प्रकाशम में चलती बस में आग, 36 यात्री सुरक्षित बचे; ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में शुक्रवार, 15 मई की तड़के एक निजी बस में अचानक आग लग गई, जिसमें सवार 36 यात्री बाल-बाल बच गए। यह दुर्घटना उलावपाडु मंडल के भीमावरम अड्डा रोड पर हुई। पुलिस के अनुसार, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
यह निजी बस हैदराबाद से तिरुपति की ओर जा रही थी, जब चालक ने इंजन से धुआं निकलते देखा। स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए उसने तत्काल बस रोकी और यात्रियों को सावधान किया। आग की लपटें उठने से पहले ही सभी 36 यात्री सुरक्षित बाहर निकल गए। इसके तुरंत बाद दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुँची और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।
आग का कारण अज्ञात, जाँच शुरू
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक संकेत इंजन में तकनीकी खराबी की ओर इशारा करते हैं, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्षेत्र में बस दुर्घटनाओं का बढ़ता सिलसिला
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बसों में आग और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। 27 अप्रैल को तेलंगाना के मेडक जिले में एक निजी ट्रैवल बस में आग लगी, जिसमें बस खाली थी और चालक व एक अन्य व्यक्ति समय रहते बाहर निकल गए।
इससे पहले 26 मार्च को आंध्र प्रदेश के मार्कपुरम जिले में रायवरम के पास एक पत्थर की खदान के निकट एक निजी ट्रैवल बस और टिपर ट्रक की भीषण टक्कर में आग लगने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए। दोनों वाहन पूरी तरह जल गए।
गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2025 को कुरनूल के बाहरी इलाके में चिन्नटेकर गाँव के पास एक निजी बस के सड़क पर पड़ी मोटरसाइकिल से टकराने के बाद लगी आग में 19 लोगों की मौत हो गई थी। हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही उस बस में 46 यात्री सवार थे। इसके बाद 3 नवंबर 2025 को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में बस-ट्रक टक्कर में 19 लोगों की जान गई और 24 अन्य घायल हुए।
आम जनता पर असर
हैदराबाद-तिरुपति जैसे व्यस्त मार्गों पर निजी बस यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए यह घटना सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वाहन रखरखाव की खामियाँ और चालकों की जागरूकता इस बार दोनों पहलुओं पर ध्यान गया — एक ने जान बचाई, दूसरे ने जोखिम पैदा किया।
क्या होगा आगे
पुलिस जाँच के नतीजे और परिवहन विभाग की संभावित कार्रवाई इस बात को तय करेगी कि क्या निजी बस ऑपरेटरों पर नियामक दबाव बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में बस अग्निकांडों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वाहनों की नियमित तकनीकी जाँच अनिवार्य किए जाने की ज़रूरत है।