आईएनएस सह्याद्रि और कुलिश फिलीपींस की सुबिक खाड़ी पहुँचे, ADMM-Plus जेसीए में लेंगे भाग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश फिलीपींस की सुबिक खाड़ी पहुँच गए हैं। 21 सितंबर 2026 को हुई इस तैनाती के तहत दोनों जहाज आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM)-प्लस, संयुक्त सहयोग गतिविधि (JCA) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैनाती का हिस्सा है, जो भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'महासागर' विजन के अनुरूप है।
ADMM-Plus जेसीए क्या है और भारत की क्या भूमिका है
ADMM-Plus जेसीए एक बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास मंच है जिसमें 10 आसियान देशों और 8 साझेदार देशों की नौसेनाएँ एकत्रित होती हैं। इस मंच का उद्देश्य पेशेवर एवं परिचालनिक गतिविधियों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना, समझ को गहरा करना और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना है।
भारतीय नौसेना की इस अभ्यास में भागीदारी कोई नई पहल नहीं है — यह क्षेत्रीय समुद्री साझेदारों के साथ भारत की लगातार और संस्थागत जुड़ाव की नीति का विस्तार है। गौरतलब है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के मद्देनजर भारत का इस मंच पर सक्रिय होना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-फिलीपींस संबंधों में बढ़ता समुद्री सहयोग
यह पोर्ट कॉल भारत और फिलीपींस के बीच तेज़ी से गहरे होते समुद्री संबंधों का प्रतीक है। अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक स्थापना के बाद यह पहली बड़ी नौसैनिक तैनाती है। द्विपक्षीय जुड़ाव के इस नए चरण में नौसैनिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साझा हितों की रक्षा को केंद्रीय स्थान दिया गया है।
दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए भारत की यह उपस्थिति द्विपक्षीय संबंधों में एक सांकेतिक और व्यावहारिक दोनों ही मायनों में अहम मानी जा रही है।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर विजन से जुड़ाव
भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी नीति के अंतर्गत भारतीय नौसेना की प्रशांत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऑपरेशनल उपस्थिति लगातार बढ़ाई जा रही है।
'महासागर' विजन (Maritime Action for Global, Ocean and Resilience) भी इसी रणनीतिक ढाँचे का हिस्सा है, जो बहुपक्षीय समुद्री सहयोग को भारत की विदेश नीति के केंद्र में रखता है। आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की यह तैनाती उसी प्रतिबद्धता की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
तैनाती का महत्त्व और आगे की संभावनाएँ
इस तैनाती के दौरान भारतीय नौसेना के दोनों युद्धपोत भाग लेने वाली अन्य नौसेनाओं के साथ पेशेवर आदान-प्रदान और परिचालनिक अभ्यासों में शामिल होंगे। इससे साझा समुद्री चुनौतियों — जैसे समुद्री डकैती, मानवतावादी सहायता, आपदा राहत और तटीय सुरक्षा — पर सामूहिक क्षमता निर्माण को बल मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बहुपक्षीय नौसैनिक जुड़ाव भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक जिम्मेदार और सक्रिय सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।