शेख हसीना का आरोप: अवामी लीग नेताओं की मौत 'सुनियोजित हत्या', बांग्लादेश में जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 29 मई 2026 को अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत को 'सुनियोजित हत्या' करार देते हुए स्वतंत्र जांच की माँग की है। उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) सरकार पर आरोप लगाया कि वह उस हिंसा के चक्र को आगे बढ़ा रही है, जो कथित तौर पर पूर्व अंतरिम सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।
मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मौत — तत्काल कारण
यह बयान 78 वर्षीय मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मौत के बाद आया, जो एक अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व अवामी लीग सांसद थे। उनका निधन ढाका के स्क्वायर अस्पताल में गुरुवार की दोपहर हुआ। उन्हें 3 अक्टूबर 2024 को जुलाई 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद हिरासत में लिया गया था और बालियाडांगी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक कथित जबरन वसूली मामले में आरोपी बनाया गया था। खराब स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिली, और जमानत के तीन महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई।
शेख हसीना का बयान — सीधे आरोप
अवामी लीग के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए शेख हसीना ने कहा, 'गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बाद उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी, फिर उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिली। हालांकि उनके बेटे, पूर्व सांसद मजहरुल इस्लाम सुजान, अभी भी झूठे मामलों में फंसे हुए हैं। एक ही केस में दो लोगों के लिए अलग-अलग फैसले कई सवाल खड़े करते हैं।'
हसीना ने आगे कहा कि 'यह कोई प्राकृतिक मौत नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। इस तरह पूर्व अंतरिम सरकार ने हमारे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को मारा था। मौजूदा सरकार भी इसी प्रक्रिया को जारी रख रही है, जो कानून के शासन के प्रति किसी भी जिम्मेदारी को नहीं दिखाती।'
रमेश चंद्र सेन की मौत — एक और संदर्भ
हसीना ने एक अन्य वरिष्ठ अवामी लीग नेता और पूर्व सांसद रमेश चंद्र सेन की मौत का भी उल्लेख किया। ठाकुरगांव-1 क्षेत्र से सांसद रहे सेन की मृत्यु 7 फरवरी को दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान बीमार पड़ने के बाद हुई थी। हसीना ने कहा कि एक ही जिले के दो महत्वपूर्ण नेताओं की मौत यह सवाल उठाती है कि क्या यह महज संयोग है या किसी योजनाबद्ध घटनाओं की श्रृंखला का हिस्सा।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए राजनीतिक बदलावों के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। आलोचकों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों में राजनीतिक प्रेरणा थी, जबकि वर्तमान सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठन भी हिरासत में मौतों और राजनीतिक हिंसा पर चिंता जता रहे हैं।
आगे क्या होगा
शेख हसीना की माँग है कि इन मौतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। बीएनपी सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र बांग्लादेश में राजनीतिक कैदियों की स्थिति पर बनी हुई है।