चीनी छात्र वीजा रद्द करो: अमेरिकी सांसद लूना की मांग, चुनाव हस्तक्षेप का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
रिपब्लिकन सांसद एना पॉलिना लूना ने 21 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को पत्र लिखकर मांग की है कि अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत सभी चीनी नागरिकों के एफ-1 और जे-1 छात्र वीजा तत्काल निलंबित और रद्द किए जाएं। उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप का व्यापक अभियान चलाया है।
मांग का आधार: खुफिया दस्तावेज
लूना ने अपने पत्र में उन खुफिया दस्तावेजों का संदर्भ दिया जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में सार्वजनिक (डिक्लासिफाई) करने की घोषणा की थी। इन दस्तावेजों के अनुसार, कथित तौर पर वर्ष 2020 के चुनावों से पूर्व चीनी सरकार ने अमेरिकी चुनावी आंकड़ों को निशाना बनाते हुए इतिहास के सबसे बड़े साइबर जासूसी अभियानों में से एक को अंजाम दिया।
पत्र के अनुसार, इन कथित साइबर हमलों में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक संबद्धता और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी अन्य संवेदनशील जानकारी चुराई गई। ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' ने अवैध रूप से अमेरिका के 22 करोड़ मतदाताओं की फाइलें हासिल कर लीं।
लूना का तर्क: विश्वविद्यालय बने 'प्रवेश बिंदु'
सांसद लूना का कहना है कि अमेरिकी विश्वविद्यालय लंबे समय से विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए संवेदनशील प्रवेश बिंदु रहे हैं। उनके अनुसार, सार्वजनिक दस्तावेजों में वर्णित हस्तक्षेप के स्तर को देखते हुए अमेरिका मौजूदा छात्र वीजा व्यवस्था को सीसीपी के संभावित प्रभाव अभियान का माध्यम बनने देने का जोखिम नहीं उठा सकता।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'मैंने राष्ट्रपति के संबोधन के बाद भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि हर एक चीनी छात्र वीजा तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। यह अमेरिकी चुनावों की अखंडता को कमजोर करने के लिए प्रायोजित प्रयासों के जवाब में आवश्यक और उचित कदम है।'
विदेश मंत्रालय से तीन सूत्री मांग
लूना ने विदेश मंत्रालय से तीन ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है: सभी सक्रिय चीनी छात्र वीजा की तत्काल समीक्षा कर उन्हें रद्द करना, चीनी नागरिकों को नए छात्र वीजा जारी करने की प्रक्रिया रोकना, और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में लागू जांच एवं सत्यापन प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करना। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध पहले से ही व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर तनावपूर्ण हैं।
व्यापक संदर्भ: ट्रंप के आरोप
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने, उनके कार्यकाल को कमजोर करने और अमेरिकी खुफिया तंत्र के भीतर अपनी गतिविधियाँ छिपाने का आरोप लगाया है। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं और चीन ने इन्हें अस्वीकार किया है। लूना की यह मांग उसी राजनीतिक माहौल में उभरी है जहाँ अमेरिकी कांग्रेस में चीन से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर बहस तेज हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मांग पर कार्रवाई होती है तो इसका असर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हजारों चीनी छात्रों पर पड़ेगा और यह अमेरिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए भी बड़ा झटका होगा। आगे यह देखना होगा कि विदेश मंत्री रूबियो इस पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं।