22 जुलाई 2026
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शेख हसीना का दावा: 2024 के बाद बांग्लादेश 'बेहद खतरनाक' मोड़ पर, यूनुस और जमात पर साजिश का आरोप

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शेख हसीना का दावा: 2024 के बाद बांग्लादेश 'बेहद खतरनाक' मोड़ पर, यूनुस और जमात पर साजिश का आरोप

सारांश

शेख हसीना ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश को 'बेहद खतरनाक' दौर में बताया और 2024 के विरोध प्रदर्शनों को स्वतःस्फूर्त नहीं, बल्कि मोहम्मद यूनुस, तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी द्वारा रचा गया 'सुनियोजित षड्यंत्र' करार दिया। 460 थानों में आगजनी, अल्पसंख्यकों पर हमले और न्यायपालिका पर दबाव — उनके आरोपों की सूची लंबी है।

मुख्य बातें

शेख हसीना ने 22 जुलाई को एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद में बांग्लादेश को जुलाई-अगस्त 2024 के बाद 'बेहद खतरनाक' दौर में बताया।
उन्होंने मोहम्मद यूनुस , तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी पर अवामी लीग को सत्ता से हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया।
हसीना के अनुसार, 460 पुलिस थानों में आगजनी हुई और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के नेताओं को रिहा किया गया।
हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अहमदिया समुदायों पर हमलों का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे देश की 'ऐतिहासिक धार्मिक सद्भावना पर हमला' बताया।
हसीना ने दावा किया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश को झूठे मामलों में जेल भेजा गया और वैक्सीन की कमी से सैकड़ों बच्चों की मौत हुई।
ये सभी आरोप हसीना के एकतरफा बयान हैं; बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 22 जुलाई को आरोप लगाया कि उनका देश जुलाई-अगस्त 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद 'बेहद खतरनाक' दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण सुधार आंदोलन की आड़ में एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अवामी लीग को सत्ता से बेदखल किया गया। हसीना ने इस पूरी घटनाक्रम के लिए पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को जिम्मेदार ठहराया।

किस मंच पर आए ये आरोप

हसीना ने ये बातें 'रीइन्वेंटिंग बांग्लादेश: ए वर्ल्ड क्राइसिस टू ओवरकम' विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शन कोई स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि उनके अनुसार 'बेहद सुनियोजित अभियान' था। हसीना ने आरोप लगाया कि चरमपंथी नेताओं ने इन प्रदर्शनों के दौरान फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना शुरू किया और उनका उद्देश्य था — 'लाशें गिराना, जनाक्रोश पैदा करना और सरकार को गिराना।'

हिंसा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप

हसीना के अनुसार, इन घटनाओं के दौरान 460 पुलिस थानों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे कई स्थानों पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या की गई और उनके शव ओवरब्रिज से लटका दिए गए। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों पर हमले हुए और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों — अंसारुल्लाह बांग्ला टीम, हिज्ब उत तहरीर, हरकत-उल-जिहाद और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश — के नेताओं सहित कई आतंकियों को रिहा कर दिया गया।

अल्पसंख्यकों पर हमले का आरोप

पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ व्यापक हिंसा का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अहमदिया समुदायों के साथ-साथ सूफी दरगाहों और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थानों पर हमले किए गए। हसीना ने कहा, 'यह बांग्लादेश की ऐतिहासिक धार्मिक सद्भावना पर सीधा हमला था।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वकीलों, पत्रकारों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मारा गया, गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया।

न्यायपालिका और अर्थव्यवस्था पर चिंता

हसीना ने आरोप लगाया कि देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को 'झूठे मामलों' में फंसाकर हथकड़ी लगाई गई और जेल भेजा गया। उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश और कई अन्य न्यायाधीशों पर हमले हुए और बाद में उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। आर्थिक मोर्चे पर भी उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में उनकी सरकार के दौरान हुई प्रगति को नष्ट कर दिया गया, गरीबी बढ़ी है और वैक्सीन न मिलने के कारण सैकड़ों बच्चों की मौत हुई। गौरतलब है कि ये सभी आरोप हसीना के एकतरफा बयान हैं; बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की ओर से इन पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ढाका इन दावों का किस प्रकार जवाब देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें उनके एकतरफा नजरिए से अलग करके देखना जरूरी है — वे सत्ता खो चुकी एक नेता हैं जो निर्वासन में बोल रही हैं। 460 थानों में आगजनी और अल्पसंख्यकों पर हमलों जैसे कुछ तथ्य स्वतंत्र रिपोर्टों से मेल खाते हैं, लेकिन 'सुनियोजित षड्यंत्र' के दावे अभी सत्यापित नहीं हैं। असली सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली और अल्पसंख्यक सुरक्षा पर ढाका से किस तरह की जवाबदेही सुनिश्चित करता है — हसीना की वापसी की संभावना नहीं, पर उनके उठाए सवाल दक्षिण एशियाई स्थिरता के लिए अनदेखे नहीं किए जा सकते।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख हसीना ने बांग्लादेश को 'खतरनाक दौर' में क्यों बताया?
हसीना का कहना है कि जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद से बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, अल्पसंख्यकों पर हमले हुए हैं और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया है। उन्होंने इसे अपनी सरकार के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र का नतीजा बताया।
हसीना ने मोहम्मद यूनुस पर क्या आरोप लगाए हैं?
हसीना ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया कि उन्होंने तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी के साथ मिलकर आरक्षण सुधार आंदोलन की आड़ में अवामी लीग को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रची। ये आरोप हसीना के एकतरफा बयान हैं और अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
2024 के बांग्लादेश विरोध प्रदर्शनों में क्या हुआ था?
हसीना के अनुसार, जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 460 पुलिस थानों में आगजनी हुई, पुलिसकर्मियों की हत्याएं हुईं और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सदस्यों को जेलों से रिहा किया गया। उन्होंने इन घटनाओं को स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि 'बेहद सुनियोजित अभियान' बताया।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के बारे में हसीना ने क्या कहा?
हसीना ने आरोप लगाया कि हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अहमदिया समुदायों के साथ-साथ सूफी दरगाहों और धार्मिक संस्थानों पर हमले हुए और उन्हें नष्ट किया गया। उन्होंने इसे बांग्लादेश की 'ऐतिहासिक धार्मिक सद्भावना पर हमला' करार दिया।
क्या बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने हसीना के आरोपों का जवाब दिया है?
अभी तक बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की ओर से हसीना के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हसीना निर्वासन में हैं और ये बयान उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद के दौरान दिए।
राष्ट्र प्रेस
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