कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से माँगी रिपोर्ट, ऋतब्रत बनर्जी गुट को 'लिफाफा' चिन्ह आवंटन पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से उस निर्णय पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था। यह याचिका ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) ने दायर की है, जिसके पश्चिम बंगाल विधानसभा में एकमात्र प्रतिनिधि नौशाद सिद्दीकी हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के गुट को न केवल 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया, बल्कि उसे 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम भी दिया। इसके विपरीत, AISF को 'अलमारी' चुनाव चिन्ह सौंपा गया। यह फैसला तब विवादास्पद बन गया जब सिद्दीकी ने आपत्ति जताई।
गौरतलब है कि नौशाद सिद्दीकी ने दक्षिण 24 परगना जिले की भांगर विधानसभा सीट से 2021 और 2026 — दोनों विधानसभा चुनावों में 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह के तहत चुनाव लड़ा था और दोनों बार जीत दर्ज की थी। ऐसे में यह चुनाव चिन्ह उनकी राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
अदालत में सुनवाई
इस सप्ताह की शुरुआत में AISF ने चुनाव आयोग के इस फैसले को जस्टिस कृष्णा राव की पीठ के समक्ष चुनौती दी। बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने चुनाव आयोग से रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अन्य प्रभावित पार्टियाँ
AISF अकेली पार्टी नहीं है जिसे चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया। हुमायूं कबीर द्वारा स्थापित आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का पुराना 'सीटी' चिन्ह बदलकर 'टेबल' कर दिया गया। कबीर ने इसी वर्ष मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 'सीटी' चिन्ह के साथ चुनाव जीता था। हालाँकि, उन्होंने नए चुनाव चिन्ह पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
आगामी उपचुनावों पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव सामने हैं। AJUP, रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ रही है, जबकि AISF पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में है। दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और परिणाम 9 अक्टूबर 2026 को घोषित किए जाएँगे।
चुनाव चिन्ह विवाद उपचुनाव की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है — अदालत का आदेश यह तय करेगा कि AISF किस चिन्ह के साथ नंदीग्राम की जनता के सामने जाएगी।