चाईबासा में हथिनी की संदिग्ध मौत, दोनों दांत गायब; तस्करी की आशंका से वन विभाग सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भनगांव के दीपसाई टोला में शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 की सुबह एक हथिनी खेत में मृत अवस्था में पाई गई। हथिनी के दोनों दांत गायब मिले, जिससे अधिकारियों को हाथी दांत तस्करी की आशंका है — हालाँकि मौत का वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
ग्रामीणों ने सुबह खेत में हथिनी को मृत देखा और तत्काल वन विभाग को सूचित किया। करीब सुबह 9 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटाए।
हथिनी के दोनों दांत नदारद पाए गए, जिससे तस्करों की संलिप्तता की आशंका गहरी हो गई है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सटीक कारण — चाहे वह प्राकृतिक हो, शिकार हो या कोई अन्य — स्पष्ट हो सकेगा।
जाँच की दिशा और साक्ष्य
वन विभाग तीन संभावनाओं को समानांतर ध्यान में रखकर जाँच कर रहा है: प्राकृतिक मृत्यु, शिकार और किसी अन्य बाहरी कारण से मौत। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
गौरतलब है कि मादा हाथियों में आमतौर पर दांत (टस्क) नहीं होते अथवा बहुत छोटे होते हैं — अधिकारी इस पहलू की भी पुष्टि कर रहे हैं, जो मामले को और जटिल बनाता है।
क्षेत्र में हाथियों की मौत का बढ़ता सिलसिला
यह घटना इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि जगन्नाथपुर और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में करीब 7 हाथियों की मौत दर्ज की जा चुकी है। झारखंड के विभिन्न जिलों में हाथियों की मौत के अलग-अलग कारण सामने आए हैं।
सितंबर 2026 में लातेहार में एक हाथी की मौत अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से हुई थी। मई 2026 में गिरिडीह के धोबरी वन क्षेत्र में एक युवा हाथी झाड़ियों और लताओं में फँसने के बाद भूख-प्यास से मारा गया। जनवरी 2026 में पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो क्षेत्र में एक हाथी की मौत आपसी संघर्ष में लगी चोटों से हुई। नवंबर 2025 में चाईबासा वन प्रभाग के अलग-अलग जंगलों में दो सप्ताह के भीतर तीन नर हाथियों के शव बरामद हुए थे। सारंडा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आईईडी विस्फोट से भी हाथियों की मौत की घटनाएँ पहले सामने आ चुकी हैं।
मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती चुनौती
जगन्नाथपुर और आसपास के इलाकों में हाथियों के झुंड लगातार विचरण करते हैं और कई बार गाँवों तथा रिहाइशी बस्तियों में पहुँच जाते हैं। इससे फसलों और घरों को नुकसान के साथ-साथ मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति भी बनती रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के बीच खुद की सुरक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा — दोनों बड़ी चुनौती बन गई हैं। स्थानीय लोग माँग कर रहे हैं कि वन विभाग मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए ठोस उपाय करे।
आगे क्या होगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग तस्करी के कोण पर जाँच आगे बढ़ाएगा। यदि रिपोर्ट में विष या किसी बाहरी हस्तक्षेप के संकेत मिले, तो पुलिस के साथ संयुक्त जाँच शुरू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती मौतें एक सुव्यवस्थित निगरानी तंत्र की माँग करती हैं।