आगरा के 92वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का आह्वान — शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाएं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 3 अगस्त 2026 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के 92वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने नवाचार, अनुसंधान, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए युवाओं से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जीवन में आत्मसात करने की अपील की।
उपाधि और पदक वितरण
इस समारोह में कुल 79,832 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 64 मेधावी विद्यार्थियों को 88 पदकों से सम्मानित किया गया, जिनमें 46 पदक छात्राओं और 18 पदक छात्रों को मिले। राज्यपाल ने छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियाँ हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं।
युवाओं को राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि माता-पिता कठिन परिस्थितियों में परिश्रम कर बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाते हैं, इसलिए उनकी मेहनत और त्याग का सम्मान करना प्रत्येक विद्यार्थी का दायित्व है। उन्होंने सत्यनिष्ठा, अनुशासन, सेवा-भाव और सकारात्मक सोच को जीवन का आधार बनाने की अपील की। साथ ही भारत की हालिया उपलब्धियों — अंतरिक्ष, रक्षा, विज्ञान और खेल — का उल्लेख करते हुए युवाओं से नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
सामाजिक कार्यक्रम और अभियान
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने आगरा और इटावा के लिए आंगनबाड़ी किट वितरित कीं तथा किशोरियों के एचपीवी टीकाकरण अभियान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 71 हज़ार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा चुका है। इसके अलावा उन्होंने विद्यार्थियों से 'वेस्ट टू वेल्थ', 'वोकल फॉर लोकल', 'एक जनपद-एक उत्पाद' और मिलेट्स जैसे अभियानों से जुड़ने की भी अपील की।
विश्वविद्यालय के विकास पर निर्देश
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक दायित्व से जुड़ी पहलों की सराहना की तथा शोध कार्यों को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने सितंबर में प्रस्तावित 'एआई मंथन' के सफल आयोजन के निर्देश दिए। परिसर में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार में तेज़ी और संबद्ध महाविद्यालयों की कमियों को समयबद्ध ढंग से दूर करने के निर्देश भी दिए गए। डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियाँ उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी ज़ोर दिया गया।
अन्य गणमान्य अतिथियों के विचार
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शिक्षा को संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का आह्वान किया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग और आजीवन सीखने की संस्कृति को अपनाने पर बल दिया। पश्चिम बंगाल के पारंपरिक शिल्पकार अर्धेंदु शेखर दास को प्राकृतिक सामग्री आधारित हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास हुआ तथा शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।