21 सितंबर 2026
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एआईएसएफ ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती, 'लिफाफा' चिन्ह ऋतब्रत गुट को देने पर आपत्ति

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एआईएसएफ ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती, 'लिफाफा' चिन्ह ऋतब्रत गुट को देने पर आपत्ति

सारांश

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले एआईएसएफ ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उसका परिचित 'लिफाफा' चिन्ह छीनकर ऋतब्रत बनर्जी के नवगठित धड़े को दे दिया — जो 6 अक्टूबर के मतदान से पहले राजनीतिक पहचान की लड़ाई बन गई है।

मुख्य बातें

एआईएसएफ ने 21 सितंबर 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के गुट — डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस — को 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया; एआईएसएफ को 'अलमारी' दिया गया।
विधायक नवसाद सिद्दीकी 2021 और 2026 दोनों बार भांगर से 'लिफाफा' चिन्ह पर जीते हैं।
याचिका न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ के समक्ष दायर की गई है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में 6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।

ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा में एआईएसएफ के एकमात्र विधायक नवसाद सिद्दीकी ने इस निर्णय को अपनी पार्टी के दीर्घकालिक चुनावी पहचान पर सीधा हमला बताते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।

मुख्य घटनाक्रम

बीते सप्ताह चुनाव आयोग (ईसीआई) ने ऋतब्रत बनर्जी के धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह प्रदान किया था। इसके साथ ही एआईएसएफ को उसके पुराने चिन्ह की जगह नया चुनाव चिन्ह 'अलमारी' आवंटित किया गया।

सिद्दीकी ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ के समक्ष याचिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि एआईएसएफ 2021 में अपनी स्थापना के समय से ही 'लिफाफा' चिन्ह पर चुनाव लड़ती आई है। उन्होंने कहा, "मैं 2021 और 2026 में इसी चिन्ह पर जीतकर विधानसभा पहुंचा। ऐसे में कुछ दिन पहले बनी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को यही चुनाव चिन्ह कैसे दिया जा सकता है?"

सिद्दीकी की दलील

विधायक नवसाद सिद्दीकी ने दक्षिण 24 परगना जिले की भांगर विधानसभा सीट से लगातार दो बार — 2021 और 2026 में — 'लिफाफा' चिन्ह पर चुनाव जीता है। उनका तर्क है कि मतदाताओं ने उनकी पार्टी को इसी चिन्ह से पहचाना और जनादेश दिया, इसलिए किसी नवगठित दल को वही चिन्ह देना एआईएसएफ की राजनीतिक पहचान को नुकसान पहुँचाता है।

गौरतलब है कि चुनाव चिन्ह की पहचान भारतीय चुनावी राजनीति में, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध शहरी मतदाताओं के लिए, दल की पहचान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। किसी स्थापित दल से उसका परिचित चिन्ह छीनना उसकी चुनावी क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

एजेयूपी का मामला

चुनाव आयोग ने उसी सप्ताह पश्चिम बंगाल की एक अन्य पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) का चुनाव चिन्ह भी बदला था। पार्टी अध्यक्ष हुमायूं कबीर को पहले मिला 'सीटी' चिन्ह बदलकर 'टेबल' आवंटित किया गया, हालाँकि कबीर ने इस बदलाव पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

यह उल्लेखनीय है कि दोनों पार्टियों — एजेयूपी और एआईएसएफ — के चिन्ह एक ही समय बदले गए, किंतु केवल एआईएसएफ ने विरोध का रास्ता चुना। इससे स्पष्ट है कि मामला केवल चिन्ह बदलाव का नहीं, बल्कि 'लिफाफा' चिन्ह के किसी अन्य दल को हस्तांतरण का है।

आगामी उपचुनाव और दाँव

एआईएसएफ आगामी महीने पूर्व मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उतरने की तैयारी में है। इसी तरह एजेयूपी रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव लड़ रही है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना की जाएगी।

उपचुनाव से ठीक पहले यह कानूनी विवाद एआईएसएफ की चुनावी तैयारी को प्रभावित कर सकता है। यदि हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली, तो पार्टी को 'अलमारी' जैसे नए और अपरिचित चिन्ह पर चुनाव में उतरना होगा — जो उसके लिए मतदाता जुड़ाव के लिहाज़ से बड़ी चुनौती होगी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय में अब यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और उसका फैसला नंदीग्राम उपचुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब कोई पार्टी उसी चिन्ह पर दो बार जनादेश हासिल कर चुकी हो। चुनाव आयोग ने एक नवगठित धड़े को वह चिन्ह देकर एआईएसएफ की स्थापित मतदाता पहचान को व्यावहारिक रूप से स्थानांतरित कर दिया है। सवाल यह भी है कि क्या 6 अक्टूबर के उपचुनाव से महज कुछ हफ्ते पहले इस तरह के चिन्ह बदलाव की समय सीमा उचित थी। यदि हाईकोर्ट त्वरित सुनवाई नहीं करता, तो छोटे दलों के लिए चुनावी न्याय की पहुँच पर गंभीर सवाल उठेंगे।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएसएफ ने कलकत्ता हाईकोर्ट में किस बात पर याचिका दायर की है?
एआईएसएफ ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस गुट को पार्टी का परिचित 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया और एआईएसएफ को 'अलमारी' दिया गया। पार्टी का कहना है कि वह 2021 से इसी चिन्ह पर चुनाव लड़ती आई है।
नवसाद सिद्दीकी कौन हैं और उनका 'लिफाफा' चिन्ह से क्या संबंध है?
नवसाद सिद्दीकी पश्चिम बंगाल विधानसभा में एआईएसएफ के एकमात्र विधायक हैं। वे दक्षिण 24 परगना जिले की भांगर विधानसभा सीट से 2021 और 2026 में 'लिफाफा' चिन्ह पर लगातार दो बार जीते हैं।
चुनाव आयोग ने यह फैसला क्यों लिया?
चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चिन्ह देते हुए एआईएसएफ को 'अलमारी' आवंटित किया। आयोग ने अपने फैसले का विस्तृत सार्वजनिक कारण नहीं बताया; मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है।
नंदीग्राम उपचुनाव कब होगा और इस विवाद का उस पर क्या असर पड़ेगा?
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में 6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। यदि हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली, तो एआईएसएफ को नए और अपरिचित 'अलमारी' चिन्ह पर चुनाव लड़ना होगा, जो मतदाता पहचान के लिहाज़ से पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।
आम जनता उन्नयन पार्टी का चुनाव चिन्ह भी बदला गया — क्या उसने भी विरोध किया?
जी नहीं। चुनाव आयोग ने हुमायूं कबीर की पार्टी एजेयूपी का चिन्ह 'सीटी' से बदलकर 'टेबल' किया, लेकिन कबीर ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। एआईएसएफ का विरोध इसलिए तीखा है क्योंकि उसका पुराना चिन्ह किसी अन्य दल को दिया गया, न कि केवल बदला गया।
राष्ट्र प्रेस
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