शेख हसीना का देश छोड़ने के बाद पहला लाइव संबोधन: '2024 का छात्र आंदोलन सुनियोजित साजिश थी'
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से आयोजित एक वर्चुअल संबोधन में 2024 के छात्र आंदोलन को 'सुनियोजित राजनीतिक साजिश' करार दिया। देश छोड़ने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक लाइव संबोधन था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई और अपनी सरकार के कार्यकाल का बचाव किया।
हसीना का केंद्रीय दावा: आंदोलन की आड़ में सत्ता-परिवर्तन की कोशिश
हसीना ने अपने संबोधन में कहा, 'जुलाई और अगस्त 2024 में जो हुआ, वह मेरे अनुसार कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था।' उनके अनुसार, उनकी सरकार ने शुरू से ही इस मुद्दे को बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के ज़रिए सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ संगठित समूह छात्रों की माँगों को 'हिंसक राजनीतिक हथियार' में बदलने का काम कर रहे थे।
उन्होंने मुहम्मद यूनुस के एक कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि यूनुस ने स्वयं स्वीकार किया था कि यह 'बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया आंदोलन था, जिसका नेतृत्व एक मास्टरमाइंड कर रहा था।' हसीना ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि यह कोई अचानक उभरा छात्र प्रदर्शन नहीं था।
मुख्य आरोप: हिंसा, लूट और परदे के पीछे का संचालन
हसीना के अनुसार, 15 जुलाई 2024 से आंदोलन का स्वरूप बदलने लगा — हत्याएँ, आगजनी, हमले और लूटपाट शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का कोई स्पष्ट या जवाबदेह नेतृत्व सामने नहीं था और निर्देश 'पर्दे के पीछे से' दिए जा रहे थे। उनका आरोप है कि इसका इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया के बाहर सत्ता तक पहुँचने के लिए किया गया।
उत्पीड़न के दावे: आँकड़े और आरोप
हसीना ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक उत्पीड़न हुआ है। उनके अनुसार इस दौरान कम से कम 10,000 लोग मारे गए या लापता हो गए, 6.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया और 3,500 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि अवामी लीग के करीब 4.5 लाख नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आरोपी के रूप में नामजद किया गया, जबकि 10 लाख से अधिक अन्य लोगों को अज्ञात आरोपी के तौर पर सूचीबद्ध किया गया। हसीना ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ 600 से अधिक मामले दर्ज हैं।
गौरतलब है कि ये आँकड़े हसीना के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों पर असर का दावा
हसीना ने कहा कि अत्याचार केवल अवामी लीग के सदस्यों तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय, न्यायाधीश, वकील, बुद्धिजीवी, पत्रकार, मज़दूर, रिक्शा चालक, किसान और आम नागरिक भी हमलों, गिरफ्तारियों या हत्या के मामलों में आरोपित किए जाने का शिकार हुए हैं। महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और हिरासत में यातना की भी शिकायतें उन्होंने दर्ज कराईं।
बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर हसीना का दर्द
अपने संबोधन में हसीना ने भावुक होते हुए कहा, 'मुझे अपने देश से दूर कर दिया गया, लेकिन मैं कभी अपने लोगों से अलग नहीं हुई।' उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वे बांग्लादेश को कठिन परिस्थितियों से गुज़रते देख रही हैं और 'डर लोगों के घरों, कार्यस्थलों और विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुँच गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के नेतृत्व में राजनीतिक हलचल जारी है और हसीना के प्रत्यर्पण की माँग भी उठती रही है। उनका यह संबोधन अवामी लीग की राजनीतिक पुनर्वापसी की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।