राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बलिया विश्वविद्यालय समीक्षा में यूनिफॉर्म, रोजगारपरक शिक्षा और शोध संस्कृति पर दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 20 मई 2025 को लखनऊ स्थित जन भवन में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने छात्र हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, रोजगारपरक शिक्षा और शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने के व्यापक निर्देश दिए। साथ ही, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म व्यवस्था लागू करने पर विशेष जोर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, आधारभूत संरचना तथा छात्रहित संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। राज्यपाल ने महाविद्यालयों में पाई गई कमियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शासन, विभागीय अधिकारियों और कुलपति को नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने तथा खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिला महाविद्यालयों के छात्रावासों की स्थिति में सुधार, छात्राओं की सुरक्षा और सकारात्मक मार्गदर्शन पर विशेष बल दिया।
पटेल ने कहा कि छात्राओं को सही दिशा प्रदान की जाए ताकि वे असामाजिक तत्वों के प्रभाव से दूर रहकर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऐसी समितियों के गठन के निर्देश दिए जहाँ छात्र-छात्राएँ अपनी समस्याएँ खुलकर रख सकें और उनका त्वरित समाधान हो सके।
रोजगारपरक एवं वोकेशनल शिक्षा पर जोर
राज्यपाल ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से रोजगारपरक एवं वोकेशनल पाठ्यक्रम शुरू करने पर बल दिया। उन्होंने ब्यूटीशियन, मेहंदी, जीएसटी, बिंदी निर्माण, अकाउंटेंसी और मिलेट आधारित व्यंजन निर्माण जैसे पाठ्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि छात्राएँ स्वरोजगार एवं रोजगार प्राप्त करने में सक्षम बन सकें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रोजेक्ट आधारित अध्ययन, तकनीकी शिक्षा और उद्योगों की माँग के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर भी जोर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन को लेकर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान नए सिरे से पाठ्यक्रम ढाँचा तैयार कर रहे हैं। राज्यपाल ने NEP को गंभीरता से समझने और लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता दी जाए तथा उन्हें बहुआयामी और मल्टीटास्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। मुख्य विषय के साथ योग, पेंटिंग और अन्य कौशलों का ज्ञान भी दिया जाना चाहिए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
शोध संस्कृति और शिक्षक दायित्व
राज्यपाल ने सभी अध्यापकों को प्रतिवर्ष न्यूनतम दो बुक चैप्टर अथवा शोध पत्र प्रकाशित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे शोध एवं अकादमिक लेखन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। शिक्षकों को यह भी निर्देश दिया गया कि कोई भी शिक्षक ऐसा कार्य न करे जिससे गुरु की गरिमा प्रभावित हो, और समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
गौरतलब है कि जहाँ शिक्षकों की कमी है, वहाँ ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित करने तथा अन्य संस्थानों से सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए। रिक्त पदों को शीघ्र भरने और शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने पर भी बल दिया गया।
आधारभूत संरचना और डिजिटल संसाधन
राज्यपाल ने आँगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों, PHC, CHC, हेल्थ सेंटरों और महाविद्यालयों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन महाविद्यालयों का आधारभूत ढाँचा संतोषजनक नहीं है, वहाँ गुजरात सरकार के सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल की तर्ज पर गुणवत्ता सुधार की दिशा में कार्य करने को कहा गया।
उन्होंने सभी महाविद्यालयों को विद्यार्थियों के लिए 'इन्फ्लिबनेट' और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' योजना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की पुस्तकों, शोध पत्रों और शैक्षणिक सामग्री तक आसान पहुँच मिल सके।
कृषि और खेल गतिविधियाँ
कृषि विषय संचालित करने वाले महाविद्यालयों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भूमि पर जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे अतिरिक्त आय के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, विद्यार्थियों को 'खेलो इंडिया' अभियान से जोड़ने और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया। आगे, विभिन्न विषयों पर नियमित वर्कशॉप और अन्य संस्थानों के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए।