शेख हसीना का देश छोड़ने के बाद पहला लाइव संबोधन: 2024 का छात्र आंदोलन सुनियोजित राजनीतिक साजिश था
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से आयोजित एक वर्चुअल संबोधन में मीडिया के सामने पहली बार सीधे बोलते हुए 2024 के छात्र आंदोलन को एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस आंदोलन को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन पर्दे के पीछे से काम कर रहे संगठित समूहों ने इसे हिंसक राजनीतिक हथियार में तब्दील कर दिया।
मुख्य संबोधन: हसीना ने क्या कहा
हसीना ने अपने संबोधन में कहा, 'आज मैं सिर्फ उस व्यक्ति के रूप में नहीं बोल रही हूँ, जिसे पाँच बार बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने का सम्मान मिला, बल्कि मैं शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी के रूप में भी आपसे बात कर रही हूँ। मुझे अपने देश से दूर कर दिया गया, लेकिन मैं कभी अपने लोगों से अलग नहीं हुई।' उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो वर्षों से वे बांग्लादेश को कठिन परिस्थितियों से गुज़रते हुए देख रही हैं — डर लोगों के घरों, कार्यस्थलों और विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुँच गया है।
उन्होंने कहा, 'यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे हमने मिलकर बनाया था। यह वह बांग्लादेश भी नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।'
2024 आंदोलन पर हसीना का आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि जुलाई-अगस्त 2024 का आंदोलन उनके अनुसार कोई शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन नहीं था। उनका दावा है कि 15 जुलाई के बाद से इस आंदोलन का स्वरूप बदल गया — हत्याएं, आगजनी, हमले और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं, और सरकारी संस्थानों व संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।
उन्होंने मुहम्मद यूनुस के हवाले से कहा कि यूनुस ने स्वयं स्वीकार किया था कि यह एक 'बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया आंदोलन' था जिसका नेतृत्व एक 'मास्टरमाइंड' कर रहा था। हसीना के अनुसार, यह बयान खुद साबित करता है कि आंदोलन अचानक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य 'चुनावी प्रक्रिया के बाहर सत्ता तक पहुँचने का रास्ता बनाना' था।
राजनीतिक उत्पीड़न के आरोप
हसीना ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक दमन हुआ है। उनके अनुसार:
कम से कम 10,000 लोग मारे गए या लापता हो गए; 6.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया और 3,500 मामले दर्ज किए गए। अवामी लीग के करीब 4.5 लाख नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आरोपी के रूप में नामजद किया गया, जबकि 10 लाख से अधिक अन्य लोगों को अज्ञात आरोपी के तौर पर सूचीबद्ध किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से 600 से अधिक मामले दर्ज हैं। ये आँकड़े हसीना के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों पर असर
हसीना ने आरोप लगाया कि यह उत्पीड़न केवल अवामी लीग के सदस्यों तक सीमित नहीं रहा। उनके अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय, न्यायाधीश, वकील, पत्रकार, बुद्धिजीवी, मजदूर, रिक्शा चालक और किसान तक हमलों, गिरफ्तारियों या मुकदमों का शिकार हुए हैं। महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और हिरासत में यातना की घटनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।
आगे क्या
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार सत्ता में है और हसीना भारत में निर्वासन में हैं। उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को 'डर, आतंक, निराशा और आर्थिक परेशानियों' से ग्रस्त बताया। यह पहला मौका है जब उन्होंने देश छोड़ने के बाद सीधे मीडिया से संवाद किया, जो आने वाले दिनों में कूटनीतिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा सकता है।