शेख हसीना ने फिर दोहराया: 'बांग्लादेश लौटने की पूरी तैयारी', पासपोर्ट सील होने के बावजूद अडिग
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 30 सितंबर 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह स्वदेश वापसी का पक्का इरादा रखती हैं। ब्रिटेन स्थित थिंक टैंक 'ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस' द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए उन्होंने कहा, 'मैं बांग्लादेश वापस जाने की योजना बना रही हूं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब 79 वर्षीय पूर्व पीएम पर बांग्लादेश में कई गंभीर कानूनी मामले लंबित हैं और उन्हें एक मामले में मृत्युदंड की सज़ा भी सुनाई जा चुकी है।
वार्ता में क्या बोलीं हसीना
प्रेस वार्ता में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपने पहले के दावे — दिसंबर 2026 में वापसी — पर सौ फीसदी कायम हैं, तो उन्होंने दो-टूक जवाब दिया। हसीना ने कहा, 'जी बिल्कुल, मैं पक्का इरादा रखती हूं। सभी जानते हैं कि मेरा पासपोर्ट वगैरह सब सील हो गया है। मैं योजना बना रही हूं। सही वक्त आने पर मैं खुलासा करूंगी कि कैसे और कब मैं वहां जाने वाली हूं।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संभावित कानूनी परिणामों से भयभीत नहीं हैं और यह निर्णय उनके देश और वहां के नागरिकों के प्रति उनकी जवाबदेही से प्रेरित है।
पहले भी कर चुकी हैं वापसी का ऐलान
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब निर्वासित जीवन जी रही हसीना ने स्वदेश लौटने की इच्छा ज़ाहिर की हो। 5 अगस्त को दक्षिण एशिया के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (FCC) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो लिंक के ज़रिए जुड़ते हुए उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। उस आयोजन में उनके पुत्र साजीब वाजेद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल और अन्य अवामी लीग नेता भी मौजूद थे।
उस अवसर पर हसीना ने कहा था, 'मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है, मुझे जेल भेजा जा सकता है। लेकिन डर जनता के प्रति मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता। जब मेरे प्यारे देशवासी कष्ट झेल रहे हों, तो मैं चुप नहीं रह सकती।'
कानूनी पेचीदगियाँ और मृत्युदंड की सज़ा
बांग्लादेश में हसीना के खिलाफ कई मामले विचाराधीन हैं। एक मामले में उन्हें मृत्युदंड की सज़ा सुनाई जा चुकी है, जिसे उन्होंने 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताते हुए अस्वीकार किया है। इससे पहले एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने दिसंबर में अपने वरिष्ठ पार्टी सहयोगियों के साथ बांग्लादेश लौटकर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने की योजना का उल्लेख किया था।
उन्होंने यह भी माँग की है कि उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए। वहीं उनके पुत्र साजीब वाजेद जॉय ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने अब तक परिवार से कोई संपर्क नहीं किया है।
पृष्ठभूमि: सत्ता से नाटकीय पतन
2024 में सरकार-विरोधी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोपों के बाद हसीना को नाटकीय परिस्थितियों में सत्ता से हटना पड़ा था। यह बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था, जिसने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर गहरा असर डाला। तब से वे निर्वासन में हैं और उनकी वापसी की हर घोषणा ने दोनों देशों में राजनीतिक हलचल मचाई है।
हसीना की अगली चाल पर अब बांग्लादेश, भारत और पश्चिमी राजनयिक हलकों की नज़र बनी हुई है।