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तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान की ढाका यात्रा: PM तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी नेताओं से मुलाकात

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तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान की ढाका यात्रा: PM तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी नेताओं से मुलाकात

सारांश

तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान की ढाका यात्रा महज शिष्टाचार भेंट नहीं — यह बांग्लादेश की बदलती भू-राजनीतिक धुरी का स्पष्ट संकेत है। बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद तुर्किए और पाकिस्तान के साथ नजदीकियाँ बढ़ रही हैं, जो पूरे दक्षिण एशियाई समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं।

मुख्य बातें

तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान 7 जून 2025 को तीन दिवसीय दौरे पर ढाका पहुँचे।
फिदान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से व्यापार, रक्षा और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात हुई।
एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने भी फिदान से भेंट की; एक्स पर पोस्ट में 'जुलाई रेवोल्यूशन' में भूमिका की सराहना का उल्लेख।
फिदान ने कॉक्स बाजार के रोहिंग्या शिविरों का दौरा कर तुर्किए की मानवीय एजेंसियों की गतिविधियाँ देखीं।
बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश का झुकाव तुर्किए और पाकिस्तान की ओर बढ़ने के संकेत।

तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान ने 7 जून 2025 को ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर व्यापार, रक्षा और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। इस तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान फिदान ने कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं से भी भेंट की, जो बांग्लादेश-तुर्किए संबंधों में एक नई दिशा का संकेत देती है।

मुख्य बैठकें और घटनाक्रम

फिदान गुरुवार रात ढाका पहुँचे और शुक्रवार को उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के साथ औपचारिक वार्ता की, जिसमें विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में संबंध मजबूत करने की अंकारा की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके बाद दोनों नेता संयुक्त रूप से कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर भी गए।

उसी दिन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी फिदान से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम कर रहे थे। बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया गया कि 'विदेश मंत्री फिदान ने एनसीपी नेतृत्व को जुलाई रेवोल्यूशन में उनकी अहम भूमिका के लिए बधाई दी, जिसकी वजह से शेख हसीना सरकार गिरी थी।'

जमात-ए-इस्लामी से मुलाकात

फिदान ने जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान की अगुवाई में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से भी भेंट की। जमात ने एक्स पर इस बैठक का विवरण साझा करते हुए लिखा कि 'बातचीत उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और रक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही।' आलोचकों का कहना है कि एक कट्टरपंथी धार्मिक दल के साथ तुर्किए के शीर्ष राजनयिक की यह मुलाकात बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक धुरी को दर्शाती है।

बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव के संकेत

गौरतलब है कि शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कुछ समय देश की बागडोर संभाली। इस वर्ष फरवरी में लोकतांत्रिक चुनावों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार सत्ता में लौटी। बीएनपी के सत्तारूढ़ होने के बाद से बांग्लादेश का झुकाव तुर्किए और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जो पिछले दशक की भारत-समर्थक विदेश नीति से एक स्पष्ट बदलाव है।

रोहिंग्या शिविरों में तुर्किए की मानवीय उपस्थिति

तुर्किए के विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिदान ने कॉक्स बाजार के रोहिंग्या शिविरों का दौरा कर वहाँ सक्रिय तुर्किए की एजेंसियों — टीआईकेए, एएफएडी, टर्किश रेड क्रिसेंट, तुर्किए दियानेट फाउंडेशन — की गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने तुर्किए के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालित तुर्किए-बांग्लादेश अस्पताल की सेवाओं का भी निरीक्षण किया।

आगे की राह

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। तुर्किए और बांग्लादेश के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग की यह नई गर्मजोशी क्षेत्रीय शक्तियों, विशेषकर भारत, के लिए नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौतों की घोषणा संभव बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बांग्लादेश की विदेश नीति में आ रहे संरचनात्मक बदलाव की कूटनीतिक पुष्टि है। बीएनपी के सत्ता में लौटते ही ढाका का रुझान अंकारा और इस्लामाबाद की ओर तेज हुआ है — यह उस भारत-केंद्रित धुरी से सीधा प्रस्थान है जो अवामी लीग के डेढ़ दशक के शासन की पहचान थी। एक कट्टरपंथी धार्मिक दल जमात-ए-इस्लामी के साथ तुर्किए के शीर्ष राजनयिक की औपचारिक बैठक इस बात का संकेत है कि अंकारा बांग्लादेश के नए राजनीतिक परिदृश्य के हर हिस्से को साधने की कोशिश में है। नई दिल्ली के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक दृष्टि से नज़रअंदाज़ करने लायक नहीं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान ने ढाका में किन-किन नेताओं से मुलाकात की?
फिदान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान, जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान और एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम से मुलाकात की। यह दौरा 7 जून 2025 को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के तहत हुआ।
बांग्लादेश की विदेश नीति में क्या बदलाव आ रहा है?
बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश का झुकाव तुर्किए और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह अवामी लीग शासनकाल की भारत-समर्थक विदेश नीति से स्पष्ट बदलाव माना जा रहा है।
फिदान ने जमात-ए-इस्लामी से क्यों मुलाकात की?
जमात के अनुसार, बातचीत उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग पर केंद्रित रही। आलोचकों का कहना है कि यह मुलाकात तुर्किए की बांग्लादेश के नए राजनीतिक परिदृश्य में पैठ बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
रोहिंग्या शिविरों में तुर्किए की क्या भूमिका है?
तुर्किए की कई एजेंसियाँ — टीआईकेए, एएफएडी, टर्किश रेड क्रिसेंट और तुर्किए दियानेट फाउंडेशन — कॉक्स बाजार के रोहिंग्या शिविरों में सक्रिय हैं। तुर्किए का स्वास्थ्य मंत्रालय वहाँ एक अस्पताल भी चला रहा है, जिसका फिदान ने दौरा किया।
बांग्लादेश में बीएनपी सरकार कब सत्ता में आई?
शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कुछ समय सत्ता संभाली। इस वर्ष फरवरी में हुए लोकतांत्रिक चुनावों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार सत्ता में लौटी।
राष्ट्र प्रेस
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