लखनऊ विश्वविद्यालय दीक्षोत्सव: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रों के पिछड़ने पर माँगा शोध, समाज-सुधार की भी दी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 31 जुलाई 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षोत्सव में उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल डिग्री-वितरण केंद्र बनकर न रहने की कड़ी नसीहत दी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि छात्राओं की तुलना में छात्रों के लगातार पिछड़ने के कारणों पर गहन शोध कराया जाए और दहेज हत्या, दुष्कर्म तथा बढ़ते अपराध जैसी सामाजिक समस्याओं के समाधान खोजे जाएँ। साथ ही छात्रावास, पुस्तकालय और मेस में पाई गई कमियों को तत्काल दूर करने के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए गए।
दीक्षोत्सव का मुख्य घटनाक्रम
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में 1,25,285 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 57,166 छात्र और 68,119 छात्राएँ शामिल थीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 111 विद्यार्थियों को 204 पदकों से सम्मानित किया गया, जिनमें 81 छात्राएँ और 30 छात्र थे।
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि पिछले सात वर्षों के परीक्षा परिणाम एक स्पष्ट प्रवृत्ति दर्शाते हैं — छात्राएँ लगातार आगे बढ़ रही हैं जबकि छात्र अपेक्षाकृत पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने इसे गंभीर शैक्षणिक चिंता बताते हुए कुलपति को इसके सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक कारणों की पड़ताल करने वाला शोध कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए।
समाज की समस्याओं पर विश्वविद्यालय की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय समाज को दिशा देने वाले केंद्र हैं, इसलिए उन्हें बढ़ते अपराध, दहेज हत्या और महिलाओं व बच्चियों के विरुद्ध अपराधों पर शोध कर ठोस समाधान प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने एक विशेष सुझाव देते हुए कुलपति को निर्देश दिया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे अपराधियों से मिलकर यह अध्ययन कराया जाए कि किन मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों में लोग जघन्य अपराध की ओर प्रवृत्त होते हैं।
गौरतलब है कि यह सुझाव भारतीय विश्वविद्यालयों में अपराध-विज्ञान और सामाजिक मनोविज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक शोध को बढ़ावा देने की दृष्टि से उल्लेखनीय है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशामुक्त भारत अभियान, जल संरक्षण, आयुष्मान भारत योजना और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की भी अपील की।
स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण पहल
दीक्षोत्सव के अवसर पर रायबरेली के लिए 300 और लखनऊ के लिए 200 आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। रायबरेली की 300 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया। इसी दिन डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में बदायूँ के लिए 300 आंगनबाड़ी किट और 300 बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण का कार्यक्रम भी आयोजित हुआ।
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में अब तक 70,793 आंगनबाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं और 5,87,459 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण पूरा हो चुका है।
बुनियादी सुविधाओं में सुधार के निर्देश
निरीक्षण में सामने आई कमियों का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल ने छात्रावासों का शीघ्र आवंटन, मेस का सुचारु संचालन, पुस्तकालय का समय बढ़ाने और शनिवार को भी लाइब्रेरी खुली रखने के निर्देश दिए। इसके अलावा छात्रावासों में वाई-फाई और वाशिंग मशीन की व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा, पेयजल और परिसर में पड़े कबाड़ के समयबद्ध निस्तारण के भी स्पष्ट आदेश दिए गए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी उपाधियाँ और अंकपत्र केवल डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएँ और उनकी हार्ड कॉपी जारी न की जाए।
अंतरराष्ट्रीय छवि और भविष्य की राह
राज्यपाल ने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय को इस वर्ष 77 देशों से 3,421 विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 64 प्रतिशत अधिक हैं। उन्होंने विदेशी विद्यार्थियों का नियमित अभिलेख रखने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
समारोह में उत्कृष्ट शिक्षकों को 'टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया, संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का लोकार्पण हुआ और एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों को भी पुरस्कृत किया गया। केंद्रीय बजट में शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि इन योजनाओं का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे। यह संदेश स्पष्ट है — विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब विश्वविद्यालय डिग्री की दीवारों से बाहर निकलकर समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।