राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय दीक्षांत में 22,315 छात्रों को उपाधि दी, नवाचार और सामाजिक सरोकार का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार, 21 जुलाई को मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के चौथे दीक्षांत समारोह में वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री अर्जित करना नहीं, बल्कि जीवन भर सीखते रहना, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना और नवाचार के ज़रिए राष्ट्र निर्माण में सहयोग देना है। इस अवसर पर कुल 22,315 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 7,582 छात्र और 14,733 छात्राएँ शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
समारोह के दौरान सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जनपदों के लिए कुल 700 आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। इसके साथ ही संबंधित जनपदों में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 900 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया — जो स्वास्थ्य और शिक्षा के एकीकरण का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
राज्यपाल ने बताया कि उनकी पहल पर प्रदेश में अब तक 67,643 आंगनबाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गाँवों के विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
नवाचार और विकसित भारत-2047 का आह्वान
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने युवाओं से शोध, नवाचार और स्वदेशी तकनीक के विकास के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देने का आग्रह किया। हाल ही में युवाओं द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रह का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विशेषकर छात्राओं से AI, मशीन लर्निंग और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की।
सामाजिक सरोकार और स्वास्थ्य जागरूकता
राज्यपाल ने 'माई भारत' पोर्टल के माध्यम से चलाए जा रहे नशा मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने की अपील की। उन्होंने नियमित योग, व्यायाम और संतुलित जीवनशैली के महत्व पर बल देते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान, मासिक धर्म स्वच्छता और अन्य जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय की सामाजिक गतिविधियों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रभावी निर्वहन किया है। विश्वविद्यालय द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, रक्तदान, मासिक धर्म कप वितरण, वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता
पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर देते हुए राज्यपाल ने प्रत्येक नागरिक से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और जल संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की भी अपील की।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यदि युवा अपने माता-पिता का सम्मान करें और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें, तो देश में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता भी कम हो जाएगी। समारोह में पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं तथा दीक्षोत्सव की दिग्दर्शिका, भाषण संकलन और चयनित पेंटिंग्स के संकलन का विमोचन किया गया।
आगे की राह
राज्यपाल का यह संदेश — 'जीवन भर सीखते रहो' — उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जहाँ विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की जा रही है कि वे डिग्री-वितरण केंद्र से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन के सक्रिय भागीदार बनें। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को देखते हुए तकनीकी नवाचार और सामाजिक सरोकार का यह समन्वय आने वाले वर्षों में और अधिक प्रासंगिक होता जाएगा।