क्या यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई?

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क्या यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई?

सारांश

क्या यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं? जानिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका के बारे में।

Key Takeaways

  • यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य भेदभाव को समाप्त करना है।
  • सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं।
  • नियम 3(सी) को असंवैधानिक बताया गया है।
  • यूजीसी ने भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं।
  • पिछले पांच वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें बढ़ी हैं।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उच्च शिक्षा संस्थानों से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों का विरोध निरंतर जारी है। इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। इसी सिलसिले में मंगलवार को एक नई याचिका दायर की गई है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं।

वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है। उनका कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव कर रहे हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि यूजीसी रेगुलेशंस-2026 के प्रावधान 3(सी) को लागू करने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, 2026 के नियमों के अनुसार सभी जातियों के व्यक्तियों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

इससे पूर्व, सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए नियम 3(सी) को चुनौती दी गई थी। एक जनहित याचिका (पीआईएल) में यूजीसी के नए नियम के नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (विशेषकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। इसके अलावा, यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के खिलाफ है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026' लागू किया। इसके अंतर्गत कई संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाने और भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान है, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (जैसे डिग्री रोकना, संस्थान की मान्यता रद्द करना आदि) कर सकेगी।

यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्ष में विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118 प्रतिशत बढ़ी हैं। ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए गए थे, जहां एक पुरानी याचिका में कैंपस पर भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी तंत्र की मांग की गई थी।

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि हम यह समझें कि उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियमों का उद्देश्य भेदभाव को समाप्त करना है। हालांकि, यदि यह नियम किसी विशेष वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हमें सभी पक्षों की चिंताओं को सुनना और उन पर विचार करना चाहिए।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

यूजीसी के नए नियम क्या हैं?
यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करना है, जिसमें इक्विटी कमेटी का गठन और भेदभाव विरोधी नीति लागू करना शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका क्यों दायर की गई?
यह याचिका इस आरोप के तहत दायर की गई है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।
नियम 3(सी) में क्या है?
नियम 3(सी) के तहत कुछ वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है, जो संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है।
क्या यह याचिका जनहित याचिका है?
हाँ, यह याचिका जनहित याचिका (पीआईएल) के तहत दायर की गई है, जिसमें सभी वर्गों के लिए समान अवसर की मांग की गई है।
यूजीसी के नए नियमों का प्रभाव क्या होगा?
यदि ये नियम लागू होते हैं, तो इससे उच्च शिक्षा में भेदभाव को कम करने और सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
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