ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत सहित प्रमुख साझेदारों के साथ अमेरिकी वार्ता मजबूत हुई: जैमीसन ग्रीर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि इस रणनीति ने भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया और जापान जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ अमेरिका की सौदेबाज़ी की स्थिति को काफी मजबूत किया है। 21 जुलाई को प्रकाशित एक इंटरव्यू में ग्रीर ने यह भी दावा किया कि इस नीति से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में पुनरुत्थान के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं।
टैरिफ नीति की सफलता का दावा
द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टैरिफ नीति के खिलाफ कानूनी चुनौतियों और अर्थशास्त्रियों व कारोबारी संगठनों की आलोचना के बावजूद प्रशासन की रणनीति सही दिशा में है। उन्होंने कहा, 'बिल्कुल। मुझे लगता है कि हमें बड़ी सफलता मिली है। जब भी आप किसी बड़ी नीति में बदलाव करते हैं और बड़े कारोबारी या विशेष हितों को चुनौती देते हैं, तो विरोध होना तय है। कई लोग पुरानी व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन हम उसे बदलना चाहते हैं।'
ग्रीर के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने तेज़ी से कदम इसलिए उठाए क्योंकि लगातार बढ़ता अमेरिकी व्यापार घाटा देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुका था। उनका तर्क है कि व्यापक टैरिफ लगाने से अमेरिका को कई देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत में निर्णायक बढ़त मिली।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया
ग्रीर ने यह स्वीकार किया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के टैरिफ कार्यक्रम के एक बड़े हिस्से को रद्द कर दिया था। हालाँकि उन्होंने कहा कि इससे उनकी रणनीति पर कोई पछतावा नहीं है। उनके शब्दों में, 'हमारी नीतियों को अदालत में चुनौती मिलना कोई नई बात नहीं है। हमेशा कुछ लोग ऐसे होंगे जो अमेरिकी कामगारों की कीमत पर अपना फायदा कमाना चाहते हैं और अपने पुराने कारोबारी मॉडल को बचाने के लिए मुकदमे करेंगे।'
ग्रीर के मुताबिक, प्रशासन अब दूसरे कानूनी विकल्पों के ज़रिए अपनी व्यापार नीति को आगे बढ़ा रहा है और कई दशकों से चली आ रही अमेरिकी व्यापार व्यवस्था में आमूल बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।
मैन्युफैक्चरिंग पुनरुत्थान के दावे
ग्रीर ने कहा कि फैक्ट्रियों में निवेश बढ़ रहा है, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में मज़दूरी बेहतर हो रही है और औद्योगिक उत्पादन क्षमता में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'व्यापार घाटा कम हो रहा है। कंपनियाँ फिर से अमेरिका में उत्पादन शुरू कर रही हैं। हम वेतन बढ़ाने में सफल हो रहे हैं।' हालाँकि उन्होंने माना कि विनिर्माण क्षमता को पूरी तरह दोबारा खड़ा करने में समय लगेगा।
आलोचकों का कहना है कि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और टैरिफ नीति का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है।
अमेरिका की प्राथमिकता: राष्ट्रीय हित
ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य किसी देश विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि व्यापार के नियमों को अपने हित में ढालना है। उन्होंने कहा, 'हम किसी खास देश के खिलाफ नहीं हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ अमेरिका के हितों की रक्षा करना है। अगर ज़रूरत पड़ी तो दूसरे देशों के खिलाफ भी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे, लेकिन हमारी प्राथमिकता अमेरिका है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों का भविष्य अहम मोड़ पर है।