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धर्मांतरण रोकने के लिए देशव्यापी सख्त कानून बने: विहिप, यूपी राज्यपाल की पहल का समर्थन

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धर्मांतरण रोकने के लिए देशव्यापी सख्त कानून बने: विहिप, यूपी राज्यपाल की पहल का समर्थन

सारांश

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने यूपी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की धर्मांतरण-रोधी पहल को सकारात्मक बताते हुए पूरे देश में एकसमान और कड़े कानून की माँग की। मेडिकल संस्थानों में 'कन्वर्जन-कंट्रोल सेल' के निर्देश के बाद यह बहस राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ हो गई है।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 11 जून को यूपी राज्यपाल की धर्मांतरण-रोधी पहल का समर्थन किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश के सभी मेडिकल संस्थानों में कन्वर्जन-कंट्रोल सेल गठित करने के निर्देश दिए हैं।
विहिप ने पूरे देश में धर्मांतरण पर एकसमान और कड़े राष्ट्रीय कानून की माँग की।
नायर के अनुसार, कथित तौर पर प्रलोभन, भय या धोखे से कराए गए धर्म परिवर्तन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विहिप ने PM मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढाँचे, गो संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों की भी सराहना की।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 11 जून को कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा धर्मांतरण और 'लव जिहाद' के मामलों पर उठाए गए कदमों का विहिप पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा के लिए इस तरह की पहल को अनिवार्य बताया और पूरे देश में धर्मांतरण पर एकसमान कड़े कानूनी ढाँचे की माँग की।

राज्यपाल की पहल: क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी मेडिकल संस्थानों में धर्मांतरण रोकने के लिए विशेष 'कन्वर्जन-कंट्रोल सेल' गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मांतरण से जुड़े मामले सार्वजनिक बहस का केंद्र बने हुए हैं।

विहिप का पक्ष: क्यों ज़रूरी है सख्त कानून

नायर ने कहा कि हाल के वर्षों में कई मामलों में लोगों को कथित तौर पर प्रलोभन, भय या षड्यंत्र के ज़रिए धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किए जाने के आरोप लगे हैं। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियाँ सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती हैं और इन पर प्रभावी संस्थागत नियंत्रण की ज़रूरत है।

नायर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, भय, धोखे या लालच के माध्यम से कराया जाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की निगरानी और जाँच के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाना समय की माँग है।

राष्ट्रीय कानून की माँग

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है — पूरे देश में इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विमर्श और प्रभावी कानून बनाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि फिलहाल उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत धर्मांतरण पर कुछ प्रतिबंध हैं, लेकिन केंद्रीय स्तर पर कोई एकसमान कानून अभी तक नहीं बना है।

मोदी सरकार की नीतियों पर प्रतिक्रिया

नायर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढाँचे, डिजिटल सेवाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में हुई पहलों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से गो संरक्षण, गंगा नदी संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को साथ लेकर चलने की नीति देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे क्या

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कन्वर्जन-कंट्रोल सेल का क्रियान्वयन अभी प्रक्रियाधीन है। विहिप जैसे संगठनों के दबाव और राज्यपाल के निर्देशों के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस पहल को किस रूप में लागू करती है और क्या केंद्र सरकार राष्ट्रीय कानून पर कोई विचार आगे बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्यपाल स्तर से मेडिकल संस्थानों में 'कन्वर्जन-कंट्रोल सेल' का निर्देश एक असामान्य प्रशासनिक कदम है जो संवैधानिक और व्यावहारिक दोनों सवाल खड़े करता है। धर्म की स्वतंत्रता अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार है, और 'जबरन धर्मांतरण' की परिभाषा तथा उसकी निगरानी का दायित्व किसे सौंपा जाए — यह कानूनी रूप से जटिल प्रश्न है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नज़रअंदाज़ करती है कि देश के कई उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरना होगा। बिना स्पष्ट परिभाषा और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, ऐसे सेल दुरुपयोग के जोखिम के साथ आते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में कन्वर्जन-कंट्रोल सेल क्या है?
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी मेडिकल संस्थानों में धर्मांतरण रोकने के लिए विशेष 'कन्वर्जन-कंट्रोल सेल' गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह सेल धर्मांतरण से जुड़े मामलों की निगरानी और जाँच करेगा।
विहिप ने राज्यपाल की पहल का समर्थन क्यों किया?
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर के अनुसार, कथित तौर पर प्रलोभन, भय या धोखे से कराए जा रहे धर्मांतरण सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करते हैं और महिलाओं की गरिमा के लिए खतरा हैं। इसीलिए विहिप ने इस पहल को सकारात्मक बताया।
क्या पूरे देश में धर्मांतरण पर कोई केंद्रीय कानून है?
अभी तक भारत में धर्मांतरण पर कोई एकसमान केंद्रीय कानून नहीं है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत कुछ प्रतिबंध हैं, लेकिन विहिप राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान कड़े कानून की माँग कर रही है।
इस मुद्दे पर आम जनता और अल्पसंख्यक समुदायों पर क्या असर पड़ सकता है?
धर्मांतरण-रोधी कानून और निगरानी सेल की व्यवस्था से अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता है क्योंकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। आलोचकों का कहना है कि 'जबरन धर्मांतरण' की अस्पष्ट परिभाषा दुरुपयोग की आशंका पैदा करती है।
विहिप ने PM मोदी की किन नीतियों की तारीफ की?
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने PM मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढाँचे, डिजिटल सेवाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं, गो संरक्षण, गंगा संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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