अमेरिका में जाति विवाद: एचएएफ ने न्यायालय का रुख किया
सारांश
Key Takeaways
- एचएएफ ने जाति विवाद पर अमेरिकी अदालत का रुख किया।
- कैलिफोर्निया के नागरिक अधिकार विभाग पर हिंदू धर्म से जाति भेदभाव जोड़ने का आरोप।
- सिस्को सिस्टम्स के खिलाफ शिकायत का मामला।
- निधि शाह ने समुदाय की चिंता को उजागर किया।
- इस मामले का सामाजिक और कानूनी प्रभाव महत्वपूर्ण है।
वाशिंगटन, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने एक अमेरिकी अपीलीय अदालत में याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार नियामक एजेंसी ने जाति के भेदभाव को गलत तरीके से हिंदू धर्म से जोड़ा है और भारतीय तथा दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया है।
6 अप्रैल को दाखिल जवाबी याचिका में एचएएफ ने अपील की है कि निचली अदालत द्वारा उसके मुकदमे को खारिज करने में जिन प्रक्रियात्मक बाधाओं का जिक्र किया गया, उन्हें समाप्त किया जाए। संगठन का दावा है कि जिला अदालत ने उसके दावों के मुख्य मुद्दे पर विचार नहीं किया।
संगठन ने आरोप लगाया है कि कैलिफोर्निया नागरिक अधिकार विभाग (सीआरडी) की कार्रवाई स्पष्ट और अप्रत्यक्ष रूप से 'जाति' को हिंदू धर्म और भारतीय या दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से जोड़ती है, जिससे एक अल्पसंख्यक समुदाय को अलग से निशाना बनाया जा रहा है।
यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जो सीआरडी ने सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज की थी, जिसमें जाति-आधारित भेदभाव के आरोप लगाए गए थे। नियामक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसने 'सिस्को सिस्टम्स व उसके पूर्व प्रबंधकों पर जाति के आधार पर भेदभाव का केस किया है।' यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई।
एचएएफ के अनुसार, कैलिफोर्निया के नागरिक अधिकार विभाग ने अपनी इस थ्योरी पर जोर दिया है कि सिस्को को अपने दक्षिण एशियाई भारतीय कर्मचारियों में होने वाले जाति के भेदभाव को रोकना चाहिए था। संगठन का कहना है कि एजेंसी की शिकायत में जाति शब्द का बार-बार प्रयोग किया गया है।
संगठन का दावा है कि नागरिक अधिकार विभाग की प्रस्तुति भारतीयों और हिंदुओं के बारे में नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित थी। उसने विभाग के उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि 'भारत की जाति व्यवस्था' एक 'कठोर हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम' है।
हालांकि, कैलिफोर्निया के नागरिक अधिकार विभाग ने बाद में इस वाक्यांश को हटा दिया और कहा कि मामला अब अप्रासंगिक हो गया है। फिर भी, संगठन का कहना है कि मूल समस्या अब भी बनी हुई है। फाउंडेशन ने कहा, "'हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम' शब्द हटाने से यह बात नहीं बदलती कि सीआरडी सिर्फ कंपनी के भारतीय, दक्षिण एशियाई और हिंदू कर्मचारियों पर 'जाति' नीति लागू करने की कोशिश कर रहा है।"
एचएएफ की सीनियर लीगल डायरेक्टर निधि शाह ने चेतावनी दी है कि इसका असर एक केस से कहीं ज्यादा है। शाह ने कहा, "हिंदू अमेरिकी, भारतीय अमेरिकी व दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय चिंतित हैं।"
शाह ने आगे कहा, "नागरिक अधिकार विभाग अपनी प्रवर्तन शक्तियों का इस्तेमाल उन अल्पसंख्यक समूहों को अलग करने की कोशिश कर रहा है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है। कैलिफोर्निया के लोग इस पर ध्यान दे रहे हैं।"
उन्होंने यह भी कहा, "नागरिक अधिकार विभाग जाति के आधार पर काम कर रहा है, जाति के आधार पर भेदभाव का दोष हिंदू धर्म पर डाल रहा है और यह बस कुछ ही समय की बात है, जब तक वे अपने अगले हिंदू टारगेट की पहचान नहीं कर लेते।"