ट्रंप के 2020 चुनाव दावों पर काउंसलर पीटर नवारो बोले — चीन ने 22 करोड़ मतदाताओं का डेटा चुराया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जुलाई को व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में दावा किया कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा अवैध रूप से हासिल किया। उन्होंने चुनाव सुरक्षा से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक करने की भी घोषणा की। इस घोषणा के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है।
ट्रंप के दावे और खुफिया दस्तावेज
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने चुनावी डेटा में इतिहास की सबसे बड़ी सेंध लगाई, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर लीं।' उनके अनुसार, चुराए गए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल की प्राथमिकता और अन्य व्यक्तिगत जानकारियाँ शामिल थीं।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों को पहली बार 2020 में पता चला कि 18 राज्यों में करोड़ों वोटर रिकॉर्ड चीन ने खरीदे, चुराए या हैक किए थे। उनका यह भी दावा है कि इस जानकारी को न राष्ट्रपति को, न कांग्रेस को सूचित किया गया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझे या राष्ट्रपति के तौर पर किसी और को यह नहीं बताया और हमारी जानकारी के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस को भी नहीं बताया।'
पीटर नवारो का समर्थन और चुनावी व्यवस्था पर निशाना
राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि इन खुलासों का उद्देश्य उन सूचनाओं को सार्वजनिक करना था जिन्हें पहले गोपनीय रखा गया था। नवारो ने कहा, 'मेरी राय में इन सूचनाओं को कभी गोपनीय नहीं रखा जाना चाहिए था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें इसलिए जारी किया ताकि अमेरिकी जनता देश की चुनावी प्रणाली में मौजूद कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझ सके।'
नवारो ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल चीन के बारे में नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह हमारे चुनावों की ईमानदारी को सुरक्षित रखने में अमेरिकी राजनीतिक प्रणाली की नाकामी के बारे में है। मेरे हिसाब से ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कुछ घरेलू लोग चाहते थे कि 2020 के चुनाव का नतीजा वोटरों की उम्मीद से अलग हो।'
सेव अमेरिका एक्ट पर नवारो का रुख
नवारो ने सेव अमेरिका एक्ट को इस दिशा में सबसे अहम कदम बताया। उन्होंने कहा, 'अगर सेव अमेरिका एक्ट पास हो जाता है — जिसमें वोटर आईडी, नागरिकता का सबूत जरूरी होगा और एब्सेंटी बैलेट के लापरवाही से इस्तेमाल पर रोक लगेगी — तो देश में ज्यादा सुरक्षित चुनाव होंगे और ज्यादा ईमानदारी होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि अमेरिकी लोगों का चुनावी प्रक्रिया पर ज्यादा भरोसा होगा।' ट्रंप ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से समर्थन माँगा है।
डेमोक्रेट्स की तीखी प्रतिक्रिया
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के दावों पर चौतरफा निशाना साधा है। आलोचकों का कहना है कि इन खुलासों का समय और प्रस्तुति राजनीति से प्रेरित है। चीन ने भी कथित तौर पर इन सभी आरोपों से इनकार किया है — जैसा कि नवारो ने स्वयं स्वीकार किया: 'चीन ने जैसा कि उम्मीद थी, हर बात से इनकार किया है।'
आगे क्या होगा
सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों की स्वतंत्र जाँच की माँग उठने लगी है। अमेरिकी कांग्रेस में सेव अमेरिका एक्ट पर बहस तेज होने की संभावना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में अगले चुनावी चक्र की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और चुनावी सुरक्षा एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।