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मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच बंद, RBI ने ₹2.88 लाख में कंपाउंडिंग ऑर्डर से किया निपटारा

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मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच बंद, RBI ने ₹2.88 लाख में कंपाउंडिंग ऑर्डर से किया निपटारा

सारांश

ED के बेंगलुरु कार्यालय ने जुलाई 2025 में शुरू की गई मिंत्रा डिज़ाइन्स की फेमा जांच बंद कर दी है। RBI ने 20 अप्रैल 2026 को ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया — APR देरी और ODI वित्तीय प्रतिबद्धता से जुड़े दो उल्लंघनों का निपटारा।

मुख्य बातें

मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फेमा, 1999 के उल्लंघन की जांच औपचारिक रूप से बंद।
RBI ने 20 अप्रैल 2026 को फेमा की धारा 15 के तहत ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया।
जांच दो उल्लंघनों पर थी — ₹42.85 करोड़ की APR देरी और ₹3.03 करोड़ की ODI वित्तीय प्रतिबद्धता।
ED के बेंगलुरु ज़ोनल कार्यालय ने जुलाई 2025 में जांच शुरू की थी।
ED ने 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' जारी करने के बाद RBI ने कंपाउंडिंग प्रक्रिया पूरी की।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 4 जून 2026 को पुष्टि की कि मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के उल्लंघन की जांच औपचारिक रूप से बंद कर दी गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 20 अप्रैल 2026 को फेमा की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी करते हुए ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर मामले का निपटारा किया।

जांच की पृष्ठभूमि

ED के बेंगलुरु ज़ोनल कार्यालय ने जुलाई 2025 में विश्वसनीय जानकारी के आधार पर मिंत्रा के खिलाफ फेमा उल्लंघन की जांच शुरू की थी। जांच दो अलग-अलग मामलों से संबंधित थी।

पहला मामला FEM (किसी भी विदेशी प्रतिभूति का हस्तांतरण या निर्गमन) विनियम, 2004 के विनियम 15(iii) के तहत APR प्रस्तुत करने में देरी से जुड़ा था, जिसमें ₹42.85 करोड़ की राशि शामिल थी। दूसरा मामला FEMA 120/RB-2004 के विनियमन 6(2)(iv) के तहत APR प्रस्तुत होने तक ODI के माध्यम से वित्तीय प्रतिबद्धता से संबंधित था, जिसमें ₹3.03 करोड़ की राशि थी।

कंपाउंडिंग प्रक्रिया

जांच के दौरान मिंत्रा ने स्वयं फेमा की धारा 15 के प्रावधानों के अनुसार RBI के पास कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया। कंपाउंडिंग व्यवस्था के तहत कोई भी कंपनी एक निर्धारित राशि जुर्माने के रूप में अदा कर मामले को समाप्त कर सकती है — यह प्रक्रिया लंबी कानूनी कार्यवाही से बचने का वैधानिक विकल्प है।

गौरतलब है कि RBI के संदर्भ पर ED ने अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप इस समझौते पर कोई आपत्ति नहीं जताई और 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' जारी किया।

अंतिम निपटारा

ED द्वारा जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' के आधार पर RBI ने 20 अप्रैल 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर के ज़रिये उक्त दोनों उल्लंघनों को ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर निपटा दिया। इसके साथ ही मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो गई।

आगे क्या

इस निपटारे के बाद मिंत्रा पर फेमा के तहत कोई लंबित कार्यवाही नहीं रह गई है। यह मामला उन कंपनियों के लिए एक नज़ीर है जो विदेशी प्रतिभूतियों से जुड़ी रिपोर्टिंग में देरी के बाद कंपाउंडिंग मार्ग से अनुपालन बहाल कर सकती हैं। ED के अनुसार, एजेंसी ऐसे मामलों में जहाँ कंपनी स्वेच्छा से नियामकीय प्रक्रिया अपनाती है, सहयोगात्मक रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

88,000 की जुर्माना राशि ₹45 करोड़ से अधिक की संबंधित वित्तीय प्रतिबद्धताओं के मुकाबले बेहद मामूली है, जो यह सवाल उठाती है कि क्या कंपाउंडिंग दंड वास्तव में अनुपालन के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन देता है। ED और RBI के बीच समन्वित 'नो ऑब्जेक्शन' प्रक्रिया एक सकारात्मक नियामकीय संकेत है, लेकिन बड़े उल्लंघनों में इसी ढाँचे की पर्याप्तता पर बहस जारी रहेगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच क्यों शुरू हुई थी?
ED के बेंगलुरु ज़ोनल कार्यालय ने जुलाई 2025 में विश्वसनीय जानकारी के आधार पर मिंत्रा के खिलाफ फेमा जांच शुरू की थी। यह दो उल्लंघनों से संबंधित थी — APR प्रस्तुत करने में देरी (₹42.85 करोड़) और ODI के माध्यम से वित्तीय प्रतिबद्धता (₹3.03 करोड़)।
RBI का कंपाउंडिंग ऑर्डर क्या होता है?
कंपाउंडिंग ऑर्डर एक वैधानिक व्यवस्था है जिसके तहत फेमा उल्लंघन करने वाली कंपनी एक निर्धारित राशि जुर्माने के रूप में अदा कर लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए मामले को समाप्त कर सकती है। यह फेमा की धारा 15 के तहत RBI द्वारा जारी किया जाता है।
मिंत्रा को कितना जुर्माना देना पड़ा?
RBI ने 20 अप्रैल 2026 को जारी कंपाउंडिंग ऑर्डर के तहत मिंत्रा के उल्लंघनों का निपटारा ₹2,88,000 के एकमुश्त भुगतान पर किया।
ED ने मिंत्रा मामले में क्या भूमिका निभाई?
ED ने जांच के दौरान मिंत्रा के कंपाउंडिंग आवेदन पर RBI के संदर्भ पर 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' जारी किया। इसी आधार पर RBI ने कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया और जांच बंद हुई।
क्या मिंत्रा पर अब भी कोई फेमा कार्यवाही लंबित है?
नहीं। RBI के कंपाउंडिंग ऑर्डर और ED द्वारा 'नो ऑब्जेक्शन' जारी होने के बाद मिंत्रा डिज़ाइन्स के खिलाफ फेमा के तहत सभी लंबित कार्यवाहियाँ समाप्त हो गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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