सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 52,176 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 29 जून 2026 को सिद्धार्थनगर में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की, जहाँ 52,176 विद्यार्थियों को उपाधि, 37 मेधावियों को स्वर्ण पदक और 25 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने इस अवसर पर युवाओं से शिक्षा को राष्ट्र निर्माण, नवाचार और मानव कल्याण के साथ जोड़ने का स्पष्ट आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह का मुख्य घटनाक्रम
समारोह में प्रदान किए गए 37 स्वर्ण पदकों में से 28 छात्राओं और 9 छात्रों ने पदक प्राप्त किए — जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। सभी उपाधियाँ और अंकपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराए गए, जो डिजिटल शैक्षणिक अभिलेखों की दिशा में एक ठोस कदम है।
राज्यपाल ने 'किलकारी' क्रच और 'कलरव' बाल उपवन का लोकार्पण किया। साथ ही दीक्षांत स्मारिका, वार्षिक प्रतिवेदन, शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकें और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए विकसित 'केबो' सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया।
राज्यपाल का संदेश: डिग्री नहीं, जिम्मेदारी का संकल्प
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बाँटने वाले संस्थान नहीं, बल्कि समाज और देश को दिशा देने वाली प्रयोगशालाएँ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना के साथ विकसित भारत-2047 के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोज़गार नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित समीक्षा, नवाचार और आधुनिक तकनीक आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर भी ज़ोर दिया।
बालिका स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सशक्तीकरण
राज्यपाल ने बताया कि सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और संतकबीरनगर के कुल 700 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गई है और 600 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण कराया गया। प्रदेश स्तर पर अब तक करीब 60 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को किट उपलब्ध कराई जा चुकी है और लगभग 3 लाख बेटियों का एचपीवी टीकाकरण पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय से अब यह वैक्सीन बेटियों को निःशुल्क उपलब्ध होगी — एक ऐसा कदम जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की किशोरियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल परिसर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय में मियावाकी वन और वर्षा जल संरक्षण के लिए तालाब विकसित करने पर ज़ोर दिया।
गुजरात के सूरत के 'सर्कुलर वाटर इकोनॉमी' मॉडल का उल्लेख करते हुए उन्होंने जल संरक्षण और अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की दिशा में स्थानीय स्तर पर पहल का आह्वान किया। साथ ही 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता बताई। दहेज प्रथा को सामाजिक अभिशाप बताते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों से इसके विरुद्ध जनजागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
आगे की राह
राज्यपाल ने बताया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उत्कृष्ट शिक्षकों, पुलिस अधिकारियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागी बच्चों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। यह समारोह इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली को केवल परीक्षाफल से नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की कसौटी पर भी परखा जाएगा।