अमेरिकी कांग्रेस में चीन जासूसी सुनवाई: रो खन्ना ने गवाह माइकल लुची पर लगाया नस्लभेद का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की 27 जून को हुई सुनवाई उस समय तीखे टकराव में बदल गई, जब भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने गवाह और स्टेट आर्मर के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल लुची पर चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों के विरुद्ध नस्लभेदी सोच रखने का सीधा आरोप लगाया। चीन के बढ़ते प्रभाव और जासूसी गतिविधियों पर केंद्रित यह सुनवाई नागरिकता, राष्ट्रीय सुरक्षा और नस्लीय भेदभाव के सवालों पर राष्ट्रीय बहस का मंच बन गई।
विवाद की जड़: पुराना सोशल मीडिया बयान
विवाद की शुरुआत माइकल लुची के सोशल मीडिया पर किए गए एक पुराने बयान से हुई, जिसमें उन्होंने उन लोगों की जन्मसिद्ध नागरिकता की समीक्षा का सुझाव दिया था जो अमेरिकी क्षेत्र में जन्मे तो थे, लेकिन जीवनभर चीन में रहे। रो खन्ना ने इस बयान को आधार बनाकर लुची से सीधे पूछा: 'क्या आप मानते हैं कि जन्मसिद्ध नागरिकता पाने वाले लाखों चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों की नागरिकता खत्म कर दी जानी चाहिए, या फिर आप सिर्फ नस्लभेदी हैं?'
खन्ना ने लुची को अपना रिकॉर्ड सुधारने का अवसर देते हुए कहा कि यह बयान 'बेहद संकीर्ण सोच और विदेशी विरोधी मानसिकता' को दर्शाता है।
माइकल लुची का बचाव
माइकल लुची ने नस्लभेद के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका तर्क था कि उनका बयान केवल उन विशेष मामलों पर लागू होता है जहाँ किसी व्यक्ति का अमेरिका से केवल जन्म का संबंध है और उसके बाद देश से लगभग कोई जुड़ाव नहीं रहा। उन्होंने कहा: 'अगर किसी व्यक्ति का अमेरिका से केवल जन्म का संबंध है और उसके बाद उसका देश से लगभग कोई जुड़ाव नहीं है, तो ऐसे मामलों की समीक्षा पर विचार किया जा सकता है।'
लुची ने यह भी बताया कि उनके अपने परिवार के आठ सदस्यों में से केवल वही ऐसे हैं जिनकी चीनी मूल की पृष्ठभूमि नहीं है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बहस का केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा होना चाहिए, न कि नस्लभेद के आरोप।
रो खन्ना का जवाबी हमला
रो खन्ना ने बार-बार यह सवाल उठाया कि क्या लुची का यह प्रस्ताव केवल चीन से जुड़े लोगों पर लागू होगा या अन्य देशों के नागरिकों पर भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी जनता तय करेगी कि चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात करने वाले व्यक्ति को नस्लभेदी माना जाए या नहीं। यह टकराव संसदीय सुनवाइयों में दुर्लभ स्तर की तल्खी का उदाहरण बना।
एशियन अमेरिकन समुदाय की आवाज़
सुनवाई में एशियन अमेरिकन्स एडवांसिंग जस्टिस के अध्यक्ष और कार्यकारी निदेशक जॉन सी. यांग ने भी सांसदों को संबोधित किया। उन्होंने माना कि चीनी सरकार से उत्पन्न सुरक्षा चुनौती वास्तविक है, लेकिन चेताया कि इसका समाधान जातीय पहचान के आधार पर संदेह पैदा करना नहीं हो सकता।
यांग ने कहा कि जासूसी और सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल सबूतों और व्यक्ति के व्यवहार के आधार पर होनी चाहिए, न कि नस्ल या मूल के आधार पर। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अत्यधिक कठोर नीतियाँ अपनाने पर वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और प्रतिभाशाली छात्रों का अमेरिका आने का उत्साह कम हो सकता है — जो दीर्घकालिक रूप से अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुँचाएगा।
आगे क्या होगा
यह सुनवाई ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में चीनी जासूसी और प्रभाव अभियानों को लेकर कानूनी और नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में एशियाई मूल के नागरिकों को संदेह की नज़र से देखने की प्रवृत्ति ऐतिहासिक रूप से समुदायों को नुकसान पहुँचाती रही है। कमेटी की आगामी बैठकों में यह बहस और गहरी होने की संभावना है।