टैरिफ से नई व्यापार शर्तें: ग्रीर बोले — 19 देशों से समझौते, वैश्विक GDP का 32% कवर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार, 22 जुलाई को सीनेट की वित्त समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन टैरिफ को एक रणनीतिक व्यापार हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है — ताकि व्यापारिक साझेदार देश अपने बाज़ार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का पालन सुनिश्चित करें और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को पुनर्जीवित किया जा सके। ग्रीर के अनुसार, यह नीति पहले से ही ठोस परिणाम दे रही है और अब तक 19 व्यापार समझौते हो चुके हैं जो वैश्विक GDP के 32 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं।
टैरिफ नीति का मूल तर्क
ग्रीर ने सांसदों के सामने यह रेखांकित किया कि टैरिफ महज दंडात्मक उपकरण नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हम टैरिफ का इस्तेमाल जारी रखेंगे और ऐसे समझौते करेंगे जो हमारी अर्थव्यवस्था में दोबारा उद्योगों को मजबूत करने, अमेरिकी कामगारों की रक्षा करने, उनकी आय बढ़ाने और व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेंगे।" उनके अनुसार, टैरिफ वार्ता-मेज पर अमेरिका का सबसे बड़ा दबाव-साधन है और व्यापार समझौतों में विवाद-निपटान तंत्र होने के बावजूद इसकी भूमिका अपरिहार्य बनी हुई है।
किन देशों ने झुकाई गर्दन
ग्रीर ने कई देशों के ठोस उदाहरण पेश किए। कंबोडिया ने अमेरिकी सामानों पर लगाए गए सभी टैरिफ हटा दिए हैं। नॉर्थ मैसेडोनिया ने भी अपने टैरिफ समाप्त कर दिए हैं। मलेशिया सभी टैरिफ शून्य करने और दीर्घकालिक व्यापारिक बाधाएं दूर करने की तैयारी में है। इंडोनेशिया के साथ एक बहु-स्तरीय समझौता हुआ है जिसमें वह इस वर्ष के अंत तक अपनी प्रतिबद्धताएं लागू कर सकता है। जॉर्डन पहले ही नया समझौता कर चुका है।
इसके अतिरिक्त, इज़राइल ने अमेरिकी मानकों को स्वीकार किया है, जबकि यूरोपीय संघ (EU) ने औद्योगिक सामानों पर टैरिफ शून्य करने और अमेरिकी किसानों के लिए अधिक निर्यात अवसर देने पर सहमति जताई है।
निर्यात और आयात पर असर
ग्रीर ने दावा किया कि बराबरी पर आधारित इस व्यापार नीति से अमेरिकी निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। साथ ही आयात की संरचना भी बदली है — अब अधिक ध्यान उन मशीनों और उपकरणों पर है जो अमेरिका में घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सहायक हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने वैश्विक व्यापार से मुँह नहीं मोड़ा है, बल्कि व्यापार का स्वरूप इस प्रकार बदला है जिससे अमेरिकी नागरिकों और उद्योगों को सीधा लाभ मिले।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को लेकर वैश्विक स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं — कुछ देश वार्ता की मेज पर आए हैं, जबकि अन्य जवाबी उपायों पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि ये समझौते अभी 'ढाँचागत' या 'सिद्धांत-आधारित' स्तर पर हैं और इनके पूर्ण क्रियान्वयन की समयसीमा अलग-अलग देशों के लिए भिन्न है। विश्लेषकों के अनुसार, वास्तविक परीक्षा तब होगी जब ये प्रतिबद्धताएं बाध्यकारी कानूनी दस्तावेज़ों में तब्दील होंगी।