4 नवंबर 2026
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झारखंड में दो माह में चौथी हाथी की मौत, पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा में खेत में मिला शव

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झारखंड में दो माह में चौथी हाथी की मौत, पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा में खेत में मिला शव

सारांश

झारखंड में हाथियों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। दो महीनों में चौथी घटना में पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा में हाथी का शव खेत में मिला। ग्रामीण रात भर जागते रहे, वन विभाग नदारद रहा। करंट, शिकार और संघर्ष — कारण बदलते हैं, मौतें नहीं रुकतीं।

मुख्य बातें

4 नवंबर 2026 को पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा बस्ती के पास खेत में हाथी का शव मिला।
पिछले दो महीनों में झारखंड के अलग-अलग वन क्षेत्रों में हाथियों की मौत की चार घटनाएँ दर्ज।
ग्रामीणों ने करंट लगने की आशंका जताई; पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
वन विभाग को सूचना देने के बावजूद कोई टीम मौके पर नहीं पहुँची; ग्रामीण पूरी रात 20 हाथियों के झुंड को खुद भगाते रहे।
जगन्नाथपुर क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में सात हाथियों की मौत; एक मादा हाथी के दोनों दाँत गायब मिले थे, जिससे तस्करी की आशंका।
7 सितंबर 2026 को लातेहार के कोमर गाँव में बिजली के करंट से एक हाथी की मौत हो चुकी है।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के टंकुरा बस्ती स्थित बुरमा टोली के निकट बुधवार, 4 नवंबर 2026 की सुबह एक खेत में हाथी का शव मिला, जिससे राज्य में पिछले दो महीनों में हाथियों की मौत की घटनाओं की संख्या चार हो गई है। मृत्यु का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

मुख्य घटनाक्रम

बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र के टंकुरा में मंगलवार शाम करीब 20 हाथियों का एक झुंड गाँव की सीमा में दाखिल हो गया था। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी और सहायता माँगी, परंतु ग्रामीणों के अनुसार विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुँची। इसके बाद ग्रामीण खुद पूरी रात जागते रहे और झुंड को गाँव से दूर खदेड़ने में जुटे रहे। बुधवार की सुबह उन्हें खेत में एक हाथी मृत अवस्था में मिला।

ग्रामीणों ने करंट लगने की आशंका जताई है। उन्होंने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।

पिछले दो माह की घटनाएँ

यह घटना अकेली नहीं है — झारखंड में हाथियों की मौत का यह सिलसिला लगातार जारी है। 28 अक्टूबर 2026 को लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के बिशुनपुर जंगल में एक हाथी मृत मिला था। रेंजर नंदकुमार महतो के नेतृत्व में अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की टीम ने जाँच की और हाथियों के आपसी संघर्ष में मौत की आशंका जताई।

अक्टूबर की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर क्षेत्र के भाँगाँव में एक मादा हाथी मृत मिली थी, जिसके दोनों दाँत गायब थे। इससे हाथी दाँत की तस्करी के लिए शिकार की आशंका व्यक्त की गई थी। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में सात हाथियों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।

7 सितंबर 2026 को लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र के कोमर गाँव में करीब 15 हाथियों का झुंड खेतों की ओर पहुँचा था। इसी दौरान एक हाथी फसल और घर की सुरक्षा के लिए लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

वन विभाग की प्रतिक्रिया पर सवाल

टंकुरा की ताजा घटना में ग्रामीणों द्वारा सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम का न पहुँचना गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को रात भर खुद पहरेदारी करनी पड़ी, जो मानव-हाथी संघर्ष के लिहाज से अत्यंत जोखिमभरा था। विभाग की सक्रियता और त्वरित प्रतिक्रिया पर स्थानीय समुदाय का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

आम जनता पर असर और आगे की स्थिति

झारखंड में जंगलों से सटे गाँवों में हाथियों की आवाजाही तेज होती जा रही है। फसल और घर बचाने के लिए ग्रामीण बिजली के करंट जैसे खतरनाक उपाय अपनाने पर मजबूर हो रहे हैं, जिससे हाथियों और मनुष्यों दोनों की जान को खतरा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि इस बार मौत करंट से हुई या किसी अन्य कारण से — और उसी के आधार पर आगे की जाँच की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिकार और आपसी संघर्ष, हर बार कारण अलग, लेकिन वन विभाग की प्रतिक्रिया लगातार सुस्त। जब ग्रामीण खुद रात भर जागकर जंगली जानवरों के झुंड को भगाने पर मजबूर हों, तो यह सवाल उठता है कि राज्य का वन्यजीव संरक्षण तंत्र कहाँ है। जगन्नाथपुर क्षेत्र में एक साल में सात मौतें और दोनों दाँत गायब मिलना बताता है कि अवैध शिकार का खतरा भी बना हुआ है, जिस पर जाँच की रफ्तार सुस्त दिखती है। बिना जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र के, ये पोस्टमार्टम रिपोर्टें महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा में हाथी की मौत कैसे हुई?
4 नवंबर 2026 को टंकुरा बस्ती के पास खेत में हाथी का शव मिला। ग्रामीणों ने करंट लगने की आशंका जताई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
झारखंड में पिछले दो महीनों में कितनी बार हाथी की मौत हुई?
पिछले दो महीनों में राज्य के अलग-अलग वन क्षेत्रों में हाथियों की मौत की चार घटनाएँ सामने आई हैं — 7 सितंबर को लातेहार के कोमर गाँव में करंट से, अक्टूबर की शुरुआत में जगन्नाथपुर के भाँगाँव में मादा हाथी, 28 अक्टूबर को लातेहार के बिशुनपुर जंगल में, और 4 नवंबर को टंकुरा में।
झारखंड में हाथी दाँत तस्करी की आशंका क्यों जताई जा रही है?
अक्टूबर की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर क्षेत्र के भाँगाँव में मृत मिली मादा हाथी के दोनों दाँत गायब थे। इससे अवैध शिकार और हाथी दाँत की तस्करी की आशंका जताई गई, और वन विभाग ने जाँच शुरू की थी।
ग्रामीण हाथियों को भगाने के लिए बिजली के तार का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
झारखंड में जंगलों से सटे गाँवों में हाथियों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे फसल और घर को नुकसान पहुँचता है। ग्रामीण सुरक्षा के लिए बिजली के तार लगाते हैं, जो हाथियों और मनुष्यों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है — जैसा 7 सितंबर को कोमर गाँव में हुआ।
वन विभाग की भूमिका पर ग्रामीणों ने क्या सवाल उठाए हैं?
टंकुरा की घटना में ग्रामीणों ने सूचना देने के बावजूद वन विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुँची। ग्रामीणों को खुद पूरी रात 20 हाथियों के झुंड को भगाना पड़ा। उन्होंने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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