4 अगस्त 2026
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शेख हसीना की स्वदेश वापसी की इच्छा पर पूर्व राजनयिक वीना सीकरी बोलीं — 'इसमें कुछ गलत नहीं'

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शेख हसीना की स्वदेश वापसी की इच्छा पर पूर्व राजनयिक वीना सीकरी बोलीं — 'इसमें कुछ गलत नहीं'

सारांश

दो साल के निर्वासन के बाद शेख हसीना की दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा पर पूर्व राजनयिक वीना सीकरी ने कहा — यह स्वाभाविक है। बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई, पर न्यायिक प्रक्रिया मानकों पर खरी नहीं उतरी। सीकरी के अनुसार भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

मुख्य बातें

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त 2026 को एक कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगी।
हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है — वह 5 अगस्त 2024 से भारत में हैं।
बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई, जिसमें उन्हें या उनके वकील को पक्ष रखने का मौका नहीं मिला।
पूर्व राजनयिक वीना सीकरी के अनुसार हसीना की वापसी कोई राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि उनका कानूनी अधिकार है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर हाल ही में ढाका में अवामी लीग नेताओं से मिले — सीकरी ने इसे हसीना मसले के समानांतर रखा।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश से संबंध सामान्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त 2026 को एक कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करने वाली हैं। उन्होंने हाल ही में दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा भी जताई है। नई दिल्ली में बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त और वरिष्ठ राजनयिक वीना सीकरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से अपनी राय रखी और कहा कि दो साल के निर्वासन के बाद अपने देश लौटने की इच्छा जताना स्वाभाविक है और इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं है।

दो साल भारत में रहीं हसीना

वीना सीकरी ने कहा, 'ठीक दो साल पहले 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आई थीं और तब से वह यहीं हैं। वह भारत सरकार की सरपरस्ती में यहाँ रह रही हैं। काफी समय तक वो शांत रहीं, लेकिन वह अपने लोगों से मिलने और बात करने के लिए स्वतंत्र हैं। निष्कासन के दो साल बाद उन्होंने स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है — इसमें कुछ भी गलत नहीं।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 5 अगस्त के वर्चुअल संबोधन में हसीना इसी विषय पर जोर दे सकती हैं।

2024 के छात्र आंदोलन पर सीकरी का आकलन

सीकरी ने 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन को लेकर कहा कि उनके अनुसार यह महज छात्रों के स्वतःस्फूर्त गुस्से का परिणाम नहीं था, बल्कि यह सत्ता परिवर्तन की एक सुनियोजित राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा था। उन्होंने तर्क दिया कि बांग्लादेश की जनता आज भी संतुष्ट नहीं है — आर्थिक संघर्ष जारी है, बेरोजगारी बढ़ी है और विदेशी निवेश लगभग ठप है। उनके अनुसार, जो वादे किए गए थे, उनमें से कोई भी पूरा होता नहीं दिख रहा।

न्यायिक प्रक्रिया और भारत-बांग्लादेश संबंध

क्या भारत की धरती से हसीना का वर्चुअल संबोधन द्विपक्षीय रिश्तों को प्रभावित कर सकता है? इस पर सीकरी ने स्पष्ट कहा कि यह कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुना दी, जहाँ न उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिला और न उनके वकील को। सीकरी के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया मानकों के अनुरूप नहीं दिखी। ऐसे में हसीना वापस जाकर आत्मसमर्पण करना और अपील दायर करना चाहती हैं, जो उनका कानूनी अधिकार है।

सीकरी ने जोर देकर कहा कि हसीना भारत में बंदी नहीं हैं — वह एक सम्मानित अतिथि हैं, पूर्णतः स्वतंत्र हैं और उन्हें अपनी बात रखने की पूरी छूट है। इसलिए उनकी वापसी को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं होगा।

अमेरिकी राजदूत के ढाका दौरे का संदर्भ

सीकरी ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर — जो दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के क्षेत्रीय राजदूत भी हैं — ढाका जाकर अवामी लीग के नेताओं और जातीय दल के प्रतिनिधियों से मिले, लेकिन जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों से नहीं। उस दौरे को राजनीतिक कृत्य नहीं माना गया। सीकरी ने सवाल उठाया कि जब एक विदेशी राजदूत का ढाका दौरा राजनीतिक नहीं है, तो हसीना की स्वदेश वापसी की इच्छा को राजनीतिक मसला क्यों माना जाए।

भारत का रुख और आगे की राह

सीकरी ने यह भी उल्लेख किया कि बांग्लादेश पहले भारत के उच्चायुक्त की नियुक्ति को लेकर भी असहज था, क्योंकि वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं। बावजूद इसके, भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य और सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले हफ्तों में हसीना के वर्चुअल संबोधन और उनकी संभावित वापसी की घोषणा से इस पूरे घटनाक्रम की दिशा और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बांग्लादेश की न्यायिक विश्वसनीयता की परीक्षा है। गैरमौजूदगी में मौत की सजा और बचाव पक्ष को अवसर न देना — ये गंभीर प्रक्रियागत सवाल उठाते हैं जिन्हें मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज करती है। भारत के लिए असली चुनौती यह है कि वह हसीना को शरण देने और ढाका के साथ रिश्ते सामान्य करने के बीच संतुलन कैसे बनाए। सीकरी का विश्लेषण संकेत देता है कि नई दिल्ली इसे राजनीतिक नहीं, मानवीय और कानूनी मसले के रूप में फ्रेम करना चाहती है — लेकिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस फ्रेमिंग को स्वीकार करेगी या नहीं, यही असली सवाल है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख हसीना भारत में कब से हैं और वापस क्यों जाना चाहती हैं?
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश से निकलकर भारत आई थीं और तब से यहीं हैं। दो साल के निर्वासन के बाद उन्होंने दिसंबर 2026 तक स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है, ताकि वह अदालत में आत्मसमर्पण कर अपनी सजा के खिलाफ अपील कर सकें।
बांग्लादेश की अदालत ने शेख हसीना को क्या सजा सुनाई है?
बांग्लादेश की एक अदालत ने शेख हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई है। पूर्व राजनयिक वीना सीकरी के अनुसार, इस प्रक्रिया में न हसीना को और न उनके वकील को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, जो न्यायिक मानकों के अनुरूप नहीं है।
क्या हसीना का वर्चुअल संबोधन भारत-बांग्लादेश रिश्तों को नुकसान पहुँचाएगा?
वीना सीकरी के अनुसार नहीं। उनका कहना है कि यह कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है और भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हसीना भारत में स्वतंत्र अतिथि हैं, बंदी नहीं।
वीना सीकरी ने 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन के बारे में क्या कहा?
सीकरी के अनुसार 2024 का आंदोलन केवल छात्रों के स्वतःस्फूर्त गुस्से का परिणाम नहीं था, बल्कि यह सत्ता परिवर्तन की एक सुनियोजित राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि आज भी बांग्लादेश में आर्थिक संघर्ष, बेरोजगारी और विदेशी निवेश की कमी बनी हुई है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के ढाका दौरे का इस मामले से क्या संबंध है?
वीना सीकरी ने बताया कि सर्जियो गोर हाल ही में ढाका जाकर अवामी लीग नेताओं और जातीय दल के प्रतिनिधियों से मिले, और उस दौरे को राजनीतिक नहीं माना गया। सीकरी का तर्क है कि जब एक विदेशी राजदूत का ऐसा दौरा राजनीतिक नहीं है, तो हसीना की वापसी की इच्छा को राजनीतिक मसला क्यों कहा जाए।
राष्ट्र प्रेस
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