'एक चतुर नार' सुनकर भावुक हुए सुमित कुमार, किशोर कुमार के स्टेज शो की यादें हुईं ताज़ा
सारांश
मुख्य बातें
किशोर कुमार के पुत्र सुमित कुमार ने हाल ही में टीवी शो 'इंडियन आइडल' में बतौर विशेष अतिथि शिरकत की, जहाँ एक प्रतिभागी की प्रस्तुति ने उन्हें भावुक कर दिया और बचपन की अनमोल यादों में ले गई। मुंबई में रिकॉर्ड हुए इस एपिसोड में सुमित ने अपने दिवंगत पिता के लाइव स्टेज शोज़ के किस्से साझा किए।
मनराज की परफॉर्मेंस ने जगाई पुरानी यादें
सुमित कुमार ने बताया कि जब प्रतिभागी मनराज ने मंच पर प्रस्तुति दी, तो वे तत्काल अपने बचपन की दुनिया में पहुँच गए। उन्होंने कहा, 'जब कंटेस्टेंट मनराज ने परफॉर्म किया, तो मैं तुरंत अपने बचपन की यादों में पहुँच गया। इस परफॉर्मेंस ने मुझे पुराने दिन याद दिला दिए, जब मैं अपने पिता और परिवार को स्टेज पर देखता था।'
'एक चतुर नार' — हँसी और हैरानी का वो माहौल
सुमित ने खासतौर पर गाने 'एक चतुर नार' का ज़िक्र किया। उनके अनुसार, 'इस गाने की परफॉर्मेंस के दौरान कई बार ऐसा होता था कि स्टेज पर मजाकिया अंदाज में स्थिति बदल जाती थी और पूरा माहौल हँसी से भर जाता था। बचपन में मैं यह सब देखकर हैरान भी होता था और खुश भी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई बार वे खुद भी मंच पर जाकर उस मज़ेदार माहौल का हिस्सा बन जाते थे।
'ईना मीना डीका' — हर शो की पहचान
सुमित कुमार ने बताया कि गाना 'ईना मीना डीका' किशोर कुमार के हर लाइव शो का अनिवार्य हिस्सा हुआ करता था। उनके शब्दों में, 'चाहे कोई भी कार्यक्रम हो, यह गाना जरूर गाया जाता था और दर्शक इसे बहुत पसंद करते थे।' यह गाना न केवल मनोरंजन का माध्यम था, बल्कि किशोर कुमार की अनूठी प्रस्तुति शैली का प्रतीक भी था।
संगीत और स्टेज के बीच बीता बचपन
सुमित ने साझा किया, 'मेरा बचपन संगीत और स्टेज शोज़ के बीच बीता है। मैंने अपने पिता किशोर कुमार को अक्सर स्टेज पर परफॉर्म करते हुए देखा। खासकर गाने 'ईना मीना डीका' और 'एक चतुर नार' मेरे लिए सिर्फ गाने नहीं थे, बल्कि बचपन की यादों का हिस्सा थे।' उनके इस खुलासे ने दर्शकों को भी भावुक कर दिया।
किशोर कुमार की विरासत
भारतीय सिनेमा के महानतम गायकों में शुमार किशोर कुमार ने अपने लंबे करियर में हज़ारों गाने गाए और हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज़ दी। 'रूप तेरा मस्ताना', 'मेरे सपनों की रानी', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'ये शाम मस्तानी' और 'ज़िंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे उनके गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में जीवित हैं। सुमित कुमार का यह भावपूर्ण संस्मरण इस बात का प्रमाण है कि किशोर कुमार की विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहेगी।