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क्या हसीना और कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने की याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी?

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क्या हसीना और कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने की याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी?

सारांश

क्या बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने की याचिका पर सुनवाई होगी? 20 जनवरी को होने वाली इस सुनवाई में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी जो कि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

शेख हसीना और कमाल की सजा को मौत में बदलने की याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जल्दी सुनवाई की अपील को स्वीकार किया है।
अभियोजक ने दी गई उम्रकैद को अपर्याप्त बताया है।
हसीना और कमाल को पहले से ही एक बड़े आरोप में मौत की सजा दी गई थी।
इस मामले का राजनीतिक महत्व भी है।

ढाका, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने की याचिका पर सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के अभियोजक की अपील पर इस सुनवाई की तारीख तय की है।

इस अपील में शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मिली सजा को बढ़ाने की मांग की गई है। अपीलेट डिवीजन के जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक ने कहा, "सुनवाई की तारीख 20 जनवरी को तय की गई है।"

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जल्दी सुनवाई की अपील पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया है। यह मामला सुबह अपीलेट डिवीजन चैंबर जज कोर्ट की कॉज लिस्ट में आइटम नंबर 58 के तौर पर लिस्टेड था। आईसीटी अभियोजन ने 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन में अपील फाइल की।

अपील में अभियोजक ने जुलाई में हुई हिंसा के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के कुछ मामलों में उनकी सजा को बढ़ाकर मौत की सजा देने की मांग की थी।

आईसीटी अभियोजक गाजी एमएच तममी ने कहा था कि जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा पर्याप्त नहीं है और इसे बदलकर मौत की सजा दी जानी चाहिए। हसीना और कमाल के लिए मौत की सजा की अपील के बाद ट्रिब्यूनल परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग में तममी ने कहा था, "पहला फैसला फिर से बने आईसीटी में सुनाया गया था। जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में, हसीना और कमाल को सजा सुनाई गई थी। उन्हें एक आरोप में उम्रकैद और दूसरे में मौत की सजा मिली थी।"

उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अदालत में अपील की है कि उम्रकैद की जगह मौत की सजा दी जाए। इसके लिए आठ वजहें बताई गई हैं। फैसला आने के तीस दिनों के अंदर अपील फाइल करनी होती है। हमने यह पहले ही कर दिया था। अपील के 60 दिनों के अंदर सेटलमेंट का नियम है। मुझे उम्मीद है कि इस अपील का निपटारा समय के अंदर हो जाएगा।"

जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर को दिए गए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने दोनों नेताओं को एक बड़े आरोप में मौत की सजा और एक अलग आरोप में प्राकृतिक तरीके से मौत तक जेल की सजा सुनाई थी।

अपील दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सोमवार को तमीम ने कहा था, "हमने आज 8 वजहों से अपील फाइल की है ताकि उन आरोपों में सजा बढ़ाई जा सके, जिनमें उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई थी।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह देश की राजनीतिक स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकती है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि न्यायालय इस मामले में निष्पक्षता बरते।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख हसीना को उम्रकैद की सजा क्यों मिली?
उन्हें जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में सजा दी गई थी।
याचिका पर सुनवाई कब होगी?
याचिका पर सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
क्या अपील में सजा बढ़ाने की मांग की गई है?
जी हाँ, अपील में सजा को मौत की सजा में बदलने की मांग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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