5 अक्टूबर 2026
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गढ़वा जंगल में हाथी का शव बरामद, चार दिनों में झारखंड की दूसरी मौत; जाँच शुरू

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गढ़वा जंगल में हाथी का शव बरामद, चार दिनों में झारखंड की दूसरी मौत; जाँच शुरू

सारांश

चार दिनों में झारखंड में दूसरे हाथी की मौत — गढ़वा के पिपरादादर टोला में शव मिला, मौत का कारण अज्ञात। पश्चिमी सिंहभूम में पहले मिली हथिनी के दाँत भी गायब थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार, वन विभाग की जाँच जारी।

मुख्य बातें

5 अक्टूबर 2026 को गढ़वा जिले के पिपरादादर टोला में एक जंगली हाथी का शव बरामद हुआ।
यह चार दिनों में झारखंड में हाथी की मौत की दूसरी घटना है; इससे पहले पश्चिमी सिंहभूम के भनगांव में हथिनी मृत मिली थी।
भनगांव में मिली हथिनी के दोनों दाँत गायब थे, जिससे शिकार की आशंका है।
जगन्नाथपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत की घटनाएँ सामने आई हैं।
मौत का कारण अभी अज्ञात; पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
ग्रामीणों ने हाथी गलियारों की सुरक्षा और अवैध बिजली तारों की निगरानी की माँग की है।

झारखंड के गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में पिपरादादर टोला के जंगल किनारे सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को एक जंगली हाथी का शव बरामद किया गया। यह चार दिनों के भीतर झारखंड में हाथी की मौत की दूसरी घटना है, जिसने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मौत का कारण अभी तक अज्ञात है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

मुख्य घटनाक्रम

गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम ने बताया कि सोमवार सुबह लगभग आठ बजे विभाग को जंगल के किनारे हाथी के मृत पड़े होने की सूचना मिली। इसके तुरंत बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की एक टीम घटनास्थल पर भेजी गई। अब्राहम ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले मौत के वास्तविक कारण पर किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी। वन विभाग के अधिकारी ललन कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों से भी पूछताछ की है।

चार दिन में दूसरी घटना — पश्चिमी सिंहभूम में मिली थी हथिनी

इससे तीन दिन पहले पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में एक हथिनी मृत मिली थी। उस मामले में हथिनी के दोनों दाँत गायब पाए गए थे, जिससे शिकार की आशंका जताई गई थी। वन विभाग ने उस मामले में भी शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर जाँच शुरू की थी। जगन्नाथपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत की घटनाएँ सामने आने की बात कही गई है।

झारखंड में हाथियों की मौत का इतिहास

यह क्षेत्र पहले भी ऐसी घटनाओं का गवाह रहा है। विश्रामपुर पंचायत क्षेत्र में 2019 में नया टोला में एक जंगली हाथी की करंट लगने से मौत हुई थी। अगस्त 2023 में भौंरी गाँव में एक शावक हाथी जंगल के किनारे मृत मिला था। सितंबर 2026 में लातेहार में कथित तौर पर अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हुई थी। मई 2026 में गिरिडीह के धोबरी वन क्षेत्र में एक कम उम्र के हाथी की झाड़ियों और लताओं में फँसने के बाद मौत हो गई थी। जनवरी 2026 में पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो क्षेत्र में एक हाथी की दूसरे हाथी के साथ संघर्ष में लगी चोटों से मौत हुई थी।

मानव-हाथी संघर्ष और ग्रामीणों की माँग

झारखंड के कई इलाकों में हाथियों के जंगल से निकलकर गाँवों और खेतों तक पहुँचने से मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति लगातार बनती रही है। ग्रामीणों ने हाथी गलियारों को सुरक्षित करने, बिजली के तारों की नियमित निगरानी और हाथियों की आवाजाही की समय रहते सूचना देने की व्यवस्था मज़बूत करने की माँग की है।

आगे क्या होगा

गढ़वा में मृत पाए गए हाथी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सटीक कारण सामने आ सकेगा। वन विभाग की जाँच जारी है और स्थानीय गवाहों से पूछताछ का सिलसिला भी चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन लगातार हो रही मौतों के मद्देनज़र राज्य सरकार को हाथी संरक्षण नीति की व्यापक समीक्षा करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसमें भी एक हथिनी के दाँत गायब मिलना, यह संकेत देता है कि निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता है। करंट, अवैध तार, लताओं में फँसना और शिकार — मौत के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन हर बार जाँच पोस्टमार्टम पर अटक जाती है और नतीजे सार्वजनिक नहीं होते। बिना पारदर्शी जवाबदेही और हाथी गलियारों की व्यावहारिक सुरक्षा के, ये घटनाएँ बार-बार दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़वा में हाथी की मौत कैसे हुई?
मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और जाँच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।
झारखंड में चार दिनों में दूसरी हाथी की मौत कहाँ हुई थी?
पहली घटना पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में हुई थी, जहाँ एक हथिनी मृत मिली थी। उस हथिनी के दोनों दाँत गायब पाए गए थे।
झारखंड में हाथियों की मौत का सिलसिला कितना पुराना है?
झारखंड में हाथियों की मौतें वर्षों से दर्ज होती रही हैं। 2019 में करंट लगने, अगस्त 2023 में शावक की मौत, सितंबर 2026 में अवैध बिजली तार और मई 2026 में लताओं में फँसने जैसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। जगन्नाथपुर क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत बताई गई है।
ग्रामीण हाथियों की सुरक्षा के लिए क्या माँग कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने हाथी गलियारों को सुरक्षित करने, बिजली के तारों की नियमित निगरानी और हाथियों की आवाजाही की समय रहते सूचना देने की व्यवस्था मज़बूत करने की माँग की है।
मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति झारखंड में कैसी है?
झारखंड के कई इलाकों में हाथी जंगल से निकलकर गाँवों और खेतों तक पहुँचते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति लगातार बनती रही है। अवैध बिजली के तार इस संघर्ष को और घातक बना देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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