झारखंड में दो माह में चौथी हाथी की मौत, पश्चिमी सिंहभूम के टंकुरा में खेत में मिला शव
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के टंकुरा बस्ती स्थित बुरमा टोली के निकट बुधवार, 4 नवंबर 2026 की सुबह एक खेत में हाथी का शव मिला, जिससे राज्य में पिछले दो महीनों में हाथियों की मौत की घटनाओं की संख्या चार हो गई है। मृत्यु का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
मुख्य घटनाक्रम
बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र के टंकुरा में मंगलवार शाम करीब 20 हाथियों का एक झुंड गाँव की सीमा में दाखिल हो गया था। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी और सहायता माँगी, परंतु ग्रामीणों के अनुसार विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुँची। इसके बाद ग्रामीण खुद पूरी रात जागते रहे और झुंड को गाँव से दूर खदेड़ने में जुटे रहे। बुधवार की सुबह उन्हें खेत में एक हाथी मृत अवस्था में मिला।
ग्रामीणों ने करंट लगने की आशंका जताई है। उन्होंने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।
पिछले दो माह की घटनाएँ
यह घटना अकेली नहीं है — झारखंड में हाथियों की मौत का यह सिलसिला लगातार जारी है। 28 अक्टूबर 2026 को लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के बिशुनपुर जंगल में एक हाथी मृत मिला था। रेंजर नंदकुमार महतो के नेतृत्व में अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की टीम ने जाँच की और हाथियों के आपसी संघर्ष में मौत की आशंका जताई।
अक्टूबर की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर क्षेत्र के भाँगाँव में एक मादा हाथी मृत मिली थी, जिसके दोनों दाँत गायब थे। इससे हाथी दाँत की तस्करी के लिए शिकार की आशंका व्यक्त की गई थी। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में सात हाथियों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।
7 सितंबर 2026 को लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र के कोमर गाँव में करीब 15 हाथियों का झुंड खेतों की ओर पहुँचा था। इसी दौरान एक हाथी फसल और घर की सुरक्षा के लिए लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग की प्रतिक्रिया पर सवाल
टंकुरा की ताजा घटना में ग्रामीणों द्वारा सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम का न पहुँचना गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को रात भर खुद पहरेदारी करनी पड़ी, जो मानव-हाथी संघर्ष के लिहाज से अत्यंत जोखिमभरा था। विभाग की सक्रियता और त्वरित प्रतिक्रिया पर स्थानीय समुदाय का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
झारखंड में जंगलों से सटे गाँवों में हाथियों की आवाजाही तेज होती जा रही है। फसल और घर बचाने के लिए ग्रामीण बिजली के करंट जैसे खतरनाक उपाय अपनाने पर मजबूर हो रहे हैं, जिससे हाथियों और मनुष्यों दोनों की जान को खतरा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि इस बार मौत करंट से हुई या किसी अन्य कारण से — और उसी के आधार पर आगे की जाँच की दिशा तय होगी।