क्या प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाया, समान सुरक्षा की मांग की?

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क्या प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाया, समान सुरक्षा की मांग की?

सारांश

प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जो उच्च शिक्षा में भेदभाव को संबोधित करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने नियमों के दायरे और उनके कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या ये नियम वास्तविकता में सभी के लिए समान सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं?

Key Takeaways

  • प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाए हैं।
  • ये नियम उच्च शिक्षा में भेदभाव को संबोधित करने का प्रयास करते हैं।
  • सामाजिक समता के लिए सुरक्षा के उपायों की आवश्यकता है।
  • नियमों के कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी है।
  • समर्थकों और आलोचकों के बीच विवाद है।

नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, २०२६ पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसके दायरे, स्पष्टता और इसके चयनात्मक कार्यान्वयन पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि खराब तरीके से बनाए गए नियम विश्वविद्यालय परिसरों में तनाव को बढ़ा सकते हैं।

यूजीसी के जनवरी २०२६ के नोटिफिकेशन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर असमान कानूनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने लिखा, "हालांकि कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है, भारत में छात्रों को इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं। क्या कानून को सभी को शामिल करने वाला और सभी को सुरक्षा की गारंटी देने वाला नहीं होना चाहिए? कानून लागू करने में यह भेदभाव क्यों?"

उन्होंने दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा उपायों की कमी पर भी सवाल उठाया, और पूछा, "झूठे मामलों में क्या होता है? कोई दोषी कैसे तय करता है? भेदभाव को कैसे परिभाषित किया जाता है -- शब्दों, कामों या सोच से?"

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “कानून का लागू होना सभी के लिए साफ, सटीक और समान होना चाहिए। इसलिए, कैंपस में खराब माहौल बनाने के बजाय, मैं आग्रह करूंगी कि यूजीसी नोटिफिकेशन को या तो वापस लिया जाए या उसमें सुधार किया जाए।”

यूजीसी के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, २०२६ का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव विरोधी तंत्र को मजबूत करना है। ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटियों, समान अवसर केंद्रों, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग स्क्वॉड के गठन को अनिवार्य बनाते हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ये भेदभाव को बड़े पैमाने पर परिभाषित करते हैं, जिसमें साफ तौर पर किए गए काम के साथ-साथ अप्रत्यक्ष पूर्वाग्रह और सिस्टमैटिक बहिष्कार भी शामिल हैं।

यूजीसी के अनुसार, ये नियम २०१९ और २०२३ के बीच भेदभाव की शिकायतों में ११८ प्रतिशत की बढ़ोतरी की रिपोर्ट के जवाब में बनाए गए थे, जिसमें खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया था।

हालांकि, इस नोटिफिकेशन पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। सामान्य वर्ग के लोगों ने इन नियमों की आलोचना करते हुए इन्हें एकतरफा ढांचा बताया है और तर्क दिया है कि आरोपियों के लिए सुरक्षा अपर्याप्त है और ऊंची जाति के छात्रों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा सकता है।

दूसरी ओर, इन नियमों के समर्थकों ने ऐतिहासिक हाशिए पर धकेलने की समस्या को दूर करने के लिए इन्हें ज़रूरी सुधारात्मक उपाय बताया है, और जोर देकर कहा है कि ये नियम रिवर्स भेदभाव नहीं हैं।

ये नियम संस्थागत जवाबदेही लाने की भी कोशिश करते हैं, जिसमें संस्थानों के प्रमुखों पर उत्पीड़न की शिकायतों को दूर करने और नियमित निगरानी के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी डाली गई है।

Point of View

हम देखते हैं कि प्रियंका चतुर्वेदी का यह सवाल न केवल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भेदभाव को लेकर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे संवैधानिक प्रावधानों को लागू किया जाता है। इस तरह के नियमों का उद्देश्य सभी को समान अवसर प्रदान करना है, लेकिन क्या यह वास्तव में लागू हो रहा है? हमें इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर क्या सवाल उठाए?
प्रियंका चतुर्वेदी ने नियमों के दायरे, स्पष्टता और उनके चयनात्मक कार्यान्वयन पर सवाल उठाए हैं।
यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव विरोधी तंत्र को मजबूत करना है।
क्या ये नियम रिवर्स भेदभाव को बढ़ावा देते हैं?
कुछ लोग इन्हें एकतरफा ढांचा मानते हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि ये ऐतिहासिक हाशिए पर धकेलने की समस्या को दूर करने में मदद करेंगे।
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