ट्रंप का दावा: टैरिफ नीति से अमेरिका में लौटी मैन्युफैक्चरिंग, इस साल जुड़ीं 60,000 नई नौकरियाँ
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर 2026 को टेक्सास में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि उनकी टैरिफ नीतियों की बदौलत अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र तेज़ी से पुनर्जीवित हो रहा है — इस साल 60,000 नई मैन्युफैक्चरिंग नौकरियाँ जुड़ी हैं और भारी ट्रकों का उत्पादन करीब 31 प्रतिशत बढ़ा है। ट्रंप ने विदेशी प्रतिस्पर्धा से अमेरिकी उद्योगों को सुरक्षा देने को इस पुनरुत्थान की मुख्य वजह बताया।
ट्रंप के मुख्य दावे
टेक्सास में ट्रक निर्माता कंपनी पीटरबिल्ट की फैक्ट्री में बोलते हुए ट्रंप ने कहा, 'हमारे यहाँ पहले से ज़्यादा फैक्ट्रियाँ बन रही हैं। पूरे देश में फैक्ट्रियाँ और प्लांट बन रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग वापस आ रही है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी 'मज़बूत टैरिफ नीति' की वजह से इस साल अमेरिकी निर्यात देश के इतिहास के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया है।
ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा गिरकर पिछले 44 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि टैरिफ लागू होने से पहले विदेशी कंपनियाँ अमेरिकी बाज़ार में सामान बेचकर मुनाफा ले जाती थीं और अमेरिकी कामगारों की नौकरियाँ खत्म होती थीं।
पीटरबिल्ट और पैकार की प्रतिक्रिया
पीटरबिल्ट की इवेंट्स मैनेजर सारा रेनशॉ ने ट्रंप को बताया कि टैरिफ नीति के कारण कंपनी अपना उत्पादन बढ़ाने और 1,000 नए कर्मचारियों को रोज़गार देने में सफल रही है। रेनशॉ ने कहा, 'राष्ट्रपति महोदय, आपके टैरिफ की वजह से हम उत्पादन बढ़ा पाए हैं और 1,000 कर्मचारियों को नौकरी दे पाए हैं।'
पैकार के सीईओ प्रेस्टन फेइट ने भी ट्रंप का फैक्ट्री में स्वागत करते हुए उनकी व्यापार नीतियों की सराहना की। फेइट ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप, हम आपके, वाणिज्य मंत्री लटनिक और पूरे प्रशासन के बहुत आभारी हैं कि आपने ऐसी व्यापार नीतियाँ लागू कीं, जो अमेरिका के लिए अच्छी हैं।'
पर्यावरण नियमों में बदलाव का प्रभाव
ट्रंप ने ट्रक उद्योग की बेहतर स्थिति को केवल टैरिफ से नहीं, बल्कि भारी ट्रकों पर लागू नाइट्रोजन ऑक्साइड से जुड़े पर्यावरण नियम को वापस लेने के अपने प्रशासन के फैसले से भी जोड़ा। उनके मुताबिक, इस नियम को वापस लेने से ट्रक बनाने की लागत में कमी आई है, जिससे उत्पादन को बल मिला है।
व्यापक आर्थिक संदर्भ
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर वैश्विक व्यापार जगत में बड़ी बहस चल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर टैरिफ के असर को लेकर आर्थिक विशेषज्ञ और विपक्षी दल सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि टैरिफ से आयातित वस्तुएँ महँगी होती हैं, जिसका बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ट्रंप के दावों — विशेषकर निर्यात रिकॉर्ड और व्यापार घाटे के आँकड़ों — की स्वतंत्र सत्यापन एजेंसियों ने अभी पुष्टि नहीं की है।
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वेतन वृद्धि का दावा भी ट्रंप ने किया, हालाँकि इसका ब्यौरा उन्होंने नहीं दिया। आगे यह देखना होगा कि इन आँकड़ों को सरकारी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की रिपोर्टें किस हद तक प्रमाणित करती हैं।