शेख हसीना का ऐलान: फाँसी का खतरा जानते हुए भी बांग्लादेश लौटूंगी, सजा को बताया राजनीतिक बदला
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 23 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि जेल या फाँसी के जोखिम के बावजूद वह स्वदेश लौटकर अदालत का सामना करेंगी। 78 वर्षीया हसीना ने जापानी समाचार एजेंसी क्योडो न्यूज़ को दिए लिखित साक्षात्कार में यह बात कही और 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में अपनी सजा को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।
हसीना का बयान और चुनौती
हसीना ने अपने लिखित साक्षात्कार में कहा, 'मैं बांग्लादेश लौटूंगी और अदालत में पेश होऊंगी।' हालाँकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस अदालत के समक्ष उपस्थित होंगी। बांग्लादेश की वर्तमान सरकार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, 'वे मुझे जेल भेज सकते हैं, यहाँ तक कि फाँसी देने की भी कोशिश कर सकते हैं। मुझे इन सभी जोखिमों का पूरा अंदाज़ा है।'
हसीना ने हत्याओं का आदेश देने के आरोप को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि राजनीतिक विरोधियों ने आंदोलन को भटकाया। उन्होंने कहा, 'यदि स्वतंत्र विदेशी फोरेंसिक विशेषज्ञ यह जाँचें कि अशांति के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु किस हथियार या गोली से हुई, तो सच्चाई सामने आ सकती है।'
मृत्युदंड और प्रत्यर्पण की पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध में उठे छात्र आंदोलन के दौरान इस्तीफा देकर भारत आने के बाद से हसीना नई दिल्ली में रह रही हैं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
बांग्लादेश सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा कि नई दिल्ली को यह अनुरोध प्राप्त हो चुका है और वह इससे जुड़े कानूनी तथा न्यायिक पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
ढाका की प्रतिक्रिया
इस महीने की शुरुआत में हसीना की संभावित वापसी की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने 14 जुलाई की प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि सरकार हसीना को मुकदमे का सामना कराने के लिए वापस लाने की कोशिश कर रही है और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
जापानी नागरिकों का संदर्भ और क्षेत्रीय स्थिरता
2024 की हिंसा में जापानी नागरिक भी प्रभावित हुए थे, जो बांग्लादेश की राजधानी ढाका में जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) की सहायता से चल रहे एक रैपिड रेलवे परियोजना पर कार्यरत थे। इस संदर्भ में हसीना ने कहा, 'एक स्थिर बांग्लादेश केवल बांग्लादेश के लिए ही आवश्यक नहीं है — यह दक्षिण एशिया, बंगाल की खाड़ी, और जापान जैसे विकास साझेदारों के लिए भी ज़रूरी है, जिन्होंने हमारी विकास यात्रा में मित्रता, विश्वास और संसाधन लगाए हैं।'
सुलह और जवाबदेही पर हसीना का रुख
बांग्लादेश के भविष्य पर बात करते हुए हसीना ने कहा, 'देश को उबरने की ज़रूरत है। लेकिन सुलह का अर्थ दंड से मुक्ति नहीं हो सकता। अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को उचित कानूनी प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंध कूटनीतिक दबाव में हैं और प्रत्यर्पण अनुरोध पर नई दिल्ली की चुप्पी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बन रही है।