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आईएमएफ की रिपोर्ट: 2026 में भारत का वैश्विक जीडीपी में 17 प्रतिशत योगदान

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आईएमएफ की रिपोर्ट: 2026 में भारत का वैश्विक जीडीपी में 17 प्रतिशत योगदान

सारांश

भारत 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 17 प्रतिशत योगदान करने के लिए तैयार है। आईएमएफ के अनुसार, यह आंकड़ा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को दर्शाता है, जो अन्य देशों के मुकाबले महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जानिए इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु।

मुख्य बातें

भारत का 2026 में वैश्विक जीडीपी में 17 प्रतिशत योगदान आईएमएफ ने 2025 की विकास दर को 7.3 प्रतिशत तक बढ़ाया अर्थव्यवस्था में स्थिरता के संकेत महंगाई दर में गिरावट का अनुमान एआई का विकास निवेश पर प्रभाव डाल सकता है

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत का 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि में 17 प्रतिशत योगदान देने की संभावना है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

आईएमएफ की शीर्ष 10 देशों की सूची में अमेरिका का वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके बाद, इंडोनेशिया का योगदान 3.8 प्रतिशत, तुर्किए का 2.2 प्रतिशत, सऊदी अरब का 1.7 प्रतिशत, और वियतनाम का 1.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। नाइजीरिया और ब्राजील का लगभग 1.5 प्रतिशत योगदान रहने की संभावना है।

इस सूची में जर्मनी 10वें स्थान पर है, जिसका वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 0.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके अतिरिक्त, अन्य यूरोपीय देशों का नाम आईएमएफ की शीर्ष 10 सूची में नहीं है।

आईएमएफ ने भारत की 2025 की आर्थिक विकास दर का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में आईएमएफ ने उल्लेख किया कि यह संशोधन चालू वित्त वर्ष, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त होगा, की चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

आईएमएफ के अनुसार, अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि इसमें थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विकास का प्रमुख इंजन बना रहेगा।

आईएमएफ ने यह भी कहा है कि वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है। इसके पीछे व्यापार तनाव में कमी, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े निवेश में तेजी जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आईएमएफ के मुताबिक, भारत में महंगाई दर 2025 में गिरावट के बाद पुनः लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी है, जिससे घरेलू मांग को भी मजबूती मिल सकती है।

हालांकि, आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि एआई से उत्पादकता में तेजी आने के कारण निवेश में कुछ कमी आ सकती है और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो सकती हैं। इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत ने वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है, जो विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह आर्थिक विकास न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026 में कितनी होगी?
भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026 में लगभग 17 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
आईएमएफ ने भारत की 2025 की विकास दर का क्या अनुमान लगाया है?
आईएमएफ ने भारत की 2025 की विकास दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत लगाया है।
2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर कितनी होने की संभावना है?
2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है।
भारत में महंगाई दर में क्या बदलाव आएगा?
भारत में महंगाई दर 2025 में गिरावट के बाद फिर से लक्ष्य के करीब पहुँच सकती है।
क्या एआई का विकास भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालेगा?
हाँ, एआई के विकास से उत्पादकता में तेजी आ सकती है, लेकिन निवेश में कमी भी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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