अमेरिका का यूरोप में रक्षा जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रयास, चीन पर ध्यान केंद्रित

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अमेरिका का यूरोप में रक्षा जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रयास, चीन पर ध्यान केंद्रित

सारांश

अमेरिका यूरोप में अपनी रक्षा जिम्मेदारी बढ़ाने का दबाव बना रहा है। यह रणनीतिक बदलाव भारत पर भी प्रभाव डालेगा, क्योंकि अमेरिका अब चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर अधिक ध्यान दे रहा है। जानें इस बदलाव का क्या मतलब है।

Key Takeaways

  • अमेरिका यूरोप में रक्षा जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
  • चीन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अमेरिका ने नाटो के सहयोगियों पर दबाव डाला है।
  • रक्षा खर्च बढ़ाना यूरोपीय देशों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत पर इस बदलाव का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा।
  • अमेरिका की सैन्य उपस्थिति यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।

वाशिंगटन, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका अपने सहयोगी देशों पर यूरोप में रक्षा जिम्मेदारी को बढ़ाने का दबाव बना रहा है, जबकि वह महाद्वीप में अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति को बनाए रखे हुए है। यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव है जिसका भारत पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि वाशिंगटन अब चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में अमेरिकी सांसदों और रक्षा अधिकारियों ने बताया कि नाटो अब भी अमेरिकी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है, भले ही अमेरिका अपने सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने और जिम्मेदारी का अधिक हिस्सा उठाने के लिए दबाव डाल रहा हो।

चेयरमैन माइक रोजर्स ने यूरोप में अमेरिकी सेनाओं की किसी भी समय से पहले की कटौती के खिलाफ चेतावनी दी। उनका कहना था कि ऐसा कदम रूस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा, "समय से पहले सेना हटाना एक खतरनाक प्रतिरोधक अंतर पैदा करेगा और रूस को और अधिक आक्रामक होने का न्योता देगा।"

जैसे-जैसे यूक्रेन में युद्ध लम्बा खिंचता जा रहा है, अधिकारियों ने माना कि भारी नुकसान के बावजूद रूस के पास अभी भी काफी सैन्य क्षमता मौजूद है। भारत, जो मॉस्को और पश्चिमी देशों दोनों के साथ संबंध रखता है, इस लंबे संघर्ष के आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों का सामना कर सकता है।

अमेरिकी यूरोपीय कमान के कमांडर जनरल एलेक्सस ग्रिनकेविच ने कहा कि यूरोप में अमेरिकी सेनाएं न केवल नाटो के लिए, बल्कि इस क्षेत्र से बाहर के अभियानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सांसदों से कहा, "अगर यूरोप में हमारी सेनाएं नहीं होतीं, तो हमारे पास वे अड्डे नहीं होते जिनके जरिए हम मध्य पूर्व में अपनी ताकत दिखा पाते।"

उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देश रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वास्तविक क्षमता बनाने में समय लगेगा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि 2035 तक वे ज्यादातर जिम्मेदारियां खुद उठा पाएंगे।"

पेंटागन अब नाटो की जिम्मेदारियों को फिर से संतुलित करने पर ध्यान दे रहा है। रक्षा सहायक सचिव डैनियल ज़िमरमैन ने कहा कि अमेरिका इस गठबंधन के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, लेकिन वह उम्मीद करता है कि पारंपरिक रक्षा के मामले में यूरोप स्वयं आगे बढ़कर नेतृत्व करे। उन्होंने इसे 'ताकत के जरिए शांति' कहा, जिसमें जिम्मेदारियों को आपस में बांटने की बात शामिल है।

सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने संकेत दिया कि यूरोप की रक्षा स्थिति के और मजबूत होने से अमेरिका अपने संसाधनों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ओर मोड़ सकेगा, जो भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सभी पार्टियों के सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप में अमेरिकी सेना की उपस्थिति दुनिया भर के अभियानों के लिए एक मजबूत आधार का काम करती है, जिसमें मध्य पूर्व और अफ्रीका के अभियान भी शामिल हैं। ग्रिनकेविच ने कहा कि यूरोप 'अमेरिका की युद्धक शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच' का काम करता है, जिसे ठिकानों के एक नेटवर्क और सहयोगी देशों की पहुंच का समर्थन प्राप्त है।

इस सुनवाई में अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते तालमेल पर चिंता जताई गई। ग्रिनकेविच ने चेतावनी दी कि इस प्रकार का सहयोग कई क्षेत्रों में जोखिम बढ़ा रहा है और इसके लिए एक एकजुट प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

Point of View

जो न केवल यूरोप बल्कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। यूरोप में अमेरिकी उपस्थिति और चीन पर ध्यान केंद्रित करना, वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित करेगा।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

अमेरिका यूरोप पर क्यों दबाव बना रहा है?
अमेरिका यूरोप पर अपनी रक्षा जिम्मेदारी बढ़ाने का दबाव इसलिए बना रहा है ताकि नाटो की प्रभावशीलता को बनाए रखा जा सके और चीन पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
इस बदलाव का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस बदलाव से भारत को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता हो सकती है, खासकर चीन के संदर्भ में।
यूक्रेन युद्ध का अमेरिका की रणनीति पर क्या असर है?
यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका को अपने संसाधनों को फिर से आवंटित करने और यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है।
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