16 जुलाई 2026
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शेख हसीना का आरोप: अवामी लीग नेताओं की मौत 'सुनियोजित हत्या', बांग्लादेश में जांच की मांग

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शेख हसीना का आरोप: अवामी लीग नेताओं की मौत 'सुनियोजित हत्या', बांग्लादेश में जांच की मांग

सारांश

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अवामी लीग के दो वरिष्ठ नेताओं — मोहम्मद दबीरुल इस्लाम और रमेश चंद्र सेन — की हिरासत से जुड़ी मौतों को 'सुनियोजित हत्या' करार देते हुए स्वतंत्र जांच की माँग की है। उन्होंने बीएनपी सरकार पर पूर्व अंतरिम सरकार की हिंसक नीतियों को जारी रखने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 29 मई 2026 को अवामी लीग नेताओं की मौत को 'सुनियोजित हत्या' बताया।
78 वर्षीय मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मृत्यु ढाका के स्क्वायर अस्पताल में हुई — जमानत के तीन महीने बाद।
उन्हें 3 अक्टूबर 2024 को हिरासत में लिया गया था; 19 फरवरी को खराब स्वास्थ्य के कारण जमानत मिली।
पूर्व सांसद रमेश चंद्र सेन की मौत 7 फरवरी को दिनाजपुर जिला जेल में हिरासत के दौरान हुई थी।
हसीना ने बीएनपी सरकार पर हिंसा के चक्र को जारी रखने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की माँग की।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 29 मई 2026 को अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत को 'सुनियोजित हत्या' करार देते हुए स्वतंत्र जांच की माँग की है। उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) सरकार पर आरोप लगाया कि वह उस हिंसा के चक्र को आगे बढ़ा रही है, जो कथित तौर पर पूर्व अंतरिम सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।

मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मौत — तत्काल कारण

यह बयान 78 वर्षीय मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मौत के बाद आया, जो एक अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व अवामी लीग सांसद थे। उनका निधन ढाका के स्क्वायर अस्पताल में गुरुवार की दोपहर हुआ। उन्हें 3 अक्टूबर 2024 को जुलाई 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद हिरासत में लिया गया था और बालियाडांगी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक कथित जबरन वसूली मामले में आरोपी बनाया गया था। खराब स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिली, और जमानत के तीन महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई।

शेख हसीना का बयान — सीधे आरोप

अवामी लीग के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए शेख हसीना ने कहा, 'गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बाद उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी, फिर उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिली। हालांकि उनके बेटे, पूर्व सांसद मजहरुल इस्लाम सुजान, अभी भी झूठे मामलों में फंसे हुए हैं। एक ही केस में दो लोगों के लिए अलग-अलग फैसले कई सवाल खड़े करते हैं।'

हसीना ने आगे कहा कि 'यह कोई प्राकृतिक मौत नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। इस तरह पूर्व अंतरिम सरकार ने हमारे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को मारा था। मौजूदा सरकार भी इसी प्रक्रिया को जारी रख रही है, जो कानून के शासन के प्रति किसी भी जिम्मेदारी को नहीं दिखाती।'

रमेश चंद्र सेन की मौत — एक और संदर्भ

हसीना ने एक अन्य वरिष्ठ अवामी लीग नेता और पूर्व सांसद रमेश चंद्र सेन की मौत का भी उल्लेख किया। ठाकुरगांव-1 क्षेत्र से सांसद रहे सेन की मृत्यु 7 फरवरी को दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान बीमार पड़ने के बाद हुई थी। हसीना ने कहा कि एक ही जिले के दो महत्वपूर्ण नेताओं की मौत यह सवाल उठाती है कि क्या यह महज संयोग है या किसी योजनाबद्ध घटनाओं की श्रृंखला का हिस्सा।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए राजनीतिक बदलावों के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। आलोचकों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों में राजनीतिक प्रेरणा थी, जबकि वर्तमान सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठन भी हिरासत में मौतों और राजनीतिक हिंसा पर चिंता जता रहे हैं।

आगे क्या होगा

शेख हसीना की माँग है कि इन मौतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। बीएनपी सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र बांग्लादेश में राजनीतिक कैदियों की स्थिति पर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें स्वतंत्र साक्ष्य की कसौटी पर परखा जाना ज़रूरी है — क्योंकि वे स्वयं एक विपक्षी नेता हैं जिनकी सरकार को जुलाई 2024 में हटाया गया था। असली सवाल यह है कि बांग्लादेश में हिरासत में मौतों की जांच के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र है या नहीं। दो वरिष्ठ नेताओं की हिरासत से जुड़ी मौतें — चाहे परिस्थितियाँ कुछ भी हों — यह संकेत देती हैं कि बांग्लादेश में राजनीतिक बदले की कार्रवाई और कानून के शासन के बीच की रेखा खतरनाक रूप से धुंधली हो रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस मामले को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख हसीना ने किस मामले में जांच की माँग की है?
शेख हसीना ने अवामी लीग के दो वरिष्ठ नेताओं — मोहम्मद दबीरुल इस्लाम और रमेश चंद्र सेन — की हिरासत से जुड़ी मौतों की स्वतंत्र जांच की माँग की है। उन्होंने इन मौतों को 'सुनियोजित हत्या' बताते हुए बांग्लादेश की मौजूदा बीएनपी सरकार पर आरोप लगाए हैं।
मोहम्मद दबीरुल इस्लाम कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
मोहम्मद दबीरुल इस्लाम 78 वर्षीय अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व अवामी लीग सांसद थे। उन्हें 3 अक्टूबर 2024 को हिरासत में लिया गया था और 19 फरवरी को खराब स्वास्थ्य के कारण जमानत मिलने के बाद ढाका के स्क्वायर अस्पताल में उनका निधन हुआ।
रमेश चंद्र सेन की मौत की परिस्थितियाँ क्या थीं?
पूर्व सांसद रमेश चंद्र सेन की मौत 7 फरवरी को दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान बीमार पड़ने के बाद हुई। वे ठाकुरगांव-1 क्षेत्र से सांसद रहे थे और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता थे।
बांग्लादेश में अवामी लीग नेताओं को हिरासत में क्यों लिया गया था?
जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए राजनीतिक बदलावों के बाद अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न मामलों में हिरासत में लिया गया था। आलोचकों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों में राजनीतिक प्रेरणा थी, जबकि सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया बताती है।
क्या बीएनपी सरकार ने शेख हसीना के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक बीएनपी सरकार की ओर से शेख हसीना के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हसीना ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से यह आरोप लगाए और स्वतंत्र जांच की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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