नलसरोवर पक्षी अभयारण्य: ₹2.94 करोड़ के प्लास्टिक प्रबंधन प्रोजेक्ट से संरक्षण और रोज़गार दोनों का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात वन विभाग ने नलसरोवर पक्षी अभयारण्य के आसपास के गाँवों में ₹2.94 करोड़ की लागत वाला प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे को सीधे खरीदा जाएगा। यह पहल रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित इस वेटलैंड में प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय रोज़गार सृजन दोनों को एक साथ साधने की कोशिश है।
प्रोजेक्ट का ढाँचा और वित्तपोषण
यह प्रोजेक्ट जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से संचालित 'प्रोजेक्ट फॉर इको-रेस्टोरेशन इन गुजरात' के तहत स्वीकृत किया गया है। इसे साणंद स्थित नलसरोवर बर्ड सैंक्चुअरी वाइल्डलाइफ डिवीजन, स्थानीय ग्राम पंचायतों, इको-डेवलपमेंट कमेटियों (EDC) और समुदाय के सदस्यों की साझेदारी में लागू किया जा रहा है।
अहमदाबाद जिले के विरमगाम तालुका के कायला गाँव में एक समर्पित प्लास्टिक कचरा संग्रह केंद्र पहले ही स्थापित किया जा चुका है। इस इन्फ्रास्ट्रक्चर में संग्रह शेड, प्रोसेसिंग यूनिट, कंपाउंड वॉल, सुरक्षा केबिन, जल एवं विद्युत सुविधाएँ, प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीन, सुरक्षा उपकरण और कचरा संग्रह डिब्बे शामिल हैं।
कवरेज क्षेत्र और कार्यान्वयन
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि यह परियोजना अहमदाबाद जिले के वेकारिया, कायला, शाहपुर, धारजी और मेनी गाँवों तथा सुरेंद्रनगर जिले के नानी कथेची और राणागढ़ को कवर करेगी।
गाँवों में कूड़ेदान लगाए जा रहे हैं और EDC स्वयंसेवकों को 'स्वच्छता प्रहरी' के रूप में नियुक्त किया जाएगा। ये स्वयंसेवक निवासियों को सूखे प्लास्टिक कचरे को अलग करने और उचित निपटान के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
सरकार की प्रतिक्रिया और लक्ष्य
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, "दुनियाभर में अहम इस वेटलैंड के आसपास प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का वैज्ञानिक सिस्टम बनाकर, हमारा मकसद प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करना और नलसरोवर के अनोखे इकोसिस्टम को बचाना है।"
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि कचरा संग्रह और परिवहन की व्यवस्था एक विस्तृत कार्य-अध्ययन के बाद तैयार की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से हर साल नलसरोवर में पहुँचने वाले प्लास्टिक की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे वहाँ की जैव-विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा होगी।
मुख्य परियोजना निदेशक एवं अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एस.के. श्रीवास्तव ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नलसरोवर की पारिस्थितिक अहमियत
नलसरोवर को 24 सितंबर 2012 को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित किया गया था। 12,000 हेक्टेयर में फैला यह वेटलैंड 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो पूरे एशिया में प्रजनन और शीतकालीन आवासों के बीच यात्रा करने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए अनिवार्य ठिकाना है।
वन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 2025–26 के प्रवासी सीज़न में अभयारण्य के 50 सर्वे ज़ोन में पक्षियों की 270 प्रजातियाँ और लगभग 6,42,232 पक्षी दर्ज किए गए — जो 2023–24 की जनगणना की तुलना में 26 प्रजातियाँ और 2,28,399 पक्षी अधिक हैं। इस जनगणना में येलो-ब्रेस्टेड बंटिंग, सोशिएबल लैपविंग, इंडियन स्किमर, बेयर्स पोचार्ड, डेलमेटियन पेलिकन और सारस क्रेन जैसी दुर्लभ एवं वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियाँ भी दर्ज की गईं।
आगे क्या
यह प्रोजेक्ट ग्रामीण समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने का एक प्रयोग है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो गुजरात के अन्य रामसर स्थलों पर भी इसे विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।