अमेरिका के सामने बढ़ते परमाणु खतरे: चीन और रूस की चुनौती

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अमेरिका के सामने बढ़ते परमाणु खतरे: चीन और रूस की चुनौती

सारांश

वॉशिंगटन, २६ मार्च। अमेरिका अब चीन और रूस से दोहरी परमाणु चुनौती का सामना कर रहा है। शस्त्र नियंत्रण के अवर सचिव थॉमस डिनानो ने कांग्रेस में यह जानकारी दी, जिसमें उन्होंने पारंपरिक हथियार नियंत्रण ढांचे की सीमाओं को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

अमेरिका को चीन और रूस से दोहरी परमाणु चुनौती का सामना करना है।
पारंपरिक हथियार नियंत्रण ढांचे की सीमाएं स्पष्ट हो रही हैं।
न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति से नए हथियारों की दौड़ की चिंता बढ़ी है।
अमेरिका का नया सुरक्षा ढांचा उभरते खतरों के अनुरूप होगा।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जानकारी साझा करना आवश्यक है।

वॉशिंगटन, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक परिस्थितियों में निरंतर परिवर्तन के बीच, अमेरिका अब एक साथ दो परमाणु खतरों—चीन और रूस का सामना कर रहा है। यह जानकारी शस्त्र नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अवर सचिव थॉमस डिनानो ने कांग्रेस में सुनवाई के दौरान सांसदों को दी।

डिनानो ने स्पष्ट किया कि वर्तमान खतरे का माहौल एक ऐतिहासिक परिवर्तन को दर्शाता है, जिसमें वाशिंगटन को बीजिंग और मॉस्को दोनों से एक साथ परमाणु चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, छोटे परमाणु देशों से भी खतरे बढ़ते जा रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक हथियार नियंत्रण ढांचे अब मौजूदा भू-राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं।

डिनानो ने कहा, “एक नामांकित अधिकारी के रूप में, मैंने ऐसे हथियार नियंत्रण समझौतों की खोज करने का संकल्प लिया है, जो सत्यापन योग्य और लागू करने योग्य हों तथा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करें।”

उन्होंने यह भी बताया कि उनका कार्यालय पुराने तंत्र को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मौजूदा संधियां आज की वास्तविकताओं को, विशेषकर अमेरिका के विरोधियों की बढ़ती परमाणु क्षमताओं के संदर्भ में, सही ढंग से नहीं दर्शातीं।

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली अंतिम प्रमुख संधि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “न्यू स्टार्ट ने केवल अमेरिका को रोका, जबकि रूस को एक बड़ा थिएटर-रेंज न्यूक्लियर हथियार बनाने और बनाए रखने की इजाजत दी।” उन्होंने सरकार के एक्सपायर हो चुके समझौते से आगे बढ़ने के निर्णय का समर्थन किया।

डिनानो ने कहा कि सरकार अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए समझौते के दृष्टिकोण के अनुसार अपडेटेड फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जो लागू करने योग्य हों और उभरते खतरों के अनुरूप ढल सकें।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने एक नई संधि की मांग की और कहा कि भविष्य के समझौतों में तकनीकी बदलाव और बड़े रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का ध्यान रखना होगा।”

अपनी टीम के कार्यों का विवरण देते हुए डिनानो ने कहा कि स्टेट डिपार्टमेंट का विस्तारित “टी फैमिली” ढांचा अब हथियार नियंत्रण, परमाणु अप्रसार, आतंकवाद-रोधी प्रयास और राजनीतिक-सैन्य मामलों जैसे प्रमुख सुरक्षा कार्यों को एकीकृत करता है।

उन्होंने बताया कि इस पुनर्गठन से विभाग के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा कार्यों का समन्वय बेहतर हुआ है, जिससे निर्यात नियंत्रण, प्रतिबंधों के पालन और संधि सत्यापन में बेहतर समन्वय संभव हो रहा है।

डिनानो ने कहा, “हमारी टीम सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने, हथियारों की बिक्री को प्रबंधित करने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारी में सहयोग करने तक के बड़े कार्यों की देखरेख करती है।”

उन्होंने कहा, “राज्य विभाग में हमारा उद्देश्य कूटनीति को आगे बढ़ाना और गठबंधनों का प्रभावी प्रबंधन करना है।” इसके साथ ही, उन्होंने अगली पीढ़ी के खतरों से निपटने के लिए जानकारी साझा करने के महत्व पर भी जोर दिया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक हथियार नियंत्रण ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। न्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने से अमेरिका और रूस के रणनीतिक हथियारों पर लगी सीमा घट गई है, जिससे नए हथियारों की दौड़ की चिंता बढ़ गई है।

चीन के बढ़ते न्यूक्लियर प्रोग्राम ने नए बहुपक्षीय समझौते बनाने की कोशिशों को भी जटिल बना दिया है। यह किसी भी बाइंडिंग हथियार कम करने के ढांचे से बाहर है। यह एक अधिक बिखरे हुए और अनिश्चित वैश्विक न्यूक्लियर आदेश की ओर बदलाव का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऐसे में अमेरिका को अपने वैश्विक सुरक्षा ढांचे को पुनः विचार करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका को किन देशों से परमाणु खतरे का सामना करना पड़ रहा है?
अमेरिका को मुख्यतः चीन और रूस से परमाणु खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
थॉमस डिनानो ने किस विषय पर कांग्रेस में बात की?
थॉमस डिनानो ने शस्त्र नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर चर्चा की।
क्या पारंपरिक हथियार नियंत्रण ढांचे अब प्रभावी हैं?
डिनानो के अनुसार, पारंपरिक हथियार नियंत्रण ढांचे अब मौजूदा भू-राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियों को संभालने में असमर्थ हैं।
न्यू स्टार्ट संधि का क्या महत्व है?
न्यू स्टार्ट संधि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली अंतिम प्रमुख संधि है।
अमेरिका का भविष्य का रक्षा ढांचा क्या है?
अमेरिका एक नए समझौते के दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जो उभरते खतरों के अनुरूप हो।
राष्ट्र प्रेस