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तकनीक चोरी रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, एआई कंपनियों संग साझा करेगा खुफिया जानकारी

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तकनीक चोरी रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, एआई कंपनियों संग साझा करेगा खुफिया जानकारी

सारांश

चीन पर अमेरिकी एआई तकनीक चुराने के आरोपों के बाद ट्रंप प्रशासन ने एआई कंपनियों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने का बड़ा फैसला किया। 'डिस्टिलेशन' तकनीक के जरिए हजारों फर्जी अकाउंट से एआई मॉडल को 'जेलब्रेक' करने के आरोप हैं। एंथ्रोपिक ने डीपसीक समेत तीन चीनी कंपनियों पर तकनीक चोरी का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी एआई कंपनियों के साथ साइबर खतरों की खुफिया जानकारी साझा करने का फैसला किया।
व्हाइट हाउस के विज्ञान सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस ने आंतरिक मेमो में 'डिस्टिलेशन' तकनीक के दुरुपयोग का खुलासा किया।
विदेशी इकाइयां हजारों फर्जी अकाउंट बनाकर एआई मॉडल को 'जेलब्रेक' करने और गोपनीय जानकारी चुराने की कोशिश कर रही हैं।
एंथ्रोपिक ने मार्च 2025 में चीनी कंपनियों डीपसीक, मिनीमैक्स और मूनशॉट एआई पर तकनीक चोरी का आरोप लगाया था।
चीनी दूतावास ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चीन की प्रगति उसकी अपनी मेहनत का नतीजा है।
यह विवाद अमेरिका-चीन तकनीकी शीत युद्ध के एआई मोर्चे पर नए और गंभीर तनाव का संकेत देता है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चीन पर अमेरिकी एआई तकनीक की चोरी और गोपनीय जानकारी तक अवैध पहुंच बनाने के गंभीर आरोपों के बीच ट्रंप प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि वह अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ खुफिया जानकारी और साइबर हमलों से जुड़ी सूचनाएं साझा करेगा, ताकि इन खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

व्हाइट हाउस का आंतरिक मेमो और चौंकाने वाले खुलासे

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने एक आंतरिक मेमो में चेतावनी दी है कि नए और ठोस सबूत सामने आए हैं। इन सबूतों में दावा किया गया है कि विदेशी इकाइयां 'डिस्टिलेशन' नामक तकनीकी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके अमेरिकी एआई कंपनियों की क्षमताओं को हथिया रही हैं।

माइकल क्रैट्सियोस, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के विज्ञान सलाहकार भी हैं, ने स्पष्ट किया कि चीन की यह रणनीति अमेरिकी अनुसंधान एवं विकास (R&D) को कमजोर करने और संवेदनशील तकनीकी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाने की सुनियोजित कोशिश है।

डिस्टिलेशन तकनीक क्या है और इसका दुरुपयोग कैसे होता है

एआई डिस्टिलेशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक बड़ा और जटिल एआई मॉडल अपनी सीखी हुई क्षमताएं और ज्ञान एक छोटे, तेज मॉडल को हस्तांतरित करता है। यह प्रक्रिया सामान्य रूप से वैध है, लेकिन इसका दुरुपयोग तकनीक चोरी के लिए किया जा रहा है।

इस डिस्टिलेशन अभियान में संदिग्ध विदेशी इकाइयां हजारों फर्जी अकाउंट बनाकर किसी एआई टूल या चैटबॉट का उपयोग करती हैं, ताकि वे आम उपयोगकर्ताओं जैसी दिखें। इसके बाद ये अकाउंट मिलकर एआई मॉडल को 'जेलब्रेक' करने या ऐसी संवेदनशील जानकारी निकालने की कोशिश करते हैं जो सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए।

इस चुराई गई जानकारी का उपयोग फिर अपने स्वयं के एआई मॉडल बनाने और उन्हें प्रशिक्षित करने में किया जाता है। इस तरह बिना किसी मौलिक निवेश के उन्नत एआई क्षमताएं हासिल की जाती हैं।

अमेरिका की जवाबी रणनीति — तीन स्तरीय कार्ययोजना

इन खतरों से निपटने के लिए व्हाइट हाउस ने एक तीन-आयामी रणनीति तैयार की है। पहला, अमेरिकी एआई कंपनियों के साथ यह जानकारी साझा की जाएगी कि ये साइबर हमले कैसे किए जाते हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। दूसरा, कंपनियों के साथ मिलकर बेहतर तालमेल और सर्वोत्तम सुरक्षा कार्यप्रणालियां विकसित की जाएंगी। तीसरा, ऐसे विदेशी तत्वों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिम्मेदार ठहराने के तरीके तलाशे जाएंगे।

क्रैट्सियोस ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे बड़े पैमाने पर हो रहे डिस्टिलेशन को पहचानने और रोकने के तरीके विकसित होंगे, वैसे-वैसे उन विदेशी एआई मॉडल्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे जो इसी कमजोर नींव पर खड़े हैं।

एंथ्रोपिक का आरोप और चीन का खंडन

अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने मार्च 2025 में आरोप लगाया था कि चीन की तीन प्रमुख यूनिकॉर्न कंपनियों — डीपसीक, मिनीमैक्स और मूनशॉट एआई — ने उसके क्लाउड मॉडल से गैरकानूनी तरीके से क्षमताएं निकालकर अपने सिस्टम को उन्नत बनाया।

दूसरी ओर, वॉशिंगटन डीसी स्थित चीनी दूतावास के एक प्रतिनिधि ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन की तकनीकी प्रगति उसकी अपनी कड़ी मेहनत और वैध अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है।

व्यापक संदर्भ — अमेरिका-चीन तकनीकी शीत युद्ध का नया अध्याय

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की होड़ चरम पर है। 2023 में अमेरिका ने चीन को उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे। अब एआई के मोर्चे पर भी यही तनाव नए रूप में सामने आ रहा है।

गौरतलब है कि जनवरी 2025 में चीनी एआई स्टार्टअप डीपसीक के उभरने से अमेरिकी तकनीकी जगत में हलचल मच गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिस्टिलेशन के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा की नैतिकता और नियमन पर गहरे सवाल खड़े करेगा।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर कौन से ठोस नीतिगत कदम उठाता है और क्या अमेरिकी एआई कंपनियां इस सरकारी साझेदारी को स्वीकार करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब उसी खुलेपन का फायदा उठाकर प्रतिद्वंद्वी देश उसकी तकनीक हथिया रहे हैं। डीपसीक का उभरना और एंथ्रोपिक के आरोप यह संकेत देते हैं कि एआई नवाचार की दौड़ में नैतिक सीमाएं तेजी से धुंधली हो रही हैं। ट्रंप प्रशासन का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब इन इरादों को ठोस नीति और अंतरराष्ट्रीय एआई नियमन में बदला जाएगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका एआई कंपनियों के साथ क्यों सहयोग बढ़ा रहा है?
चीन पर 'डिस्टिलेशन' तकनीक के जरिए अमेरिकी एआई मॉडल से गोपनीय जानकारी चुराने के आरोपों के बाद ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला किया है। व्हाइट हाउस अब एआई कंपनियों के साथ साइबर हमलों की खुफिया जानकारी साझा करेगा ताकि इन खतरों से मिलकर निपटा जा सके।
एआई डिस्टिलेशन क्या है और इसका दुरुपयोग कैसे होता है?
एआई डिस्टिलेशन एक वैध तकनीक है जिसमें बड़ा एआई मॉडल अपनी क्षमताएं छोटे मॉडल को सिखाता है। इसका दुरुपयोग तब होता है जब हजारों फर्जी अकाउंट बनाकर एआई मॉडल को 'जेलब्रेक' किया जाता है और संवेदनशील जानकारी निकालकर अपने एआई सिस्टम को प्रशिक्षित किया जाता है।
एंथ्रोपिक ने किन चीनी कंपनियों पर आरोप लगाए हैं?
अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने मार्च 2025 में चीन की तीन यूनिकॉर्न कंपनियों — डीपसीक, मिनीमैक्स और मूनशॉट एआई — पर आरोप लगाया। इन कंपनियों पर एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल से गैरकानूनी तरीके से क्षमताएं निकालकर अपने सिस्टम को उन्नत बनाने का आरोप है।
चीन ने इन आरोपों पर क्या कहा?
वॉशिंगटन डीसी स्थित चीनी दूतावास के प्रतिनिधि ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। चीन का कहना है कि उसकी तकनीकी प्रगति अपनी मेहनत और वैध अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नतीजा है।
माइकल क्रैट्सियोस कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
माइकल क्रैट्सियोस अमेरिकी राष्ट्रपति के विज्ञान सलाहकार और व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर हैं। उन्होंने एक आंतरिक मेमो में कहा कि विदेशी इकाइयां डिस्टिलेशन के जरिए अमेरिकी एआई कंपनियों का दुरुपयोग कर रही हैं और इन्हें रोकने के लिए सरकार-उद्योग सहयोग जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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