चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा हैक किया: व्हाइट हाउस का बड़ा दावा
सारांश
मुख्य बातें
व्हाइट हाउस ने 31 जुलाई 2026 को एक विस्तृत फैक्ट शीट जारी कर दावा किया कि डीक्लासिफाई किए गए अमेरिकी खुफिया दस्तावेज़ों के अनुसार चीन और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क ने 22 करोड़ (220 मिलियन) अमेरिकी नागरिकों का वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा हासिल किया — जिसमें वह जानकारी भी शामिल है जो आम जनता के लिए सार्वजनिक नहीं थी। यह दावा अमेरिकी चुनाव सुरक्षा को लेकर अब तक के सबसे गंभीर आरोपों में से एक माना जा रहा है।
फैक्ट शीट किसने जारी की और इसे किसने मंजूरी दी
यह फैक्ट शीट व्हाइट हाउस गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स ने जारी की। दस्तावेज़ के अनुसार इसे नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NSA), सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) और गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के शीर्ष अधिकारियों ने मंजूरी दी है। यह रिलीज़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश से जुड़ी है जिसमें उन्होंने विदेशी चुनावी हस्तक्षेप से संबंधित खुफिया दस्तावेज़ों को डीक्लासिफाई करने का निर्देश दिया था।
चीनी साइबर ऑपरेशन का तरीका
फैक्ट शीट में बताया गया है कि 2022 की खुफिया रिपोर्टों में एक चीनी कंप्यूटर नेटवर्क एक्सप्लॉइटेशन (CNE) अभिकर्ता की पहचान की गई थी, जिसने व्यावसायिक वेबसाइटों पर संग्रहीत मतदाता पंजीकरण डेटा तक पहुँच बनाई। अधिकारियों के अनुसार, CNE अभिकर्ता आमतौर पर साइबर ऑपरेशन के ज़रिये वह जानकारी हासिल करते हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती।
दस्तावेज़ में 'चुनाव में प्रभाव डालने वाली गतिविधियों' को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि इनमें विदेशी सरकारों या उनके एजेंटों द्वारा की जाने वाली खुली और छिपी दोनों तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, वोटरों या चुनावी प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करना है।
डेटा चोरी से क्या खतरे हो सकते हैं
व्हाइट हाउस ने दस्तावेज़ के हवाले से चेताया कि विरोधी देश चुराए गए डेटा का उपयोग कर वोटर रिकॉर्ड में बदलाव कर सकते हैं, जिससे किसी वोटर या वोटरों के समूह को मतदान से रोका जा सके। इससे चुनाव के दिन देरी हो सकती है या वोटरों को प्रोविजनल बैलेट का इस्तेमाल करने पर मजबूर किया जा सकता है। इसके अलावा, यह डेटा अन्य हस्तक्षेप अभियानों को और अधिक सटीक बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ट्रंप के 16 जुलाई के भाषण से संबंध
फैक्ट शीट में राष्ट्रपति ट्रंप के 16 जुलाई 2026 के उस भाषण की इंटर-एजेंसी प्रक्रिया का भी विवरण दिया गया, जिसमें उन्होंने चीन की चुनावी हस्तक्षेप गतिविधियों का उल्लेख किया था। दस्तावेज़ के अनुसार, NSA, CIA, FBI, DHS और नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के कार्यालय के प्रतिनिधियों ने उस भाषण में शामिल तथ्यों की पुष्टि की थी। गौरतलब है कि यह रिलीज़ ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी चुनावी हस्तक्षेप से जुड़े खुफिया दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने की दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे व्यापक कदम है।
आगे क्या होगा
सरकार का कहना है कि इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने से चुनाव सुरक्षा और विदेशी साइबर ऑपरेशन से जुड़े खुफिया आकलनों में अधिक पारदर्शिता आएगी। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनाव नज़दीक हैं और साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ हो रही है। चीन ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।