क्या मायावती ने यूजीसी के नए नियमों का सही बचाव किया है?
सारांश
Key Takeaways
- यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा में समता के लिए हैं।
- मायावती ने विरोध को जातिवादी मानसिकता का परिणाम बताया।
- नियमों का उद्देश्य भेदभाव को समाप्त करना है।
- इक्विटी कमेटियां शिकायतों की जांच करेंगी।
- सामाजिक तनाव को कम करने की आवश्यकता है।
लखनऊ, 28 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समितियों के गठन के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा बनाए गए नए नियमों का समर्थन किया है। मायावती का कहना है कि सामान्य वर्ग के कुछ व्यक्तियों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी उचित नहीं है।
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिवाद के भेदभाव को समाप्त करने के लिए यूजीसी के द्वारा सरकारी और निजी कॉलेजों में समता समितियों के गठन के नए नियमों का विरोध केवल जातिवादी मानसिकता वाले कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा है, जो कि अनुचित है।"
मायावती ने यूजीसी के नए नियमों पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी का मानना है कि इस तरह के नियमों को लागू करने से पहले यदि सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाता तो यह अधिक संतोषजनक होता और देश में सामाजिक तनाव भी उत्पन्न नहीं होता। इस पर सरकारों और सभी संस्थानों को ध्यान देना चाहिए।"
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दलितों और पिछड़ों को स्वार्थी नेताओं के भड़काऊ बयानों से प्रभावित नहीं होना चाहिए, जो खुद को सस्ती राजनीति में लिप्त रखते हैं। उन्होंने कहा कि इन वर्गों को सावधान रहना चाहिए।
ज्ञात हो कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026' लागू किया। इसके अंतर्गत कई संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाने और भेदभाव विरोधी नीतियों को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन नए नियमों का उद्देश्य कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटी गठित की जाएगी, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर सकेगी।
हालांकि, नए नियमों का विरोध भी हो रहा है। विशेषकर सामान्य वर्ग ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसका विरोध किया है।