आईआईएमयूएन के ऋषभ शाह: 30,000 छात्रों को भारतीय दृष्टिकोण और वैश्विक नेतृत्व से जोड़ने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
आईआईएमयूएन के संस्थापक एवं अध्यक्ष ऋषभ शाह ने 4 अगस्त 2026 को मुंबई में बताया कि उनका संगठन 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सोच से जोड़ने के लिए पिछले 15 वर्षों से निरंतर कार्यरत है। शाह के अनुसार, अब तक करीब 30,000 छात्र संगठन के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ चुके हैं और संगठन की गतिविधियों का प्रभाव अनुमानतः 7 से 7.5 करोड़ लोगों तक पहुँचा है।
संगठन का मूल उद्देश्य
शाह ने स्पष्ट किया कि आईआईएमयूएन का केंद्रीय लक्ष्य युवाओं को यह समझाना है कि 'भारत' का अर्थ क्या है और भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को एकजुट करने की परिकल्पना कैसी दिखती है। उनके अनुसार, 15 से 24 वर्ष आयु के युवा स्वयं इन कार्यक्रमों का संचालन करते हैं और 24 वर्ष की आयु के बाद अपने-अपने करियर की राह पकड़ते हैं। इनमें से कई राजनीति, फिल्म, उद्योग और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बना रहे हैं।
विस्तार और पहुँच
शाह ने बताया कि पिछले एक वर्ष में आईआईएमयूएन ने 118 शहरों और 15 देशों में कार्यक्रम आयोजित किए। संगठन का वार्षिक सत्र अगस्त से अगले वर्ष अगस्त तक चलता है। किसी भी नए शहर में कार्यक्रम से पहले स्थानीय टीम वहाँ पहुँचकर तैयारी करती है और अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करती है। यह ढाँचा संगठन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाता है।
आगामी प्रमुख कार्यक्रम
शाह के अनुसार, 6 से 9 अगस्त के बीच इस सत्र का सबसे बड़ा और अंतिम आयोजन होगा, जिसमें करीब 2,000 छात्रों के भाग लेने की संभावना है। कई देशों से भी प्रतिभागी इसमें शामिल होंगे। यह आयोजन वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श, नेतृत्व कौशल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित रहेगा।
युवाओं पर दीर्घकालिक प्रभाव
शाह का मानना है कि कम उम्र में नेतृत्व का अनुभव युवाओं को भविष्य में जिम्मेदार नागरिक और प्रभावी निर्णयकर्ता बनने में सहायता करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 7 से 7.5 करोड़ के प्रभाव का आँकड़ा अनुमानित है और वास्तविक मूल्यांकन कार्यक्रमों से जुड़े लोगों से सीधी बातचीत के आधार पर ही संभव है। वर्ष 2011 से चले आ रहे इस अभियान ने स्कूलों और कॉलेजों को अपनी पहुँच का मुख्य माध्यम बनाया है।