चंद्रिमा भट्टाचार्य ने TMC से इस्तीफा दिया, ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में हुईं शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की पूर्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने 5 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सभी पदों से औपचारिक इस्तीफा दे दिया और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गईं। यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका है, जब पार्टी पहले से ही आंतरिक विद्रोह से जूझ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद सीधे पश्चिम बंगाल विधानसभा का रुख किया, जहाँ उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी और 'बागी लेकिन बहुमत वाले' गुट के अन्य विधायकों के साथ बैठक में भाग लिया। हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पराजित हो चुकीं भट्टाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'अंततः सभी को समय की आवश्यकता के अनुसार यात्रा करनी पड़ती है।'
विस्फोटक आरोप: बजट से भी रखा अनजान
भट्टाचार्य ने मीडिया के सामने एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में प्रत्येक वर्ष राज्य बजट पेश करने के बावजूद, बजट तैयार करने की प्रक्रिया में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई। उनके शब्दों में, 'बजट पेश करने से एक दिन पहले तक मुझे भी यह नहीं पता था कि बजट भाषण में क्या होगा। विधानसभा में पेश करने से कुछ घंटे पहले ही मुझे बजट की जानकारी दी गई।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के प्रति वफादारी के कारण उन्होंने यह तथ्य पहले सार्वजनिक नहीं किया। किंतु जब ममता बनर्जी ने उन्हें शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जे के लिए जिम्मेदार ठहराया, तो उनके पास इस्तीफे के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य मंत्री रहने के दौरान ली गई गोपनीयता की शपथ के कारण वह और अधिक खुलासा करने से जानबूझकर परहेज कर रही हैं।
TMC की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 'अगर कोई गद्दारों से हाथ मिलाने का फैसला करता है, तो उस फैसले पर कुछ कहने की जरूरत नहीं रह जाती।' घोष ने यह भी सवाल उठाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट में भट्टाचार्य को सबसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो आवंटित किए गए थे — तो पार्टी की हार के बाद ही उन्हें यह असंतोष क्यों याद आया?
आम जनता और राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब TMC पहले से ही विधानसभा चुनाव में हार के बाद आंतरिक संकट से गुजर रही है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में एक वरिष्ठ पूर्व मंत्री के शामिल होने से पार्टी में दरार और गहरी हो गई है। गौरतलब है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य TMC की उन चुनिंदा नेताओं में से थीं जो लंबे समय से पार्टी के वित्तीय चेहरे के रूप में जानी जाती थीं।
क्या होगा आगे
बागी गुट की ताकत और दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में और कितने वरिष्ठ नेता उनके साथ जुड़ते हैं। भट्टाचार्य की यह टिप्पणी कि वह 'और भी खुलासे' कर सकती थीं, पार्टी के भीतर और तनाव का संकेत देती है। TMC नेतृत्व के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बागी गुट को राजनीतिक रूप से कमज़ोर करने से पहले आंतरिक विश्वसनीयता को पुनः स्थापित किया जाए।