मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच बंद, RBI ने ₹2.88 लाख में कंपाउंडिंग ऑर्डर से किया निपटारा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 4 जून 2026 को पुष्टि की कि मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के उल्लंघन की जांच औपचारिक रूप से बंद कर दी गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 20 अप्रैल 2026 को फेमा की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी करते हुए ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर मामले का निपटारा किया।
जांच की पृष्ठभूमि
ED के बेंगलुरु ज़ोनल कार्यालय ने जुलाई 2025 में विश्वसनीय जानकारी के आधार पर मिंत्रा के खिलाफ फेमा उल्लंघन की जांच शुरू की थी। जांच दो अलग-अलग मामलों से संबंधित थी।
पहला मामला FEM (किसी भी विदेशी प्रतिभूति का हस्तांतरण या निर्गमन) विनियम, 2004 के विनियम 15(iii) के तहत APR प्रस्तुत करने में देरी से जुड़ा था, जिसमें ₹42.85 करोड़ की राशि शामिल थी। दूसरा मामला FEMA 120/RB-2004 के विनियमन 6(2)(iv) के तहत APR प्रस्तुत होने तक ODI के माध्यम से वित्तीय प्रतिबद्धता से संबंधित था, जिसमें ₹3.03 करोड़ की राशि थी।
कंपाउंडिंग प्रक्रिया
जांच के दौरान मिंत्रा ने स्वयं फेमा की धारा 15 के प्रावधानों के अनुसार RBI के पास कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया। कंपाउंडिंग व्यवस्था के तहत कोई भी कंपनी एक निर्धारित राशि जुर्माने के रूप में अदा कर मामले को समाप्त कर सकती है — यह प्रक्रिया लंबी कानूनी कार्यवाही से बचने का वैधानिक विकल्प है।
गौरतलब है कि RBI के संदर्भ पर ED ने अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप इस समझौते पर कोई आपत्ति नहीं जताई और 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' जारी किया।
अंतिम निपटारा
ED द्वारा जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' के आधार पर RBI ने 20 अप्रैल 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर के ज़रिये उक्त दोनों उल्लंघनों को ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर निपटा दिया। इसके साथ ही मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो गई।
आगे क्या
इस निपटारे के बाद मिंत्रा पर फेमा के तहत कोई लंबित कार्यवाही नहीं रह गई है। यह मामला उन कंपनियों के लिए एक नज़ीर है जो विदेशी प्रतिभूतियों से जुड़ी रिपोर्टिंग में देरी के बाद कंपाउंडिंग मार्ग से अनुपालन बहाल कर सकती हैं। ED के अनुसार, एजेंसी ऐसे मामलों में जहाँ कंपनी स्वेच्छा से नियामकीय प्रक्रिया अपनाती है, सहयोगात्मक रुख अपनाती है।