उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू होगा, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर शिक्षा जगत में उत्साह
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म कोड लागू किए जाने की तैयारी है। 23 मई 2025 को सामने आई इस जानकारी के बाद शिक्षा जगत में व्यापक सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है — शिक्षकों, छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने एकमत से इसे अनुशासन, समानता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण की दिशा में एक ज़रूरी पहल बताया है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यपाल के इस निर्देश के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में यूनिफॉर्म व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्कूल स्तर पर यूनिफॉर्म की परंपरा पहले से चली आ रही है, लेकिन विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर यह पहल अपेक्षाकृत नई है। कुछ कॉलेजों में स्थानीय स्तर पर ड्रेस कोड पहले से लागू किया जा चुका है।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया
मुजफ्फरनगर स्थित शिव हर्ष किसान पीजी कॉलेज की प्राचार्य रीना पाठक ने कहा कि उनके कॉलेज में ड्रेस कोड पहले से ही लागू है और कई छात्र-छात्राएँ यूनिफॉर्म में आ रहे हैं। उनके अनुसार, 'इससे छात्रों में अनुशासन बढ़ता है और शिक्षा संस्थानों का वातावरण अधिक व्यवस्थित बनता है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से विद्यार्थियों में एक नई सकारात्मक सोच विकसित होगी।
गाजीपुर पीजी कॉलेज के प्राचार्य राघवेंद्र पांडे ने बताया कि यूनिफॉर्म के ज़रिए यह आसानी से पहचाना जा सकेगा कि कौन-सा छात्र किस विश्वविद्यालय या कॉलेज से संबंधित है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इससे उन छात्रों को सबसे अधिक राहत मिलेगी जो रोज़ नए कपड़े पहनने में सक्षम नहीं होते — यूनिफॉर्म से आर्थिक और सामाजिक भेदभाव की भावना भी कम होगी।
छात्रों की राय
मुजफ्फरनगर के एक छात्र ने कहा कि यूनिफॉर्म से कॉलेज में अनुशासन बेहतर होगा और सभी विद्यार्थियों में समानता की भावना पैदा होगी। उन्होंने जोड़ा कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई छात्र पहनावे के आधार पर खुद को अलग या कमतर महसूस न करे। छात्रों का व्यापक मत यह है कि रोज़ नए कपड़े पहनने की चिंता समाप्त होगी और सभी की एक समान पहचान बनेगी।
आम जनता और जनप्रतिनिधियों पर असर
हरदोई की रजनी तिवारी ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पहले से ही यूनिफॉर्म व्यवस्था लागू है और अब इसे विश्वविद्यालयों तक विस्तारित करना एक स्वाभाविक और सराहनीय कदम है। उनके अनुसार, इससे विद्यार्थियों में अनुशासन और एकरूपता आएगी तथा शिक्षा संस्थानों की पहचान भी मज़बूत होगी।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में सुधार और मानकीकरण को लेकर देशभर में बहस जारी है। राज्यपाल के निर्देश के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासनों से अपेक्षा है कि वे यूनिफॉर्म कोड के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करेंगे। गौरतलब है कि इस नीति का असर उत्तर प्रदेश के दर्जनों राज्य विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध सैकड़ों कॉलेजों पर पड़ेगा, जिनमें लाखों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।