5 जुलाई 2026
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चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर दिलीप घोष का हमला: 'टीएमसी के पागलपन ने बर्बाद की बंगाल की अर्थव्यवस्था'

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चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर दिलीप घोष का हमला: 'टीएमसी के पागलपन ने बर्बाद की बंगाल की अर्थव्यवस्था'

सारांश

TMC की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्टी से बगावत के बाद पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने हमला बोला — बजट बनाने में 'अनजान' रहने का दावा करने वाली पूर्व वित्त मंत्री पर सवाल उठाए और कहा कि राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था TMC के कुशासन की देन है।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 5 जुलाई 2026 को चंद्रिमा भट्टाचार्य के TMC से इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल की खराब आर्थिक स्थिति TMC के कुशासन का परिणाम है।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया था कि वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहते हुए भी बजट निर्माण में उनसे सलाह नहीं ली गई।
पश्चिम बंगाल में कम से कम 2,000 ग्राम पंचायत प्रधान निष्क्रिय, फरार या अनुपस्थित बताए गए।
घोष ने TMC शासनकाल के कथित भ्रष्टाचार की जांच जारी रहने की बात कही और दोषियों को न बख्शने की चेतावनी दी।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 5 जुलाई 2026 को चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति TMC के 'पागलपन' और कुशासन का सीधा परिणाम है। घोष ने यह भी सवाल उठाया कि भट्टाचार्य ने वित्त राज्य मंत्री रहते हुए इन विसंगतियों पर चुप्पी क्यों साधे रखी।

बजट विवाद: घोष ने उठाए तीखे सवाल

मंत्री दिलीप घोष ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के उस बयान पर कड़ा एतराज जताया जिसमें उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री पद पर रहते हुए भी बजट निर्माण में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई। घोष ने कहा, 'चंद्रिमा भट्टाचार्य इतने वर्षों तक वित्त मंत्री रहीं, फिर भी अब दावा कर रही हैं कि उन्हें बजट बनाने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। तो फिर वह उस पद पर क्यों बैठी थीं? क्या बजट उनसे बिना सलाह-मशविरा किए तैयार किया जा रहा था?'

घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस कथित बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने ट्रेडमिल पर बजट तैयार किया। घोष ने इसे 'बिल्कुल पागलपन' करार देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा खराब आर्थिक स्थिति इसी तरह की शासन-व्यवस्था का नतीजा है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य की बगावत की पृष्ठभूमि

चंद्रिमा भट्टाचार्य को ममता बनर्जी की बेहद करीबी और 'राइट हैंड' माना जाता था। वह ममता सरकार में वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर रह चुकी हैं और पश्चिम बंगाल विधानसभा में हर वर्ष राज्य बजट पेश करती थीं। बीते दिन उन्होंने TMC के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट का दामन थाम लिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि बजट तैयार करने में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई और न ही उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

घोष ने इस पर तंज कसते हुए कहा, 'जब पार्टी खत्म हो गई, तब वह भागकर आ रही हैं और अच्छी बातें कर रही हैं। जब पिछली सरकार में सब उल्टा हो रहा था, तब वहां क्यों रुकीं और आवाज क्यों नहीं उठाई? आपको लोगों ने चुनकर भेजा था।'

ग्राम पंचायत प्रधानों पर चेतावनी

दिलीप घोष ने ग्राम पंचायत प्रधानों के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में कम से कम 2,000 ग्राम पंचायत प्रधान या तो कार्यालय नहीं आ रहे हैं, फरार हो गए हैं, या निष्क्रिय पड़े हैं। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कामकाज में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

घोष ने इन प्रधानों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, 'आप जनप्रतिनिधि हैं, सरकार आपको वेतन देती है। लोगों को प्रमाण-पत्र नहीं मिल रहे, उनके काम अटके हैं। यदि आप आगे नहीं आए, तो आपको स्वयं बड़ी समस्या झेलनी पड़ सकती है।'

भ्रष्टाचार जांच और आगे की राह

मंत्री घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि TMC के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच जारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जिनके पास भी सबूत हैं, वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC के भीतर से असंतोष की आवाजें तेज हो रही हैं और पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की आशंका जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

TMC की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है — और दिलीप घोष का यह पूछना स्वाभाविक है कि तब चुप्पी क्यों रही। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्ता में आने के बाद विपक्ष की ओर से उठाई गई आवाजें अक्सर राजनीतिक अवसरवाद की छाया में आ जाती हैं। पश्चिम बंगाल में 2,000 से अधिक पंचायत प्रधानों का निष्क्रिय होना शासन-तंत्र की गहरी विफलता को दर्शाता है, जिसे महज बयानबाजी से नहीं सुधारा जा सकता। असली परीक्षा यह होगी कि क्या नई सरकार इन संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए ठोस जवाबदेही तंत्र बनाती है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने TMC से इस्तीफा क्यों दिया?
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने TMC के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट को ज्वाइन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहते हुए भी बजट तैयार करने की प्रक्रिया में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई और न ही उन्हें शामिल किया गया।
दिलीप घोष ने चंद्रिमा भट्टाचार्य पर क्या सवाल उठाए?
दिलीप घोष ने पूछा कि यदि बजट निर्माण में भट्टाचार्य को शामिल नहीं किया जाता था, तो उन्होंने उस समय आवाज क्यों नहीं उठाई। उनका कहना था कि पार्टी टूटने के बाद बोलना राजनीतिक अवसरवाद की निशानी है।
पश्चिम बंगाल में ग्राम पंचायत प्रधानों की क्या स्थिति है?
दिलीप घोष के अनुसार पश्चिम बंगाल में कम से कम 2,000 ग्राम पंचायत प्रधान या तो कार्यालय नहीं आ रहे, फरार हो गए हैं, या निष्क्रिय हैं। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कामकाज में गंभीर बाधाएं आ रही हैं।
TMC के शासनकाल के भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई होगी?
मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि TMC शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच जारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सबूत होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
ममता बनर्जी के 'ट्रेडमिल पर बजट' वाले बयान पर घोष की क्या प्रतिक्रिया थी?
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के उस कथित बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने ट्रेडमिल पर बजट तैयार किया। घोष ने इसे 'बिल्कुल पागलपन' बताया और कहा कि इसी तरह की शासन-व्यवस्था के कारण पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति खराब हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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