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केजीएमयू लखनऊ के सभी छात्रावास मेस में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध, 14 जुलाई से लागू

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केजीएमयू लखनऊ के सभी छात्रावास मेस में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध, 14 जुलाई से लागू

सारांश

लखनऊ के केजीएमयू ने 14 जुलाई को अपने सभी छात्रावास मेस और कैंटीन में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगा दिया — राज्यपाल की टिप्पणी के बाद उठाया गया यह कदम अब विवाद का केंद्र बन गया है। इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन ने इसे 'निंदनीय' बताते हुए फैसला वापस लेने की माँग की है।

मुख्य बातें

केजीएमयू, लखनऊ के सभी 22 छात्रावास मेस और कैंटीन में 14 जुलाई 2025 से मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लागू।
केके सावलानी ने कुलपति के मौखिक निर्देशों के आधार पर आदेश जारी किया।
विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल द्वारा उठाई गई स्वच्छता संबंधी चिंताओं के बाद यह निर्णय लिया गया।
छात्रों की प्रोटीन आवश्यकता के लिए शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों के उपयोग के निर्देश दिए गए।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इसे 'निंदनीय' बताते हुए फैसला वापस लेने की माँग की।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के सभी छात्रावासों की मेस और कैंटीन में 14 जुलाई 2025 से मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीफ प्रोवोस्ट प्रो. केके सावलानी द्वारा जारी इस आदेश में सभी प्रोवोस्ट को तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

आदेश की पृष्ठभूमि

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय कुलपति के मौखिक निर्देशों के आधार पर लिया गया है। केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने छात्रावास मेस में मांसाहारी भोजन और उससे जुड़ी स्वच्छता संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 1905 में स्थापित केजीएमयू देश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है और उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र माना जाता है।

आदेश में क्या कहा गया

जारी आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय के सभी 22 मेस और कैंटीन में न तो मांसाहारी भोजन पकाया जाएगा और न ही परोसा जाएगा। साथ ही, छात्र-छात्राओं की प्रोटीन आवश्यकता पूरी करने के लिए शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों के समुचित उपयोग के निर्देश भी दिए गए हैं।

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रेम राज सिंह ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 22 मेस में पहले से ही मांसाहारी भोजन नहीं बनता था। उन्होंने कहा, 'कुछ छात्रों की अपनी को-ऑपरेटिव मेस है, जिसे वे खुद चलाते हैं। उसमें वे बाहर से खाना बनवाने की व्यवस्था करते हैं और अपना मांसाहारी भोजन तैयार करवाते हैं, लेकिन उन बच्चों से कहा गया है कि कॉलेज में कोई मांसाहारी खाना नहीं होगा।'

विरोध और आलोचना

इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'प्यू रिसर्च सेंटर और अन्य विभिन्न शोधों के अनुसार भारत में 61 प्रतिशत से अधिक लोग नॉनवेज का सेवन करते हैं। जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग नॉनवेज खाते हैं, वहां इस तरह का फैसला उचित नहीं है।'

उन्होंने चिकित्सकीय दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि संतुलित मांसाहारी भोजन रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। मौलाना फिरंगी महली ने केजीएमयू प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की अपील की।

आगे क्या होगा

आदेश 14 जुलाई से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह देखना होगा कि छात्र संगठन और अन्य पक्ष इस निर्णय पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश वापस लेने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ भविष्य के चिकित्सक पोषण विज्ञान पढ़ते हैं, वहाँ आहार पर प्रतिबंध का कोई वैज्ञानिक आधार सार्वजनिक नहीं किया गया — यह चूक खुद में बड़ी है। प्रश्न यह नहीं कि शाकाहार उचित है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या किसी विश्वविद्यालय को छात्रों की व्यक्तिगत आहार स्वतंत्रता पर इस तरह एकतरफा अंकुश लगाने का अधिकार है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय कुलपति के मौखिक निर्देशों पर लिया गया है। विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने मांसाहारी भोजन और उससे जुड़ी स्वच्छता संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया था, जिसके बाद यह आदेश जारी हुआ।
केजीएमयू का मांसाहार प्रतिबंध आदेश कब से लागू हुआ?
यह आदेश 14 जुलाई 2025 को जारी किया गया और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। चीफ प्रोवोस्ट ने सभी प्रोवोस्ट को इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
क्या केजीएमयू की सभी मेस में पहले से मांसाहारी भोजन बनता था?
केजीएमयू प्रवक्ता प्रेम राज सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 22 मेस में पहले से ही मांसाहारी भोजन नहीं बनाया जाता था। कुछ छात्रों की स्व-संचालित को-ऑपरेटिव मेस में बाहर से मांसाहारी भोजन मँगवाया जाता था, जिस पर अब प्रतिबंध लगाया गया है।
केजीएमयू के मांसाहार प्रतिबंध का विरोध किसने किया?
इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस फैसले को 'निंदनीय' बताया। उन्होंने प्यू रिसर्च सेंटर के हवाले से कहा कि भारत में 61 प्रतिशत से अधिक लोग मांसाहारी हैं और चिकित्सकीय दृष्टि से भी यह प्रतिबंध उचित नहीं है।
केजीएमयू में मांसाहार प्रतिबंध के बाद छात्रों की प्रोटीन जरूरत कैसे पूरी होगी?
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छात्र-छात्राओं की प्रोटीन आवश्यकता पूरी करने के लिए शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों के समुचित उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। हालाँकि, इसका विस्तृत पोषण ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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