यूसीएलए लॉ स्कूल पर एशियाई-श्वेत छात्रों से भेदभाव का आरोप, अमेरिकी न्याय विभाग की जाँच
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि यूसीएलए स्कूल ऑफ लॉ ने अपनी एडमिशन प्रक्रिया में नस्ल को आधार बनाकर एशियाई और श्वेत आवेदकों के साथ भेदभाव किया। विभाग के अनुसार यह भेदभाव 2023, 2024 और 2025 में प्रवेश पाने वाली कक्षाओं के दौरान हुआ। कैलिफोर्निया के इस प्रतिष्ठित लॉ स्कूल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता-आधारित है।
जाँच का आधार और कानूनी ढाँचा
न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन ने कहा कि यूसीएलए लॉ की एडमिशन प्रक्रिया 1964 के सिविल राइट्स एक्ट के 'टाइटल VI' का उल्लंघन करती है, जो संघीय वित्त पोषित संस्थानों में नस्ल-आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। यह जाँच 'स्टूडेंट्स फॉर फेयर एडमिशन बनाम हार्वर्ड' मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 2023 के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद शुरू हुई, जिसमें विश्वविद्यालय प्रवेश में नस्ल के उपयोग पर रोक लगाई गई थी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी शीर्ष कानून विद्यालय की प्रवेश नीति संघीय जाँच के दायरे में आई हो — 2023 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद से देशभर में दर्जनों संस्थानों की प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।
न्याय विभाग के मुख्य आरोप
न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन की प्रमुख और असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने कहा, 'अपने जैसे कई दूसरे संस्थानों की तरह यूसीएलए लॉ स्कूल दो स्तर वाली एडमिशन व्यवस्था चलाता है, जिसमें एडमिशन के लिए शैक्षणिक स्तर आपकी त्वचा के रंग के आधार पर ऊपर या नीचे हो जाता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'किसी छात्र को फायदा या नुकसान पहुँचाने के लिए नस्ल का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। विभाग कानून के तहत सभी के साथ बराबर व्यवहार सुनिश्चित करने का काम जारी रखेगा, जिसमें देश के लॉ स्कूल भी शामिल हैं।'
जाँचकर्ताओं के अनुसार, यूसीएलए लॉ के आवेदन में पर्सनल स्टेटमेंट और निबंध से जुड़े ऐसे प्रश्न शामिल थे, जिनसे कथित तौर पर आवेदक की नस्ल से संबंधित जानकारी सामने आ सकती थी। विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि एडमिशन स्टाफ ने भर्ती कार्यक्रमों में संभावित छात्रों को बताया कि वे आवेदन के विभिन्न हिस्सों में अपनी नस्ल की जानकारी किस प्रकार दे सकते हैं।
एलएसएटी स्कोर का विश्लेषण
न्याय विभाग के दावे के अनुसार, 2024 और 2025 के एडमिशन चक्रों में प्रवेश पाने वाले आधे अश्वेत आवेदकों के 'लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट' (LSAT) स्कोर उस स्तर पर या उससे नीचे थे, जितने स्कोर पर प्रवेश पाने वाले 90 प्रतिशत श्वेत आवेदकों के थे। विभाग ने यह भी कहा कि कुछ श्वेत और एशियाई आवेदकों को प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि उनके एलएसएटी स्कोर उन अश्वेत और हिस्पैनिक आवेदकों के बराबर थे जिन्हें प्रवेश मिला। हालांकि, ये आँकड़े और निष्कर्ष न्याय विभाग की जाँच के दावे हैं, न कि अदालत में सिद्ध तथ्य।
न्याय विभाग ने यूसीएलए लॉ के वार्षिक 'डायवर्सिटी एडमिशन ओपन हाउस' को भी संदिग्ध भर्ती गतिविधि के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया।
यूसीएलए की प्रतिक्रिया
यूसीएलए स्कूल ऑफ लॉ ने अपने बयान में कहा, 'यूसीएलए स्कूल ऑफ लॉ सभी लागू कानूनों के मुताबिक एडमिशन के फैसले लेने के लिए प्रतिबद्ध है — इनमें कैलिफोर्निया का संविधान और प्रपोज़िशन 209, संघीय कानून और अमेरिकी संविधान शामिल हैं।'
स्कूल ने यह भी स्पष्ट किया कि एडमिशन प्रक्रिया केवल किसी एक शैक्षणिक स्कोर पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की समग्र उपलब्धियों और अनुभवों पर आधारित एक व्यापक समीक्षा के माध्यम से संचालित होती है।
आगे क्या होगा
न्याय विभाग के अनुसार, यदि जाँच में कानून का उल्लंघन साबित होता है, तो विभाग पहले संस्थान के साथ बातचीत के ज़रिये एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव कराने की कोशिश करेगा। यदि बातचीत से सहमति नहीं बनती, तो विभाग संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर सकता है। यह मामला उन तमाम अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए एक संकेत है, जो सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के बाद भी परोक्ष रूप से नस्ल-संवेदनशील एडमिशन नीतियाँ अपनाते रहे हैं।