमज़ोर निवारक शक्ति बताते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे निपटान दूसरी कंपनियों को नियम 4 का पालन करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन देते हैं, या यह केवल अनुपालन-बाद का सस्ता रास्ता बन रहा है। पारदर्शिता के लिहाज़ से, RBI द्वारा कंपाउंडिंग आदेशों का सार्वजनिक प्रकाशन एक स्वागत-योग्य कदम है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुस्डा इंडिया पर RBI का कंपाउंडिंग आदेश क्या है?
RBI ने 8 अप्रैल को जुस्डा इंडिया सप्लाई चेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध FEMA की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग आदेश जारी किया, जिसमें ₹12,52,984 का एकमुश्त जुर्माना लगाया गया। यह आदेश ED से ‘कोई आपत्ति नहीं’ मिलने के बाद पारित किया गया और इसके साथ कंपनी के विरुद्ध सभी निर्णायक कार्रवाई समाप्त हो गई।
कंपनी ने किस नियम का उल्लंघन किया था?
कंपनी ने FEM (NDI) नियम 2019 के नियम 4 का उल्लंघन किया, जिसके तहत भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देश की संस्थाओं को शेयर जारी करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। कंपनी ने यह अनुमति लिए बिना शेयर जारी किए, और यह मामला ₹18.5 करोड़ का था।
FEMA के तहत कंपाउंडिंग प्रक्रिया कैसे काम करती है?
कंपाउंडिंग एक स्वैच्छिक तंत्र है जिसमें कंपनी RBI के समक्ष आवेदन देकर मौद्रिक भुगतान के माध्यम से उल्लंघनों का निपटान कर सकती है। RBI ED से ‘कोई आपत्ति नहीं’ प्राप्त करने के बाद आदेश जारी करता है, जिसके परिणामस्वरूप आगे की कानूनी कार्रवाई समाप्त हो जाती है।
ED की भूमिका क्या रही?
ED ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर FEMA के प्रावधानों के तहत जाँच शुरू की और धारा 16 के तहत निर्णायक प्राधिकारी के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज की। बाद में, RBI के संदर्भ पर ED ने कंपाउंडिंग के लिए ‘कोई आपत्ति नहीं’ जारी की।
क्या इस आदेश के बाद कंपनी पर और कार्रवाई संभव है?
नहीं, कंपाउंडिंग आदेश के बाद इन उल्लंघनों के संबंध में कंपनी के विरुद्ध चल रही निर्णायक कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया दोनों समाप्त हो गई हैं। हालाँकि, यह केवल इन्हीं विशिष्ट उल्लंघनों तक सीमित है, अन्य कथित अनियमितताओं पर नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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