शामली धर्मांतरण मामला: मौलाना साजिद कासमी बोले — 'मजहब में जबरदस्ती की कोई जगह नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मांतरण का एक संवेदनशील मामला चर्चा में है, जिसमें आयुष मलिक — जो कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के बाद मोहम्मद अली बन गया था — ने 30 जून 2026 को हिंदू धर्म में वापसी की घोषणा की। इस घटनाक्रम पर इस्लामी विद्वान मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी धर्म में किसी को जबरन बनाए रखना इस्लाम की शिक्षाओं के विरुद्ध है।
मौलाना कासमी का स्पष्ट बयान
मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने कहा कि इस्लाम में किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी धर्म में बनाए रखने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, 'हर व्यक्ति अपनी आस्था और मर्जी से किसी भी धर्म को अपना सकता है और उसी में रह सकता है।' उनके अनुसार किसी धर्म को अपनाना या छोड़ना पूरी तरह व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें किसी अन्य धर्म का हस्तक्षेप नहीं होता।
मौलाना कासमी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में इस्लाम का कोई हस्तक्षेप या प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह व्यक्ति की निजी पसंद करार दिया।
निकाह पर धार्मिक व्याख्या
चांदनी कुरेशी से हुए निकाह के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न पर मौलाना कासमी ने कहा कि अब जब आयुष मलिक ने हिंदू धर्म पुनः अपना लिया है, तो वह निकाह स्वतः समाप्त माना जाएगा। उनके अनुसार, 'अब उसने हिंदू धर्म अपना लिया है, तो अब उसका मजहबे इस्लाम की लड़की से ताल्लुक नहीं माना जाएगा।' इस स्थिति में पति-पत्नी का संबंध जारी नहीं रह सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
शामली के दवा व्यापारी देवराज मलिक के पुत्र आयुष मलिक के बारे में बताया जा रहा है कि एक युवती और कुछ अन्य लोगों ने कथित तौर पर उसका ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन कराया था। पिता देवराज मलिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि यह धर्मांतरण संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से किया गया था। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वायरल वीडियो और वापसी
मामले में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें आयुष मलिक स्वयं कहते दिख रहा है कि उसने अपने परिवार के लिए दोबारा हिंदू धर्म अपनाया है। वीडियो में वह अपने घर के मंदिर में पूजा-अर्चना करते और परिजनों से आशीर्वाद लेते हुए दिखाई दिया। यह वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ और मामले को नई सुर्खियाँ मिलीं।
आगे की स्थिति
यह मामला धर्मांतरण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक दबाव जैसे संवेदनशील पहलुओं को एक साथ सामने लाता है। फिलहाल पुलिस शिकायत की जाँच जारी बताई जा रही है। मौलाना कासमी की टिप्पणी ने इस बहस में एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक दृष्टिकोण जोड़ा है, जो यह रेखांकित करता है कि आस्था का चुनाव व्यक्ति का अपना अधिकार है।