चीन-रूस गठजोड़ बदल रहा बाल्टिक रणनीति, अमेरिकी सीनेटरों ने जताई गंभीर चिंता
सारांश
मुख्य बातें
वाशिंगटन में 15 मई 2026 को हाउस फॉरेन अफेयर्स सब-कमेटी की सुनवाई के दौरान अमेरिकी सीनेटरों और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि रूस की युद्ध मशीन को चीन का बढ़ता समर्थन लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया की बीजिंग के प्रति सोच को तेज़ी से बदल रहा है। तीनों बाल्टिक देश अब चीन के साथ आर्थिक संबंधों को यूक्रेन युद्ध से सीधे जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।
सुनवाई में क्या उठे मुद्दे
बाल्टिक सुरक्षा पर केंद्रित इस संसदीय सुनवाई में दोनों दलों के सांसदों ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया को नाटो के सबसे भरोसेमंद अग्रिम मोर्चे के सहयोगी बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि ये तीनों देश न केवल नाटो के रक्षा खर्च के लक्ष्यों को पार कर चुके हैं, बल्कि यूक्रेन को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देने में भी अग्रणी रहे हैं। गौरतलब है कि बाल्टिक देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे और 2004 में नाटो में शामिल हुए थे।
चीन का रूस को समर्थन — आँकड़े क्या कहते हैं
अमेरिकी विदेश विभाग के उप सहायक सचिव क्रिस्टोफर स्मिथ ने सांसदों को बताया, 'चीन, रूस के रक्षा औद्योगिक ढाँचे के लिए लगभग 80 फीसदी डुअल यूज़ सामान उपलब्ध कराता है।' उन्होंने कहा कि इसी कारण बाल्टिक सरकारें बीजिंग के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों पर पुनर्विचार कर रही हैं। स्मिथ ने यह भी बताया कि बाल्टिक देश अपने संचार तंत्र से कई चीनी पुर्जे पहले ही हटा चुके हैं और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला पर अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
ताइवान कोण और चीन की रणनीतिक निगाह
रैंकिंग मेंबर प्रतिनिधि विलियम कीटिंग ने कहा कि चीन यूक्रेन संघर्ष पर गहरी नज़र बनाए हुए है और देख रहा है कि नाटो अपनी पूर्वी सीमा पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। कीटिंग ने कहा, 'चीन को लेकर हमारी रणनीतिक नीति उसे सीमित करने की है।' यह बयान उस प्रश्न के संदर्भ में आया जिसमें पूछा गया था कि क्या बीजिंग ताइवान को लेकर अपनी रणनीति बनाते समय यूक्रेन और बाल्टिक घटनाक्रमों का विश्लेषण कर रहा है। स्मिथ ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि चीन निश्चित रूप से यूक्रेन युद्ध का गहराई से अध्ययन कर रहा है।
लिथुआनिया और ताइवान विवाद का संदर्भ
रिपब्लिकन प्रतिनिधि यंग किम ने 2021 में लिथुआनिया द्वारा ताइवान को 'ताइवानीज़' नाम से एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की अनुमति देने के फैसले का उल्लेख किया, जिस पर बीजिंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। किम ने पूछा कि क्या लिथुआनिया के नेताओं की हालिया टिप्पणियों के बाद देश चीन के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में बढ़ रहा है। स्मिथ ने जवाब दिया कि लिथुआनिया यूरोप के भीतर चीन के आर्थिक दबाव के विरुद्ध एक मज़बूत आवाज़ बना हुआ है।
आगे क्या होगा
रिपब्लिकन प्रतिनिधि रैंडी फाइन ने कहा कि चीन इन देशों का भी शत्रु बनता जा रहा है, चाहे भौगोलिक दूरी कितनी भी अधिक क्यों न हो। यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन युद्ध अपने चौथे वर्ष में है और पूरे यूरोप में यह चिंता गहरा रही है कि चीन रूस के लिए एक अहम आर्थिक और तकनीकी जीवन-रेखा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाल्टिक देशों का यह रुख आने वाले महीनों में यूरोपीय संघ की चीन नीति को भी प्रभावित कर सकता है।